यूक्रेन में पहली बार MIRV का इस्तेमाल कर रूस ने फैलाई सनसनी, भारत भी कर चुका है टेस्ट, क्यों चौंकी दुनिया?
Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में पहली बार MIRV का इस्तेमाल, गैर-परमाणु मिसाइल ने क्यों दुनिया को चौंकाया? भारत भी कर चुका है टेस्ट
Ukraine War MIRV Missile: यूक्रेन में चल रहे युद्ध में रूस ने 21 नवंबर को एक यूक्रेनी शहर में पहली बार मल्टीपल इंडिपेंडेंट री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) का इस्तेमाल करके एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की। यह युद्ध में MIRV का पहला इस्तेमाल है और इसने दुनिया भर में सनसनी फैला दी है।

यूक्रेनी वायु सेना ने 21 नवंबर को दावा किया, कि रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के एक शहर द्निप्रो पर एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) दागी है। हालांकि, इसके फौरन बाद, कई विरोधी दावे भी सामने आ गए, जिसमें कुछ पश्चिमी अधिकारियों ने मीडिया को बताया, कि यह एक इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) थी।
अंत में, सभी अटकलों को विराम देते हुए, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मीडिया के सामने खुलासा किया, कि हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइल एक बिल्कुल नया हथियार थी और ये एक मध्यम दूरी की "हाइपरसोनिक" मिसाइल, 'ओरेशनिक' थी।
इस हमले के फौरन बाद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कई दावे किए और मिसाइल हमले पर अपनी हैरानी और चिंता जतानी शुरू कर दी। हालांकि, सभी दावों में एक बात समान थी, कि बैलिस्टिक मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंट री-एंट्री व्हीकल्स (MIRV) थे।
ये दावे सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो पर आधारित थे, जिसमें मिसाइल को छह वारहेड्स में टूटते हुए दिखाया गया था।
मिसाइल से ज्यादा, MIRV के इस्तेमाल ने मिलिट्री ऑब्जर्वर्स और परमाणु एक्सपर्ट्स को परेशान कर दिया है।
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स में परमाणु सूचना परियोजना के निदेशक हैंस क्रिस्टेंसन ने कहा, "मेरी जानकारी के अनुसार, हां, यह पहली बार है जब MIRV का इस्तेमाल युद्ध में किया गया है।"
हमले के बाद, मिलिट्री ऑब्जर्वर्स ने अनुमान लगाया है, कि मॉस्को द्वारा MIRV के साथ इस नई मिसाइल की तैनाती एक चेतावनी की तरह है।
हालांकि, भारतीय सैन्य विश्लेषक और रिटायर्ड भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट ने इसे बिना किसी भड़काऊ युद्ध के जवाबी कार्रवाई बताया!
MIRV इतना खतरनाक क्यों है?
MIRV करीब करीब हमेशा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़ी होती है, लेकिन जरूरी नहीं है, कि यह उन्हीं तक सीमित हो, जो थर्मोन्यूक्लियर हथियार ले जाती हैं, यही वजह है कि शुरुआती रिपोर्टों में हमले में ICBM हमला माना गया था। भले ही यूक्रेनी शहर द्निप्रो पर दागे गए वारहेड परमाणु नहीं थे, लेकिन उन्हें मार गिराना कीव के लिए संभव नहीं था, भले ही उसने पहले कई हाइपरसोनिक किंजल मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया हो।
आम तौर पर, सिंगल-वॉरहेड मिसाइलों के साथ, अलग अलग लक्ष्य पर हमला करने के लिए अलग अलग मिसाइलें लॉन्च की जाती है। लेकिन, मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) एक प्रकार का एक्सोएटमॉस्फेरिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसमें कई वॉरहेड होते हैं, यानि एक MIRV से एक साथ कई मिसाइलें अलग अलग टारगेट के लिए लॉन्च की जाती हैं।
MIRV को एक ही वजह से नफरत किया जाता है या पसंद किया जाता है, और वो ये, कि वे अच्छी तरह से सुरक्षित हवाई क्षेत्रों में घुस सकते हैं और विरोधियों की एयर डिफेंस सिस्टम को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है।
MIRV मिलिट्री और आर्थिक नजरिए से एयर डिफेंस सिस्टम की प्रभावशीलता को कम कर देते हैं क्योंकि MIRV के खिलाफ डिफेंस बनाए रखना बहुत महंगा होगा, हर आक्रामक के लिए कई रक्षात्मक मिसाइलों की जरूरत होती है।
इसके अलावा, हमला करने वाली सेना असली वॉरहेड के साथ कुछ नकली री-एंट्री वाहनों का उपयोग कर सकती है। इससे असली वॉरहेड के अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोके जाने की संभावना काफी कम हो जाती है, क्योंकि एयर डिफेंस सिस्टम, असली और नकली मिसाइल के बीच फर्क नहीं कर पाती हैं।
MIRV एक अत्यंत जटिल टेक्नोलॉजी है, जिसके लिए बड़ी मिसाइलों, छोटे वारहेड्स, सटीक नेविगेशन और उड़ान के दौरान वारहेड्स को क्रमिक रूप से दागने वाले तंत्र की जरूरत होती है और ये सभी अत्यधिक विकसित टेक्नोलॉजी हैं।
MIRV दुश्मन खेमे में कैसे मचाता है तबाही?
यदि ICBM या IRBM बैलिस्टिक मिसाइल परमाणु पेलोड से लैस है, तो MIRV का उपयोग अत्यधिक खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक के उपयोग की निंदा की है, जो ऐसे समय में कई वारहेड्स को डिस्चार्ज करने में सक्षम बनाती है, जब दुनिया भर के देश परमाणु अप्रसार के लिए एकजुट हो रहे हैं और अपने परमाणु हथियारों के आकार को कम कर रहे हैं।
ऐसा माना जाता है कि यदि परमाणु हमले के बाद भी कम संख्या में मिसाइलें बच जाती हैं, तो दुश्मन के पास अभी भी अपने शस्त्रागार में हमलावर के कई प्रमुख शहरों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त मारक क्षमता होगी, जिससे यह गारंटी होगी, कि कोई भी पक्ष परमाणु हमलों के नतीजों से बच नहीं सकता है। इस विचार का मकसद पहले हमले को रोकना था। हालांकि, MIRV उस विचार को काउंटर करने वाले हथियार के रूप में कार्य करता है।
भारत ने मार्च में किया था MIRV का टेस्ट
जब भारत ने इस साल मार्च महीने में MIRV टेस्ट किया था, तो डिफेंस एक्सपर्ट क्रिस्टेंसन ने निराशा जताते हुए कहा था, कि "स्टार्ट II एमआईआरवी प्रतिबंध से पीछे हटने का अमेरिका/रूस का फैसला कम बुद्धिमानी भरा लग रहा है, क्योंकि ज्यादा देश एमआईआरवी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।"
भारत के MIRV टेस्ट ने चीन और पाकिस्तान को भी परेशान कर दिया था और कई पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट ने कहा था, कि इसके जरिए भारत, एक हमले में पाकिस्तान के कई शहरों को निशाना बना सकता है और पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम उन हमलों को रोक नहीं पाएगा।

चुनिंदा देशों के पास ही है MIRV
संयुक्त राज्य अमेरिका इस टेक्नोलॉजी को विकसित करने वाला पहला देश था, जिसने 1970 में एक MIRVed अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल और उसके अगले वर्ष एक MIRVed पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) तैनात की।
वहीं, सोवियत संघ ने भी अपनी MIRV तकनीक विकसित की थी। यूके, फ्रांस, चीन और भारत जैसे परमाणु हथियार रखने वाले अन्य देशों ने भी MIRV टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया है। पाकिस्तान ने भी दावा किया है, कि उसकी अबाबील सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) MIRVs को ले जाने में सक्षम है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इस्लामाबाद के दावों पर शक जताया है। उत्तर कोरिया ने भी MIRV के सफल परीक्षण का दावा किया है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका को फिलहास उसके दावों पर यकीन नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications