वैक्सीन नहीं लेने के कारण गर्भवती महिला के साथ दर्दनाक घटना, बच्चे को जन्म दिया पर खुद कोरोना से हार गई जिंदगी
वैक्सीन नहीं लेने के कारण गर्भवती महिला के साथ दर्दनाक घटना, बच्चे को जन्म दिया पर खुद कोरोना से हार गई जिंदगी
नई दिल्ली, 07 नवंबर: कोरोना वायरस वैक्सीन नहीं लेना कितना खतरनाक और घातक हो सकता है, इसका ताजा उदाहरण ब्रिटेन के बर्मिंघम में देखने को मिला है। जब एक कोरोना संक्रमित मां ने अपने बच्चे को किसी भी तरह ऑपरेशन से जन्म तो दे दिया लेकिन खुद वैक्सीन ना लगवाने की वजह से कोरोना से जिंदगी की जंग हार गई। बर्मिंघम की रहने वाली 37 वर्षीय सैका परवीन को सितंबर के मध्य में आठ महीने की गर्भवती होने के दौरान पता चला कि वह कोविड-19 से संक्रमित हैं। हॉस्पिटल में कई दिनों के रहने के बाद गहन देखभाल में भी इस सप्ताह में उनकी दुखद रूप से मृत्यु हो गई है।
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26 सितंबर को बच्चे को दिया जन्म लेकिन उसके बाद भी नहीं देख पाई
37 वर्षीय सैका परवीन ने 26 सितंबर को एक आपातकालीन सिजेरियन शी सेक्शन से अपने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन सैका परवीन अपने नवजात बच्चे को कभी देख नहीं पाई...क्योंकि मौत के पहले तक वह यानी 1 नवंबर तक वह वेंटिलेटर पर थीं।
इस घटना के बाद सैका परवीन का पूरा परिवार टूट गया है। महिला के परिवार ने अब गर्भवती महिलाओं से कोरोना वैक्सीन लेने की अपील की है। कोरोना वायरस के टीकों ने इंग्लैंड में 100,000 से अधिक लोगों की जान बचाई है, और लोगों को गंभीर रूप से बीमार होने से बचाने में भी मदद की है।

मृतक महिला के परिवार ने कहा- प्रग्नेंट महिलाएं जरूर लगवाएं वैक्सीन
सैका के भाई कयूम मुगल ने द संडे पीपल (वेबसाइट का नाम) को बताया, "मैं सभी लोगों से दृढ़ता अपील करता हूं कि कृपया कोरोना वायरस का टीका जरूर लगवाएं। नहीं तो आप भी किसी ऐसी परिस्थिति का सामना करेंगे, जिसका हम कर रहे हैं। टीका लगवाएं और इस तरह की त्रासदी से बचें। हमारा परिवार तो पूरी तरह से टूट गया है।'

गर्भवती महिला ने कोरोना टीका लेने से किया था मना
37 वर्षीय सैका परवीन पहले से 4 बच्चे की मां थीं। सैका परवीन की पांचवे बच्चे के साथ प्रग्नेंसी के दौरान हालात कुछ ठीक नहीं थी। वो पहले से ही हल्का बीमार रहती थीं। गर्मियों में जब उनको कहा गया था कि वह कोरोना वैक्सीन ले लें तो उन्होंने मना कर दिया था। सैका ने फैसला किया था कि वह अपने बच्चे के जन्म के बाद कोरोना वैक्सीन लेंगगी। लेकिन इसी बीच 14 सितंबर को उसने वायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण किया और दो दिन बाद ही उसे सांस लेने में समस्या होने लगी। सैका को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया और छह दिन बाद असप्ताल से उसे छुट्टी दे दी गई और उसके तुरंत बाद दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

महिला ने कहा था- हालत बिगड़ी तो ऑपरेशन कर देना
37 वर्षीय सैका परवीन के भाई के मुताबिक 25 सितंबर तक सैका परवीन ने डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए थे। जिसमें कहा गया था कि अगर उसकी हालत बिगड़ती है तो वह अपने बच्चे को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन करेगी।
भाई ने आगे कहा, "अगली सुबह सैका परवीन के पति (40 वर्षीय माजिद गफूर) ने हमें फोन किया और हमें बताया कि वह वेंटिलेटर पर है और वे ऑपरेशन करने की तैयारी कर रहे हैं। दोपहर 2 बजे, डॉक्टर ने उसके पति को फोन किया और बताया कि उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया है। लेकिन मेरी बहन ने अपनी बेटी को कभी नहीं देखा।"












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