ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट में एक्स जेंडर की अपील खारिज की

Provided by Deutsche Welle

लंदन, 16 दिसंबर। क्रिस्टी ऐलान-केन 1995 से पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन वह नहीं चाहते कि उनके पासपोस्ट पर एम (मेल) या एफ (फीमेल) लिखा जाए. वह चाहते हैं कि उन्हें एक्स लिखा पासपोर्ट जारी हो. अक्टूबर में जब अमेरिका ने एक्स लिंग वाला पासपोर्ट जारी किया तो क्रिस्टी को लगा कि उनका सपना पूरा होने वाला है.

लेकिन ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने क्रिस्टी की सारी उम्मीदें तोड़ दी हैं. यूके के सुप्रीम कोर्ट ने एक्स लिंग वाला पासपोर्ट खारिज कर दिया है. युनाइटेड किंग्डम के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था नर-मादा विभाजन के आधार पर बनी है और एक्स लिंग वाला पासपोर्ट इस व्यवस्था को कमजोर करेगा.

आहत हैं कार्यकर्ता

इस पासपोर्ट के पक्ष में अभियान चला रहे लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमानवीकरण और अपमानजनक बताया है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अब उन देशों से जुदा हो गया है जिन्होंने बिना किसी लिंग पर आधारित पासपोर्ट जारी किए हैं.

क्रिस्टी ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) में अपील की जाएगी., ऑस्ट्रेलिया, भारत और आइसलैंड समेत 12 देश ऐसा पासपोर्ट जारी कर चुके हैं. लेकिन क्रिस्टी ने कहा कि उन्हें ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर ज्यादा हैरत नहीं हुई है. जबकि अमेरिका

मीडिया से बातचीत में क्रिस्टी ने कहा, "युनाइटेड किंग्डम में न्याय नहीं है. अगर कोई नर या मादा नहीं है तो उसे अपने दस्तावेजों पर कोई लिंग अपनाने के लिए मजबूर करना गलत है. यह अपमानजनक है. यह अमानवीकरण है."

कानून में नर-मादा का फर्क

ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष ने एकमत से लिए गए फैसले में लिखा कि सरकार का लक्ष्य देश की रक्षा करना है, खर्च घटाना है और "यह सुनिश्चित करना है कि कानून और प्रशासन के तहत लैंगिक विषय पूरी तरह वैध रहें."

फैसले में कहा गया है कि ऐसा कोई कानून ही नहीं है जिसमें अ-लिंगी लोग मान्य हों लेकिन कई कानून ऐसे हैं जहां नर या मादा के रूप में लोगों के स्पष्टतौर पर मान्यता दी गई है. अदालत ने यह भी कहा कि क्रिस्टी के साथ सीमा पर पासपोर्ट को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ है, जैसा कि एक फ्रांसीसी ट्रांसजेंडर महिला के साथ हुआ था क्योंकि वह अपने दस्तावेजों में लिंग नहीं बदल पा रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "शायद सबसे जरूरी बात यह है कि अपीलकर्ता की शारीरिक दिखावट और पासपोर्ट पर लिंग के लिए इस्तेमाल एफ मार्कर में कोई स्पष्ट फर्क नही है."

पासपोर्ट जारी करने के लिए जिम्मेदार ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने इस फैसले का स्वागत किया है. ईमेल से समाचार एजेंसी रॉयटर्स को भेजे एक जवाब में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वागतयोग्य बताया.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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