UK Assisted Dying Bill: ब्रिटेन में मिलेगा 'इच्छा मृत्यु' का अधिकार! संसद में छिड़ी बहस, आखिर क्या है ये बिल?

UK Assisted Dying Bill 2025: ब्रिटेन की संसद आज एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक मुद्दे पर बड़ा फैसला लेने जा रही है। यह फैसला उन लोगों से जुड़ा है जो ऐसी गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनका इलाज संभव नहीं है और जिनकी जिंदगी के बस कुछ ही महीने बचे हैं।

इस खास प्रस्ताव के तहत ऐसे गंभीर रूप से बीमार वयस्कों को अपनी मर्जी से, डॉक्टरों की मदद से, जीवन समाप्त करने यानी (Assisted Dying) की कानूनी अनुमति देने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को संसद में लेबर पार्टी की सांसद किम लीडबीटर लेकर आई हैं।

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उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति लगातार पीड़ा और असहनीय दर्द में जी रहा हो, और डॉक्टरों ने भी कह दिया हो कि अब उसके पास ज़्यादा समय नहीं है, तो उसे यह हक मिलना चाहिए कि वह अपनी मर्ज़ी से कब और कैसे विदा लेना चाहता है।

UK Assisted Dying Bill: क्या है यह विधेयक? (What is this bill?)

यह विधेयक कई महीनों से संसद में चर्चा और संशोधन के दौर से गुजर चुका है। अब आख़िरी फैसला होने जा रहा है - सांसद तय करेंगे कि ब्रिटेन में इस कानून को मंज़ूरी दी जाए या नहीं। अगर संसद ने इसे पारित कर दिया, तो यह ब्रिटेन के सामाजिक और चिकित्सा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बदलाव माना जाएगा। इस कानून से 18 साल से ऊपर के वे लोग लाभ ले सकेंगे, जिन्हें डॉक्टरों ने बताया हो कि उनकी जीवन प्रत्याशा छह महीने या उससे कम है, और जो अपना जीवन सम्मानपूर्वक खत्म करना चाहते हैं।

ब्रिटेन की संसद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह विधेयक Terminally Ill Adults (End of Life) Bill नाम से जाना जा रहा है, जिसका उद्देश्य है, "ऐसे वयस्कों को, जो टर्मिनल बीमारी से ग्रस्त हैं, कुछ सुरक्षा उपायों और शर्तों के तहत अपने जीवन को समाप्त करने के लिए सहायता प्राप्त करने की अनुमति देना।"

विधेयक में साफ किया गया है कि यह सुविधा केवल इंग्लैंड और वेल्स में लागू होगी, और इसमें शामिल व्यक्ति:

  • 18 वर्ष से अधिक आयु के होने चाहिए
  • चिकित्सकीय रूप से टर्मिनली इल घोषित किए गए हों
  • जिनकी जीवन प्रत्याशा छह महीने से कम हो

विधेयक के समर्थकों की क्या हैं दलीलें

मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विधेयक के समर्थकों का कहना है कि यह कानून "करुणा आधारित निर्णय" है जो व्यक्ति को जीवन के अंतिम चरण में सम्मानपूर्वक और पीड़ारहित विदाई का विकल्प देता है।

समर्थकों का यह भी कहना है कि अमीर लोग स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों में जा सकते हैं, जहां सहायता से मृत्यु की अनुमति है, लेकिन सामान्य ब्रिटिश नागरिकों को ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों ने यह भी उदाहरण दिए कि परिवारों ने अपने प्रियजनों की मदद करते हुए मुकदमों का सामना किया है। यह कानून उन परिवारों के लिए राहत ला सकता है।

विरोध करने वालों की चिंताएं

हालांकि इस बिल को लेकर संसद और समाज दोनों में गहरी बहस चल रही है। विरोध करने वाले कहते हैं, यह कानून वृद्ध, विकलांग और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को जोखिम में डाल सकता है।

वे इस बात की आशंका जताते हैं कि समाज, परिवार या स्वास्थ्य व्यवस्था का दबाव इन लोगों को "बोझ न बनने" के विचार से मृत्यु चुनने को प्रेरित कर सकता है। पैलिएटिव केयर (Palliative Care) यानी जीवन के अंतिम चरण की देखभाल को सुधारने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की मांग भी हो रही है, ताकि लोग दर्द रहित और गरिमामय मृत्यु का अनुभव कर सकें - बिना जानबूझकर मृत्यु की ओर बढ़ने के विकल्प के।

बिल पास हुआ तो क्या होगा?

यदि संसद में यह विधेयक बहुमत से पारित हो जाता है, तो ब्रिटेन का कानून इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेगा। इंग्लैंड और वेल्स में टर्मिनली इल वयस्क लोग कानूनी रूप से डॉक्टरों से सहायता मांग सकेंगे ताकि वे पीड़ा से मुक्त हो सकें। यह कानून यूरोप में स्विट्जरलैंड, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे देशों की तरह ब्रिटेन को भी सहायक मृत्यु की व्यवस्था लागू करने वाले देशों की सूची में शामिल कर देगा।

क्यों अहम है ये बदलाव?

यह विधेयक पहली बार नवंबर 2024 में संसद में लाया गया था, जब 330 सांसदों ने इसका समर्थन किया और 275 ने विरोध। तब से इसमें कई बदलाव किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा उपायों और चिकित्सा निगरानी के सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। आज का मतदान यह तय करेगा कि ब्रिटेन का समाज और कानून किस दिशा में आगे बढ़ेगा - करुणा और आत्मनिर्णय की ओर या सुरक्षा और मूल्य आधारित जीवन की रक्षा की ओर।

वयस्कों को गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार देने वाला यह कानून न केवल चिकित्सा नीति, बल्कि नैतिकता, मानवाधिकार और सामाजिक मूल्यों की कसौटी पर भी देश को खड़ा करता है। जहां एक ओर यह निर्णय लोगों को अंतिम समय में पीड़ा से मुक्ति देने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह समाज में कमजोर वर्गों की सुरक्षा और भरोसे की परीक्षा भी है। ब्रिटिश संसद का यह फैसला आने वाले सालों में दुनियाभर के देशों की नीति और सोच को भी प्रभावित कर सकता है।

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