रूस से 'जंग' के हालात के बीच यूक्रेन का यू-टर्न, राष्ट्रपति ने कहा, 'युद्ध की दहशत फैला रहा है अमेरिका'
एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति ने युद्ध की संभावनाओं से इनकार किया है और उल्टा अमेरिका पर ही जंग का माहौल बनाने का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ रूस की तरफ से भी कहा गया है कि, मॉस्को युद्ध करना नहीं चाहता है।
कीव, जनवरी 29: रूस के साथ 'जंग' जैसे हालात के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को ही युद्धा का हो-हल्ला मचाने को लेकर लताड़ लगा दी है और राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि, अमेरिका और पश्चिमी देश युद्ध को लेकर हल्ला मचा रहे हैं और डर का माहौल बना रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आरोप लगाया है कि, अमेरिका और पश्चिमी देशों के हो-हल्ला की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

अमेरिका पर बरसे यूक्रेन के राष्ट्रपति
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका की आलोचना की है, कि बार बार युद्ध का हल्ला करने से और युद्ध का माहौल बनाने से देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि, "मैं अब स्थिति को पहले से अधिक तनावपूर्ण नहीं मानता। विदेशों में यह भावना है कि यहां युद्ध है। ऐसा नहीं है।" यानि, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने युद्ध की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है, जबकि अमेरिका और नाटो देश बार बार कह रहे हैं, कि रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने एक दिन पहले भी कहा है कि, फरवरी महीने में रूस यूक्रेन पर पूरी ताकत के साथ हमला करने वाला है।

रूसी राष्ट्रपति ने भी अमेरिका को घेरा
एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति ने युद्ध की संभावनाओं से इनकार किया है और उल्टा अमेरिका पर ही जंग का माहौल बनाने का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ रूस की तरफ से भी कहा गया है कि, मॉस्को युद्ध करना नहीं चाहता है। रूस के विदेश मंत्री सर्गियो लावरोव ने कहा है कि, मॉस्को यूक्रेन से युद्ध करना नहीं चाहता है, लेकिन वो अमेरिका और नाटो को रूस के हितों को रौंदने नहीं देगा। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा है कि, अमेरिका या किसी भी पश्चिमी देश को रूस के सुरक्षा हितों से खिलवाड़ नहीं करने देंगे और रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका और नाटो पर रूसी हितों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा है कि, रूस काफी करीबी से पश्चिमी देशों की प्रतिक्रियाओं का 'अध्ययन' कर रहा है और उसे देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर कोई फैसला किया जाएगा। ऐसे में सवाल ये उठता है, कि क्या वास्तव में अमेरिका और नाटो देश 'युद्ध का माहौल' बना रहा है और अपने हितों को साधने में लगा हुआ है।

'अमेरिका फैला रहा है दहशत'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति ने साफ तौर कहा कि, हालात अभी इतने खराब नहीं हुए हैं। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने मदद के लिए अमेरिका को धन्यवाद भी दिया है, लेकिन लगे हाथ उन्होंने ये भी कह दिया, कि 'यूक्रेन में क्या स्थिति है, उसकी मैं ज्यादा जानकारी रखता हूं'। यूक्रेन के राष्ट्रपति का सीधा इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की तरफ था, जो बार बार काफी गंभीर स्थिति होने की बात कर रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जहां बाइडेन पर 'दहशत' फैलाने का आरोप लगा दिया, वहीं, अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा है कि, जब रूस यूक्रेन पर हमला करेगा, तो स्थिति काफी ज्यादा भयानक होगी और मानवता के लिए विनाशकारी स्थिति होगी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि, अमेरिका और यूक्रेन क्या युद्ध को लेकर अलग अलग बातें कर रहे हैं?

यूक्रेन पर कब्जा करने की बात का खंडन
हालांकि, रूस के राष्ट्रपति ने अमेरिका के इस दावे की पुष्टि की है, कि रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक विनाशकारी हथियारों, तोप और टैंकों के साथ यूक्रेन की सीमा पर डटे हुए हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि, 'यह सब सिर्फ यूक्रेन को डराने के लिए है'। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इन दावों का भी खंडन किया है, जिनमें कहा गया है कि, रूस यूक्रेन पर कब्जा करने की कोशिश में है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि, 'यूक्रेन पिछले कई सालों से रूसी आक्रमण के खतरे में जी रहा है और रूस समय समय पर ऐसा करता रहता है और वर्तमान में भी सीमा पर रूसी सैनिकों की तैनाती उसी चक्र का एक हिस्सा है'।

अमेरिका से यूक्रेन में नाराजगी क्यों?
दरअसल, यूक्रेन के राष्ट्रपति की नाराजगी अमेरिका के उस कदम से भी है, जिसमें अमेरिका ने अपने राजनयिकों और उनके परिवार को फौरन यूक्रेन से निकल जाने के लिए कहा है, जिससे यूक्रेन के नेता नाराज हैं और उनका कहना है कि, 'राजदूत देश के कप्तान के तौर पर दूसरे देश में होते हैं और अगर जहाज डूब भी रहा है, तो उन्हें सबसे आखिरी में निकलना चाहिए, ना कि सबसे पहले भाग जाना चाहिए'। इसके साथ ही रूसी नेताओं ने साफ तौर पर कहा है कि, यूक्रेन कोई टाइटेनिक जहाज नहीं है, जो समुद्र में डूबने वाला है। दूसरी तरफ अमेरिका ने किसी भी आपात स्थिति के लिए करीब साढ़े आठ हजार सैनिकों को स्टैंड-बाय पर रखा है और शुक्रवार को अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि, रूस के पास यूक्रेन पर हमला करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को अपनी रक्षा करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें अधिक हथियार उपलब्ध कराना भी शामिल है।"

फ्रांस-रूसी राष्ट्रपति की बातचीत
इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच काफी लंबी बातचीत यूक्रेन को लेकर हुई है। जिसमें बोलते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है और खास तौर पर रूस की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति की तरफ से साफ कहा गया है कि, वो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को रूस की सीमा के पास सैन्य अड्डा नहीं बनाने देंगे और अगर अमेरिका यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाकर रूस की नाक के नीचे आने की कोशिश में है, तो रूस उसे ऐसा नहीं करने देगा। फ्रांस के राष्ट्रपति भी इन दिनों अमेरिका से काफी नाराज चल रहे हैं, क्योंकि, अमेरिका की वजह से ही ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ डीजल पनडुब्बी का करार रद्द कर दिया, लिहाजा यूक्रेन संकट को फ्रांस दूर से ही देख रहा है और पुतिन से बातचीत में भी फ्रांस ने कुछ खास नहीं कहा है।

यूक्रेन विवाद में रूस क्या चाहता है?
रूस क्या चाहता है, इससे महत्वपूर्ण सवाल ये है, कि रूस क्या नहीं चाहता है। रूस यूक्रेन को नाटो में शामिल होने देना नहीं चाहता है और पिछले दिसंबर में जब अमेरिका और रूस के बीच बातचीत की गई थी, तो रूस ने साफ तौर पर कहा था, कि रूस की सीमा के पास वो किसी भी नाटो युद्धाभ्यास के खिलाफ है। जिसका अभी भी नाटो की तरफ से जवाब नहीं दिया गया है। लेकिन, जब रूस की तरफ से कई बार अल्टीमेटम जारी किए गये, तो नाटो की तरफ से सैन्य अभ्यास बंद करने से मना कर दिया गया। इसके साथ ही रूस चाहता है, कि पूर्वी यूरोप से भी नाटो गठबंधन की सेना पीछे हटे, लेकिन नाटो ने ऐसा करने से भी इनकार कर दिया है। इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका से कहा था, कि 'रूस को इस बात की गारंटी चाहिए, कि नाटो की सेना पूर्वी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ेगी और जिन हथियारों को नाटो लेकर आई है, उसे पूर्वी यूरोप से बाहर लिया जाए'। रूसी राष्ट्रपति ने साफ कहा था, कि रूसी सीमा पर आकर किसी भी सेना को उसे धमकाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। रूसी राष्ट्रपति ने साफ तौर पर कहा कि, उन्हें सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि कानूनी गारंटी भी चाहिए।












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