रूस-यूक्रेन में नहीं हो पाया शांति समझौता, विदेश मंत्रियों की बैठक रही बेनतीजा, और तेज होगी लड़ाई

रूस के विदेश मंत्री सर्गीय लावरोव ने पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को खतरनाक हथियारों की आपूर्ति करने और यूक्रेन पर खतरनाक व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

अंकारा/कीव/मॉस्को, मार्च 10: यूक्रेन युद्ध को लेकर तुर्की और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता फेल हो गई है और दोनों देशों के विदेश मत्रियों की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। यूक्रेन और रूस के बीच एक दिन के लिए युद्धविराम को लेकर भी सहमति नहीं बन पाई और अब आशंका है कि, रूस अब इस लड़ाई को और भी ज्यादा तेज कर सकता है। पिछले दो दिनों से रूस ने हमले की तीव्रता को कम कर दिया था, लेकिन अब रूसी विदेश मंत्री ने जो संकेत दिए हैं, उससे लग रहा है, कि यूक्रेन में युद्ध काफी तेज हो सकता है।

बातचीत पर क्या बोला यूक्रेन?

बातचीत पर क्या बोला यूक्रेन?

यूक्रेन के विदेश मंत्री कुलेबा ने अपने रूसी समकक्ष सर्गीय लावरोव से मुलाकात और बैठक के बाद कहा कि, उन्होंने रूसी विदेश मंत्री लावरोव के साथ बातचीत के दौरान 24 घंटे के युद्धविराम की संभावना को उठाया था, लेकिन दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी। उन्होंने कहा कि, ''ऐसा लगता है कि रूस में इस मामले के लिए फैसला लेने वाले कोई और हैं"। रूसी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद यूक्रेनियन विदेश मंत्री कुलेबा ने कहा कि, यूक्रेन में "सबसे महत्वपूर्ण मानवीय मुद्दों को हल करने" के लिए संघर्ष विराम आवश्यक था।

पश्चिमी देशों पर आक्रामक रूस

पश्चिमी देशों पर आक्रामक रूस

वहीं, मुलाकात के बाद रूस के विदेश मंत्री सर्गीय लावरोव ने पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को खतरनाक हथियारों की आपूर्ति करने और यूक्रेन पर खतरनाक व्यवहार करने का आरोप लगाया है। रूसी विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा है कि, पश्चिमी देश जो कदम उठा रहे हैं, उनसे आने वाले सालों में क्षेत्रीय सुरक्षा बुरी तरह से प्रभावित होगी। यूक्रेन के विदेश मंत्री कुलेबा के साथ अपनी बातचीत के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, रूस के विदेश मंत्री ने यह भी कहा, कि मास्को का आक्रामक, जिसे उन्होंने "विशेष सैन्य अभियान" के रूप में वर्णित किया, योजना के अनुसार चल रहा था।

गैस स्टेशनों पर बड़ा खतरा

गैस स्टेशनों पर बड़ा खतरा

वहीं, यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि, कुछ गैस कंप्रेसर स्टेशनों पर रूसी सैनिकों के आने के बाद यूरोपीय देशों को होने वाली गैस की सप्लाई पर कभी भी रोकी जा सकती है। यूक्रेन के गैस पाइपलाइन ऑपरेटर ने गुरुवार को चेतावनी दी है, हालांकि, अभी तक प्रवाह पर तत्काल प्रभाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं। ट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर डेटा के अनुसार, वेल्के कापुसानी बॉर्डर प्वाइंट के पास यूक्रेन से स्लोवाकिया में गैस की आपूर्ति भी खबर लिखे जाने तक सामान्य तरीके से ही चल रही थी, लेकिन अब धीरे धीरे ये क्षेत्र रूस के कब्जे में आ सकता है और फिर गैस सप्लाई ठप की जा सकती है, जिससे यूरोपीय देशों में हाहाकार मच सकता है।

यूक्रेनी गैस पर निर्भर यूरोप

यूक्रेनी गैस पर निर्भर यूरोप

यूरोप के कई देश रूस से सप्लाई होने वाली गैस, जो यूक्रेन के रास्ते यूरोपीय देश तक जाते हैं, अगर उसे रोक दिया जाता है, तो यूरोपीय देश कुछ ही घंटों में घुटने पर आ सकते हैं और रूस इस बात को काफी अच्छे से जानता है। वहीं, 2021 में लगभग 41.6 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) रूसी गैस को यूक्रेन के माध्यम से यूरोप तक पहुंचाया गया था। जिसकी वजह से यह एक प्रमुख आपूर्ति मार्ग बन गया है, हालांकि, एक साल पहले तक इस गैस पाइप लाइन से गैस की आपूर्ति 25 प्रतिशत तक कम हो रही थी।

कई कंप्रेसर स्टेशनों पर रूस का कब्जा

कई कंप्रेसर स्टेशनों पर रूस का कब्जा

यूक्रेन की गैस पाइपलाइनों (ओजीटीएसयू) के ऑपरेटन ने कहा है कि, रूसी सेना ने कई गैस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है, जिससे यूरोप को होने वाली गैस की सप्लाई बाधित की जा सकती है। हालांकि, अभी तक ये नहीं बताया गया है, कि कितने गैस स्टेशन प्रभावित हुए हैं। वहीं, "ओजीटीएसयू की मांग है, कि सैन्य और सशस्त्र समूह तुरंत कंप्रेसर स्टेशनों के क्षेत्र को छोड़ दें और जीटीएस (गैस ट्रांसमिशन सिस्टम) के संचालन को प्रभावित करने की कोशिश करना बंद कर दें।"

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