यूक्रेन और इजराइल युद्ध से गंभीर सबक... क्या भारत ईरान जैसे हमलों से अपनी रक्षा कर सकता है? जानिए कमियां

Ukraine & Israel Wars Lesson for India: यूक्रेन के खिलाफ रूस का सैन्य अभियान हो, या इजराइल का हमास के खिलाफ ऑपरेशन या फिर ईरान का इजराइल पर एक साथ 300 मिसाइलों और ड्रोन से हमला.. इन तीन युद्धों में भारत के लिए गंभीर सबक छिपे हुए हैं, क्योंकि भारत के दोनों दुश्मन, चीन और पाकिस्तान, लगातार युद्ध की तैयारियां कर रहे हैं।

यूक्रेन के खिलाफ रूस ने जब सैन्य अभियान शुरू कया था, उस वक्त रूसी वायुसेना के पास करीब 1250 चौथी या 4.5 फिफ्थ जेनरेशन के फाइटर जेट्स थे। जबकि, यूक्रेन के पास करीब 100 लड़ाकू विमान ही थे, यानि रूस के सामने यूक्रेन कहीं नहीं ठहरता था।

how india defend Iran-Like Attacks

चाहे रणनीतिक बमवर्षक लड़ाकू विमान हों या परिवहन विमान, या फिर फाइटर जेट्स में हवा में ही ईंधन भरने वाले लड़ाकू विमान (FRA) ही क्यों ना हो, यूक्रेन के मुकाबले रूस के पास काफी ज्यादा ताकत थी। और रूस का युद्ध जीतना तय था, लेकिन सवा दो सालों से ये युद्ध चल रहा है। क्योंकि, यूक्रेन को जल्दी ही एहसास हो गया, कि उसे अपनी रक्षा के लिए नवीन साधनों का उपयोग करना होगा।

यूक्रेन ने रूस कैसे रोक रखा है?

भले ही यूक्रेन खुद बर्बाद हो चुका है, लेकिन उसने अभी तक घुटने नहीं टेके हैं और रूसी जमीनी बढ़त को रोकने के लिए उसने पश्चिमी देशों से मिले एंटी-टैंक मिसाइलें और ड्रोन का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। इन सबसे भी बढ़कर यूक्रेन का एयर डिफेंस था, जिसने रूस की नाक में दम कर दिए। रूस को रोकने के लिए यूक्रेन ने एक ऐसा वातावरण बनाया, जिसे अब "एयर डिनायल" कहा जाता है।

रूस को रोकने के लिए यूक्रेन ने इंटेलिजेंस, सर्वलांस, टोही (आईएसआर) हथियारों के साथ साथ, सिक्योर कम्युनिकेश, डायरेक्ट अटैक वीपन्स का इस्तेमाल किया और यूक्रेन ने दिखा दिया, कि एक छोटी वायुसेना के साथ एक महाशक्ति को झुकाया जा सकता है।

इसके अलावा, रूसी एयरोस्पेस फोर्स (VKS) के पास 3,000 से ज्यादा विमाने हैं, जिनमें से लगभग 1,200 लड़ाकू विमान हैं। 60 Tu-22M3 बैकफ़ायर बमवर्षक विमान और Tu-95MS Bear विमान शामिल हैं। 13 टीयू-160 ब्लैकजैक, 86 मिग-29 फुलक्रम, 88 मिग-31बीएम (मल्टी-रोल), 24 मिग-31K (किन्झाल स्ट्राइक के लिए), 101 Su-27 फ्लेंकर, 100 Su-30 वेरिएंट, 34 Su-34, 111 Su-35s, 68 एसयू-24एम/एम2 फेंसर, 165 एसयू-25 फ्रॉगफुट और 14 एसयू-57 फेलॉन शामिल हैं।

लेकिन, रूसी एयरफोर्स ने काफी खराब प्रदर्शन किया और रूसी एयरफोर्स, हवाई श्रेष्ठता बनाने में नाकामयाब रही। रूसी एयरफोर्स ना तो यूक्रेन की जमीनी सेना को रोकने में कामयाब हो पाई और ना ही रूसी पैदल सैनिकों के लिए ही आगे का रास्ता बना पाई। पश्चिमी देशों के एयर डिफेंस ने रूसी एयरफोर्स को बुरी तरह से फेल कर दिया।

डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूसी एयफोर्स के फेल होने के पीछे रूस के पास ISR, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और जैमिंग विमानों की कमी होना सबसे बड़ी वजह है। रूस को यह समझना चाहिए था, कि SEAD (वायु रक्षा का दमन) आधे-अधूरे मन से नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, रूसी नेतृत्व ने बार बार एयरफोर्स के अधिकारियों का ट्रांसफर किया, उनके नेतृत्व को बदला, जिससे सैनिकों का मनोबल गिरा और सबसे बड़ी बात, कि रूस ने सपने में भी नहीं सोचा था, कि ये युद्ध इतना लंबा चलने वाला है।

लिहाजा, अब रूस को उपकरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेश जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ईरान, मास्को को यूएवी और सीधे हमले के हथियार मुहैया करा रहा है। उत्तर कोरिया ने 1,000 कंटेनर तक उपकरण और युद्ध सामग्री की आपूर्ति की है। लिहाजा, रूसी एयरफोर्स की नाकामी से भारत काफी कुछ सीख सकता है।

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यूक्रेन ने एयर डिफेंस को मजबूत किया

2023 में युद्ध के दौरान यूक्रेन ने रूस के काला सागर बेड़े को बैकफुट पर रखा। यूक्रेन ने रूस के अंदर भी कई प्रमुख लक्ष्यों पर हमला किया और रूसी वायु सेना के संचालन को एक स्टैंड-ऑफ भूमिका तक सीमित कर दिया।

यूक्रेन को सोवियत संघ से विमानों की एक महत्वपूर्ण सूची विरासत में मिली है। फ़्लाइट ग्लोबल के अनुसार, 2021 में 43 मिग-29, 12 Su-24s, 17 Su-25s और 26 Su-27 यूक्रेनी वायुसेना में सक्रिय सेवा में थे।

2022 के रूसी आक्रमण के बाद से, यूक्रेन ने लगभग 75 विमान खो दिए हैं, जिनमें 50 लड़ाकू विमान शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर जमीन पर थे। यूक्रेन में सोवियत/रूसी AD प्रणालियाँ भी थीं जैसे S-300 (SA-11), बुक (SA-10), S-125 नेवा/पिकोरा, और ऑटोमेटिक 2K12 Kub और मध्यम दूरी के SAMs। उनके पास स्ट्रेला और इग्ला इन्फ्रारेड होमिंग मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) भी हैं।

इसके अलावा, पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को भारी संख्या में एयर डिफेंस सिस्टम और जमीन से फाइटर जेट्स को मार गिराने वाले हथियार सौंपे। इसके अलावा, डेनमार्क, यूक्रेन को F-16 विमान देने वाला है।

इजराइल में चल रहे संघर्षों से सबक

इजराइल, हमास और हूतियों के साथ साथ ईरान के खिलाफ भी युद्ध लड़ रहा है, दोनों के पास कोई वायु सेना नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण ड्रोन और SSM (सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें) हैं।

हमास ने इजराइल के खिलाफ "मोटर ग्लाइडर" का काफी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा, रॉकेट के बैराज का इस्तेमाल भी किया है, जिसे बहुत हद तक इदराइल ने रोका, फिर भी कई रॉकेट इजराइल में गिरे। इसके अवाला, उन एयर डिफेंस में इजराइल को भारी भरकम खर्च आया है, फिर भी इस युद्ध ने एक मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत को सामने लाया है।

इसके अलावा, ईरानी हमले की पहले से ही अनुमान लगा ली गई थी और संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे पश्चिमी और स्थानीय अरब सहयोगियों ने इजराइल को पर्याप्त खुफिया और रडार चेतावनी दी थी।

लिहाजा, इजराइल तैयार था और उसे इस क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका और कई पश्चिमी वायु सेनाओं का सक्रिय सैन्य समर्थन प्राप्त था। ईरान ने इजराइल पर 185 ड्रोन, 110 बैलिस्टिक मिसाइल और 30 क्रूज़ मिसाइल सहित लगभग 325 प्रोजेक्टाइल दागे थे। लेकिन इजराइल और उसके सहयोगियों का दावा है, कि उन्होंने 99% को बेअसर कर दिया है।

क्या भारत ऐसे हमलों को रोकने में सक्षम है?

बैलिस्टिक मिसाइलें काफी ऊंचाई वाले प्रोजेक्टाइल से आती हैं और रडार उनका पता लगा सकती है। जबकि, ड्रोन धीमी गति से चलने वाली क्रूज मिसाइल की तरह बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे उनका पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। जब तक ड्रोन असुविधाजनक रूप से करीब नहीं आ जातेस तब तक ड्रोन को रोकना मुश्किल होता है।

भारत के पास स्वोर्डफ़िश राडार का काफी अच्छा कवरेज है, जो बैलिस्टिक मिसाइल की प्रारंभिक चेतावनी के लिए इजरायली ग्रीनपाइन राडार पर आधारित है। ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों का पता लगाने के लिए रडार, आईआर और ध्वनिक सेंसर अभी भी विकसित हो रहे हैं।

एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C) इन ड्रोनों का पता लगा सकते हैं, लेकिन भारतीय वायु सेना (IAF) की सूची में इन संपत्तियों की सीमित संख्या एक चिंता का विषय है। भारत के एयर डिफेंस रडार अच्छी तरह से नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, और इंडियन एयरफोर्स के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के माध्यम से एक व्यापक हवाई सुरक्षा नेटवर्क तैयार करते हैं।

इसके अलावा, दुश्मनों के हवाई जहाजों और ड्रोनों को मार गिराने के लिए भारत को एक मजबूत एयर डिफेंस हथियारों की जरूरत है। हालांकि, भारत के पास बोफोर्स 40 मिमी (एल-70) और JU-23-2 शिल्का तोपें जैसी वायुरोधी तोपें (एएए) हैं, इसके अलावा IGLA-S जैसे कंधे से दागे जाने वाले MANPADS, 30 किमी की रेंज वाली स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली, स्पाइडर पायथन-5 (20 किमी), और डर्बी (50 किमी), भारत-इजरायल मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) मिसाइलें (70 किमी), और एलआर-एसएएम (100 किमी) हैं।

इसके अलावा, भारत का नया आकाश मिसाइल 80 किमी तक की दूरी तय कर सकते हैं। 30 किमी की रेंज वाला क्यूआर-एसएएम की अभी टेस्टिंक चल रही है। भारतीय सेना के पास बड़ी संख्या में रूसी 9K33 ओसा, 2K22 तुंगुस्का और पिकोरा मिसाइल सिस्टम भी हैं। अभी हाल ही में, भारत ने S-400 सिस्टम हासिल किया है जो एयर डिफेंस बबल को 400 किमी तक और 30 किमी की ऊंचाई तक कवर करता है।

ये महंगे एयर डिफेंस हैं और लड़ाकू विमानों और AEW&C श्रेणी हमलों को रोकने के लिए हैं। सीमित संख्या उन्हें लगभग 10,000 डॉलर की लागत वाले ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देती है।

इजराइल जैसे छोटे देश में आयरन डोम सिस्टम की लगभग 10 बैटरियां हैं, जो छोटे, तेज़ गति वाले खतरों से निपटने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। प्रत्येक बैटरी की लागत 50 मिलियन डॉलर है, और प्रत्येक इंटरसेप्ट की लागत 150,000 डॉलर के करीब है।

लिहाजा, भारत को कई और एयर डिफेंस प्रणालियों और ज्यादा से ज्यादा मिसाइलों के निर्माण की क्षमता के साथ-साथ बढ़ती उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी जरूरत है। लेकिन एक बेहतर विकल्प एडवांस गाइडेड एनर्जी वीपन (DEW) विकसित करना है।

"आयरन बीम" एक इजरायली DEW (लेजर हथियार) है। DEW अभी भी विकसित हो रहा है, और इसमें वायुमंडलीय स्थितियों और लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने की क्षमता है। जबकि, इसकी ऑपरेटिंग लागत काफी कम है।

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इन युद्धों से भारत क्या सीख सकता है?

हाल के संघर्षों से भारतीय वायु शक्ति को क्या सीखने की जरूरत है? भारत को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी लड़ाकू विमानों से लड़ना होगा, क्योंकि रूस के सामने यूक्रेन कमजोर है, और इजराइल के सामने हमास और ईरान। मगर, भारत के दोनों दुश्मन काफी मजबूत हैं। उनके पास भी एडवांस फाइटर जेट्स, ए़डवांस सेंसर और एयर डिफेंस नेटवर्क है और इनके अलावा, साइबरस्पेस का खतरा अलग से है।

लिहाजा, भविष्य के हवाई युद्धों के लिए पेनेट्रेटिंग काउंटर एयर (पीसीए) क्षमता की आवश्यकता होगी, जो फुर्तीले इंटेलिजेंट प्लेटफार्मों को हरा सके। हाइपरसोनिक हथियारों, क्रूज मिसाइलों और सोफिस्टिकेटेड पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस बनाने की जरूरत होगी।

चीनी एयरफोर्स के पास पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स आ चुके हैं, लिहाजा भारत को कई और लड़ाकू स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इसके अलावा अंतरिक्ष-आधारित ISR परिसंपत्तियों, AEW&C और FRA की आवश्यकता होगी।

संभावित लंबे युद्ध के लिए क्रूज़ मिसाइलों और युद्ध सामग्री का भंडारण बढ़ाना होगा। बड़े ड्रोन भंडार की आवश्यकता होगी। सप्लाई चेन बनाए रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि एयर डिफेंस सिस्टम की संख्या बढ़ानी होगी। स्वदेशी कार्यक्रमों और उत्पादन में तेजी लाने और भविष्य के लिए औद्योगिक क्षमता और निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

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