यूक्रेन युद्ध के बीच खत्म हो रहा अमेरिका का हथियार भंडार, रूस के रौद्र रूप के आगे जेलेंस्की बने बेचारा!

24 फरवरी को रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से वाशिंगटन अब तक यूक्रेन का हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है और युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16.8 अरब डॉलर से अधिक की सैन्य सहायता प्रदान की गई है।

Russia-ukraine war: रूस ने तूफानी रफ्तार से यूक्रेन पर हमले शुरू कर दिए हैं और पुतिन की सेना काल बनकर यूक्रेन पर कहर बरपा रही है। लेकिन, इन सबके बीच रिपोर्ट आ रही है, कि अमेरिका ने यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई कम कर दी है, जिसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबित, अमेरिका बहुत ही जल्द यूक्रेन को कई तरह के हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई नहीं कर पाएगा, जो रूस के आक्रमण के खिलाफ कीव की लड़ाई के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि अगर यूक्रेन अभी तक युद्ध में डटा हुआ है, तो उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और पश्चिमी देशों से लगातार होने वाली हथियारों की आपूर्ति ही है।

अमेरिका लगातार दे रहा था हथियार

अमेरिका लगातार दे रहा था हथियार

24 फरवरी को रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से वाशिंगटन अब तक यूक्रेन का हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है और युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16.8 अरब डॉलर से अधिक की सैन्य सहायता प्रदान की गई है। लेकिन, अब कई अमेरिकी हथियार और गोला-बारूद खत्म होने के कगार पर पहुंच रहे हैं औऱ और अमेरिका के पास कई तरह के गोला-बारूद सिर्फ इतनी ही मात्रा में बचे हैं, जिनका इस्तेमाल वो अलग अलग घरेलू ट्रेनिंग और युद्धाभ्यास में कर सके। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले तक के हथियार भंडार का निर्माण करने में अमेरिका जैसे देश को भी कई साल लग जाएंगे। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मार्क कैनियन ने हाल के एक विश्लेषण में लिखा है, कि अमेरिका के पास खुद अब गोला-बारूद खत्म होने वाले हैं।

उम्मीद से ज्यादा इस्तेमाल हुए गोला-बारूद

उम्मीद से ज्यादा इस्तेमाल हुए गोला-बारूद

एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया, कि वाशिंगटन एक भीषण शक्ति युद्ध में गोला-बारूद की जरूरतों के बारे में संघर्ष से बड़ा "सबक सीख रहा है", क्योंकि इस य़ुद्ध में हर उम्मीद से ज्यादा गोला-बारूद खत्म हुए हैं। 1990 के दशक में अमेरिकी रक्षा फर्मों को उत्पादन में भारी कमी करने के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि सोवियत संघ के पतन के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने रक्षा खर्च में कमी कर दी थी और उसके बाद से अमेरिकी हथियारों का प्रोडक्शन भी कर दिया गया था और कई हथियारों का प्रोडक्शन तो 10 प्रतिशत से भी कम हो गया था। वहीं, अब अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अब, अमेरिकी सरकार को हथियारह उद्योग और असेंबली लाइनों को फिर से खोलने और स्टिंगर एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल जैसे हथियारों का प्रोडक्शन फिर से शुरू करना चाहिए, जिनका निर्माण साल 2020 के बाद से नहीं किया जा रहा है और जिसने यूक्रेन युद्ध में काफी अहम भूमिका निभाई है।

अमेरिकी हथियारों ने मचाया तांडव

अमेरिकी हथियारों ने मचाया तांडव

यूक्रेन युद्ध में कुछ अमेरिकी हथियारों ने भीषण तांडव मचाया है और वो यूक्रेन में युद्ध के प्रतीक बन गए हैं। जैसे कि, जेवलिन एंटी-टैंक हथियार, जिनका व्यापक रूप से कीव की सेना ने राजधानी को रूसी आक्रमण से बचाने के लिए इस्तेमाल किया और इस हथियार ने रूसी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। वहीं, हिमर, जो एक सटीक रॉकेट प्रणाली है, वो अभी भी यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूक्रेन अपने पूर्व और दक्षिण में मास्को के सैनिकों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में इसका इस्तेमाल जबरदस्त तरीके से कर रहा है।

'नहीं हैं कोई विकल्प'

'नहीं हैं कोई विकल्प'

अमेरिकी हिमर रॉकेट प्रणाली का कोई जवाब रूस के पास नहीं है और अमेरिका के पास इस रॉकेट प्रणाली के लिए जो गोला-बारूद हैं, वो लगातार कम हो रहे हैं। इस रॉकेट की क्षमता 80 किलोमीटर तक मार करने की है। अमेरिकी सरकार के लिए हथियारों की खरीद पर काम करने वाले कैंसियन ने कहा कि, "यदि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी लिस्ट का एक तिहाई हिस्सा यूक्रेन में भेज दिया है और यूक्रेन को 8,000 से 10,000 रॉकेट दिए गये होंगे। यह सूची कई महीनों तक चलने की संभावना है,लेकिन अगर ये खेप खत्म होने के कगार पर आ जाए, तो फिर कोई विकल्प नहीं बचता है। वहीं, उन्होने कहा कि, अमेरिका की क्षमता एक सासल में 5000 गोला उत्पादन करने की है, हालांकि अब अमेरिका अपनी क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रहा है, लेकिन उन्होंने ये भी जोड़ा कि, अमेरिका को अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने में सालों लगेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका ने कीव को लगभग 8,500 जेवलिन मिसाइलें प्रदान की हैं, लेकिन एक हथियार का उत्पादन जो यूक्रेनी प्रतिरोध का प्रतीक बन गया है, प्रति वर्ष केवल 1,000 है।

भंडार भरने में लगेंगे कई साल

भंडार भरने में लगेंगे कई साल

अमेरिकी सरकार ने इसी साल मई महीने में 350 मिलियन डॉलर मूल्य की मिसाइलों का ऑर्डर दिया था, लेकिन हथियार भंडार को फिर से भरने में कई साल लगेंगे। पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कीव को 800,000 से अधिक नाटो मानक 155 मिमी तोपखाने के गोले की आपूर्ति की है, जो सभी पश्चिमी देशों दिए गये गोले की संख्या में तीन चौथाई है। कैनसियन ने कहा कि, "वाशिंगटन ने जो गोले उपलब्ध कराए हैं, वह संभवत: उस सीमा के करीब है जो संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी युद्ध क्षमता को जोखिम के बिना देने को तैयार है।" इन गोले का अमेरिकी उत्पादन वर्तमान में प्रति माह 14,000 है, लेकिन पेंटागन ने घोषणा की है, कि उसका लक्ष्य अगले तीन सालों के भीतर उस आंकड़े को 36,000 तक बढ़ाना है। लेकिन, इसके बावजूद वार्षिक उत्पादन सिर्फ 432,000 तक ही हो पाएगा, जो कि यूक्रेन को सात महीनों में प्रदान किए गए आधे से भी कम है। रूस और यूक्रेन के लिए जिम्मेदार रक्षा विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी लौरा कूपर ने मंगलवार को कहा कि, अमेरिकी रक्षा उद्योग का उत्पादन तेज हो रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि, अमेरिका लगातार यूक्रेन और यूक्रेन के लोगों के साथ खड़ा रहेगा।

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