लाल सागर में हूती विद्रोहियों को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब, 10 देशों ने जहाजों की सुरक्षा के लिए बनाया गठबंधन
इजराइल और हमास जंग के बीच हूती विद्रोही लाल सागर में इजराइल से आने जाने वाले जहाजों को निशाना बनाकर हमला कर रहे हैं। इसकी वजह से कम से कम एक दर्जन शिपिंग लाइनों को परिचालन निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इसी बीच अब अमेरिका ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर हूती हमलों के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की घोषणा की है। अमेरिका ने 10 देशों के साथ मिलकर गठबंधन बनाया है, जोकि हूती विद्रोहियों से वाणिज्यिक जहाजों को बचाने के लिए गश्त करेंगे। इस मिशन को ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन नाम दिया गया है।

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने सोमवार को कहा कि "ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन" गठबंधन में अमेरिका के अलावा बहरीन, कनाडा, फ्रांस, इटली, सेशेल्स, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
रक्षा सचिव ऑस्टिन ने यमन से होने वाले हूतियों के हमलों से व्यापार के मुक्त प्रवाह पर सकंट और निर्दोष नाविकों की जान को खतरा बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन है और ये किसी एक देश का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इसलिए ये फोर्स बनाई जा रही है।
ऑस्टिन ने कहा कि ये एक इंटरनेशनल चुनौती है जो सामूहिक कार्रवाई की मांग करती है। इसलिए आज मैं ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन की स्थापना की घोषणा कर रहा हूं, जो एक महत्वपूर्ण नई बहुराष्ट्रीय सुरक्षा पहल है।
दक्षिणी लाल सागर में वैश्विव भागेदारी का 10 से 12 फीसदी व्यापार होता है। ऑस्टिन ने कहा है कि लाल सागर से गुजरने वाली लेन को सुरक्षित रखा जाना विश्व के लिए जरूरी है, ताकि व्यापार आसानी से हो सके।
ये मल्टी नेशनल टास्क फोर्स दक्षिणी लाल सागर और अदन की खाड़ी में सुरक्षा चुनौतियों से निपटेगी। इसका मकसद सभी देशों के लिए नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि को मजबूत करना है। हाल के दिनों में हूतियों के हमलों की वजह से कई व्यापारिक जहाजों के रूट को बदलने या फिर कैंसिल करने पर कंपनियां मजबूर हुई हैं।
आपको बता दें कि इजराइल के द्वारा गाजा पट्टी में हमले करने के बाद हूती विद्रोहियों ने लाग सागर से गुजरने वाले इजराइल से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तेज कर दिये थे। उन्होंने पिछले महीने एक जहाज को अगवा भी कर लिया था।
हूती विद्रोहियों की कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में खौफ बैठ गया और वे लाल सागर रास्ते से व्यापार करने से कतराने लगीं। कंपनियों ने आने जाने वाले रास्ते को बदलकर लंबी दूरी वाला रास्ता चुन लिया जिसकी वजह से लागत बढ़ गई और सामान समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।












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