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UK Elections: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्या है, जो UK चुनाव में बना बड़ा मुद्दा, ऋषि सुनक हारे तो क्या होगा असर?

UK Elections 2024: यूनाइटेड किंगडम में गुरुवार (4 जून) को होने वाले आम चुनावों से पहले प्रचार अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस चुनाव में कंजरवेटिव और लेबर पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

ऋषि सुनक की अगुआई वाली कंजर्वेटिव पार्टी को 14 साल बाद सत्ता से बेदखल होना करीब करीब तय माना जा रहा है। 43 साल के ब्रिटिश-भारतीय नेता ऋषि सुनक, लेबर पार्टी के स्टार कैम्पेनर कीर स्टारमर (61 वर्षीय) से मुकाबला कर रहे हैंऔर माना जा रहा है, कि कीर स्टारमर अगले ब्रिटिश प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

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आगामी यूके चुनावों को लेकर मचे शोर-शराबे के बीच, एक बात जो राजनीतिक स्पेक्ट्रम के दोनों पक्षों में प्रमुख बनी हुई है, वह है भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA), जिसमें दोनों देशों के बीच के कारोबार को 38.1 अरब पाउंड तक द्विपक्षीय व्यापार साझेदारी को बढ़ाने का समझौता भी शामिल है। दोनों ही पार्टियों के लिए भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का एजेंडा सबसे ऊपर है, चाहे चुनाव का नतीजा स्टारमर की लेबर पार्टी के पक्ष में जाए या ऋषि सुनक की टोरीज पार्टी के पक्ष में जाए।

भारत और यूके के बीच एफटीए वार्ता जनवरी 2022 में शुरू हुई थी, जिसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दिवाली 2022 तक एफटीए को फाइनल करने का डेडलाइन तय किया था, और उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर काफी तेजी से बात बढ़ी, लेकिन समय सीमा से पहले ही बोरिस जॉनसन को घरेलू राजनीति की वजह से इस्तीफा देना पड़ा और उसके बाद से एफटीए लटका हुआ है।

ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली टोरी सरकार के तहत, कोई नई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई, लेकिन दोनों ही देशों की सरकार 2024 में होने वाले चुनाव से पहले इस डील पर साइन करना चाहते थे, लेकिन वो भी नहीं हो पाया।

और अब जबकि 4 जुलाई को यूके में इलेक्शन होने वाले हैं और ज्यादा संभावना ऋषि सुनक की सरकार की विदाई को लेकर है, तो सवाल ये उठते हैं, कि नई लेबर पार्टी की सरकार आने के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का क्या होगा?

भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऋषि सुनक ने संबंधित देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ मिलकर मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए कड़ी मेहनत की है। दोनों नेताओं ने पिछले साल नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत को तेज करने पर सहमति जताई थी, ताकि भारत के आम चुनाव से पहले इस पर हस्ताक्षर किए जा सकें। लेकिन, इस साल ऋषि सुनक ने अचानक यूके में लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी और दोनों देशों के बीच बातचीत रूक गई। इस बीच भारत में भी चुनावों की घोषणा हो गई।

भारत और यूके ने FTA पर 13 दौर की वार्ता की है और 14वें दौर की वार्ता इस साल जनवरी में शुरू हुआ था, जिसमें लोगों की आवाजाही और कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क में छूट सहित कुछ विवादास्पद मुद्दों पर मतभेदों को दूर करके इसे अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे थे। समझौते में 26 अध्याय हैं, जिनमें माल, सेवाएं, निवेश और बौद्धिक संपदा (intellectual property rights) अधिकार शामिल हैं।

भारतीय उद्योग यूके के बाजार में आईटी और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों से अपने प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा पहुंच की मांग कर रहा है, इसके अलावा कई वस्तुओं के लिए शून्य सीमा शुल्क पर यूके की बाजारों पहुंच की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, यूके की मांग स्कॉच व्हिस्की, इलेक्ट्रिक वाहन, भेड़ के मांस, चॉकलेट और कुछ कन्फेक्शनरी वस्तुओं जैसे सामानों पर आयात शुल्क में महत्वपूर्ण कटौती की है।

कंजर्वेटिव पार्टी के घोषणापत्र में ब्रिटिश भारतीय नेता ऋषि सुनक के नजरिए को साफ करते हुए कहा गया है, "हम भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देंगे, साथ ही टेक्नोलॉजी और डिफेंस पर गहन रणनीतिक साझेदारी भी करेंगे।"

ऋषि सुनक अगर हारे, तो क्या होगा असर?

4 जुलाई को होने वाले चुनाव में ऋषि सुनक की हार करीब करीब तय मानी जा रही है और अगर ओपिनियन पोल्स के मुताबिक ही नतीजे आते हैं, तो फिर देश में लेबर पार्टी की सरकार बनेगी, जिसका पुराना कार्यकाल भारत को लेकर बहुत अच्छा नहीं था। लेबर पार्टी ने अकसर पाकिस्तान के समर्थन में स्टैंड लिया है।

लेकिन, लेबर पार्टी ने आक्रामक तरीके से भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का समर्थन कर दिया है। लेबर पार्टी इस बात पर ध्यान दे रही है, कि वे भारत के साथ FTA को कैसे फाइनल करेंगे और लेबर पार्टी के नेताओं ने कई मौकों पर ऋषि सुनक सरकार पर अभी तक FTA नहीं होने को लेकर निशाना साधा है। लेबर पार्टी ने कहा है, कि कंजर्वेटिव पार्टी ने दिवाली 2022 की समयसीमा को पूरा नहीं किया।

लेबर पार्टी की 'छाया' विदेश सचिव डेविड लैमी ने पिछले हफ्ते लंदन में इंडिया ग्लोबल फोरम (IGF) में अपने संबोधन में कहा, कि "कई दिवाली बिना किसी व्यापार समझौते के गुजर गईं और बहुत से व्यवसाय इंतजार में रह गए।"

उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और व्यापार मंत्री गोयल को मेरा संदेश है, कि लेबर पार्टी FTA पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। हम जल्द से जल्द मुक्त व्यापार समझौता पूरा कर आगे बढ़ें।"

लेबर पार्टीत की घोषणापत्र में भारत के साथ "नई रणनीतिक साझेदारी" का भी जिक्र किया गया है, जिसमें FTA के साथ-साथ डिफेंस, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की बात कही गई है। लेबर पार्टी के नेताओं का कहना है, कि कंजर्वेटिव पार्टी 2010 से सत्ता में है, लेकिन उसने भारत के साथ संबंधों को लेकर डींगे ज्यादा हाकी है, लेकिन काम कम किया है।

यूके के 'छाया' सचिव ने आगे कहा, कि भारत-यूके संबंधों में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा, कि इसे सत्ता में बैठे किसी भी व्यक्ति से आगे जाकर देखा जाना चाहिए। लैमी ने कहा, "भारत हमारा केवल 12वां व्यापारिक साझेदार है और इसीलिए कीर स्टारमर ने लेबर पार्टी को बदल दिया...और उस बदली हुई लेबर पार्टी में हमारे दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की आकांक्षाएं हमारी महत्वाकांक्षा की एक मंजिल हैं, न कि छत।"

उनका इशारा लेबर पार्टी के अतीत में भारत को लेकर रहे रूख को है। लेबर पार्टी ने पिछले दो सालों में कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, कि भारत को लेकर उसका नजरिया अब बदल चुका है।

वहीं, यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के पास भारत को लेकर अपना अलग घोषणापत्र है, जिसमें चुनावों से पहले मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का उल्लेख किया गया है।

इसमें कहा गया है, "यूके और भारत के बीच एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की नींव रखने के लिए पहले ही बहुत काम किया जा चुका है... एफटीए को शीघ्रता से पूरा करना यूके सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसे सही तरीके से करने का मतलब होगा, उच्च आर्थिक विकास, बेहतर उत्पादकता और यूके में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ना।"

UKIBC ने यह भी सिफारिश की है, कि यूके सरकार वार्ता को पूरा करने और एक ऐसे यूके-भारत मुक्त व्यापार समझौते के समर्थन को प्राथमिकता दे, जिससे हमारे माल और सेवा क्षेत्रों को लाभ हो। इसने कहा है, कि भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौता विश्वास का निर्माण करेगा और रक्षा, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।

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फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में पेंच कहां फंसी है?

हाउस ऑफ लॉर्ड्स इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स कमेटी में शामिल लिबरल डेमोक्रेट लॉर्ड क्रिस्टोफर फॉक्स, जो व्यापार सौदों की जांच करते हैं, उन्होंने FTA की दिशा में "स्पष्ट बाधाओं" की चेतावनी दी है। भारत ने व्यापार वीजा पर अस्थायी रूप से यूके गए भारतीय श्रमिकों पर लागू नियमों की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई है।

यूके में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने बताया है, कि यूके के साथ एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की 100-दिवसीय प्राथमिकता में था और दिल्ली ने एक "अभूतपूर्व प्रस्ताव" रखा था। उन्होंने कहा, "हम इस मुक्त व्यापार समझौते के साथ जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह वस्तुओं और सेवाओं सहित महत्वाकांक्षा की गहराई या सीमा को बढ़ाना है, जिसे हम यूके को देना चाहते हैं।"

उन्होंने व्यापार वार्ता के संबंध में वीजा पर यूके मीडिया के फोकस के संदर्भ में जोर देते हुए कहा, "हमारे लिए एफटीए में वीजा पहली प्राथमिकता नहीं है। हम एफटीए को लोगों को यूके लाने के साधन के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि यह हमारा उद्देश्य नहीं है। हम जो चाहते हैं वह GATS [विश्व व्यापार संगठन के सेवाओं में व्यापार पर सामान्य समझौता] के मोड 4 के तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सेवाओं के व्यापक ढांचे के भीतर उचित है, ताकि लोगों को अंतर-कंपनी ट्रांसफर के लिए यूके यात्रा करने में सक्षम बनाया जा सके।"

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