रूस- यूक्रेन संघर्ष पर भारत के दृष्टिकोण की अमेरिका में सराहना, कहा- युद्ध पर इंडिया के स्टैंड का स्वागत

अमेरिकी में यूरोपीय और यूरेशियन मामलों की सहायक विदेश मंत्री करेन डोनफ्राइड ने बुधवार को भारत की तारीफ की। उन्होंने रूस और यूक्रेन युद्ध पर भारत के दृष्टिकोण का स्वागत किया।

Karen Donfried

Karen Donfried: अमेरिका में यूरोपीय और यूरेशियन मामलों की सहायक विदेश सचिव करेन डोनफ्राइड ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच भारत की प्रशंसा की है। उन्होंने एक बयान में कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच चल रहे अकारण युद्ध को तत्काल समाप्त करने के भारत के आह्वान का स्वागत है।

अमेरिका की सहायक विदेश सचिव करेन डोनफ्राइड ने बुधवार को अपने देश में ऊर्जा संसाधन ब्यूरो के सहायक सचिव ज्योफ्री आर पायट के साथ एक टेलीफोनिक प्रेस ब्रीफिंग में कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका यूक्रेन के लिए भारत के दृष्टिकोण का स्वागत करते हैं। दरअसल, पीएम मोदी ने पिछले दिनों रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर कई अहम बातें कहीं थी। उन्होंने रूस यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान किया था। करेन डोनफ्राइड ने बाली में हुए जी 20 शिखर के समिट में पीएम की कही उन बातों का स्वागत करते हुए याद किया। जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है। करेन डोनफ्राइड ने कहा कि जी20 में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका सराहनीय है।

डोनफ्रीड ने कहा, "हम भारत पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते हैं। भारत के साथ हमारी साझेदारी हमारे सबसे अधिक परिणामी संबंधों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस यूक्रेन ने इस युद्ध को भड़काने के लिए कुछ नहीं किया। लेकिन पुतिन ने एक त्वरित जीत की उम्मीद की थी। रूस यूक्रेन को अपने से कम आंक रहा था, जो कि अनुचित था। "डॉनफ्राइड ने कहा, "रूस अकेले आज इस युद्ध को समाप्त कर सकता है। मेरे बॉस अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि अगर रूस ने लड़ना बंद कर दिया, तो युद्ध समाप्त हो जाएगा, लेकिन अगर यूक्रेन लड़ना बंद कर देता है, तो यूक्रेन खत्म हो जाएगा। अगर पुतिन जीतते हैं तो इसका मतलब यूक्रेन और सभी के लिए हार होगी।"

वहीं डॉनफ्राइड ने कहा की यूएन मानवीय सहायता प्रदान करके यूक्रेन को भारत के समर्थन का स्वागत करते हैं। बता दें कि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बीच अपने लोगों का पक्ष लिया क्योंकि हमारे लाभ देखना महत्वपूर्ण था और कुछ देशों को पहले आगे आना पड़ा। उन्होंने यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि स्थिति का ठोस और कूटनीतिक समाधान चाहने वाला भारत अकेला नहीं बल्कि और कई देश हैं।

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