NASA के नए स्पेससूट के फीचर्स देख चौंक जाएंगे आप!, चांद क्या स्पेस में कहीं भी घूम सकेंगे एस्ट्रोनॉट्स

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) एक खास स्पेससूट तैयार करवा रही है। नासा के आर्मेटिस एक्सप्लोरेशन मिशन के लिए तैयार किया जा रहा है। नासा ने दावा किया है कि ये स्पेस सूट एस्ट्रोनॉट के लिए स्पेसवॉक के साथ चंद्रमा की सतह पर रहने में उन्हें सक्षम बनाएंगे।

NASA Spacesuit

अंतरिक्ष एंजेंसी के जटिल मिशन की तैयारी

अंतरिक्ष एंजेंसी के जटिल मिशन की तैयारी

नासा का अंतरिक्ष मिशन आर्टेमिस-1 एक मानव रहित परीक्षण उड़ान है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर का ग्राउंड सिस्टम, ओरियन स्पेसक्राफ्ट (Orion Spacecraft) और स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट लगे हैं। आर्टेमिस 1 के अगस्त से पहले लॉन्च होने की उम्मीद नहीं है। यह नासा का एक जटिल अंतरिक्ष मिशन है।

NASA के स्पेससूट का डिजाइन पास

NASA के स्पेससूट का डिजाइन पास

नासा का इस मिशन के खास स्पेससूट डिजाइन हो चुका है। यह स्पेससूट दो निजी कंपनियों Axiom Space और Collins Aerospace बना रही हैं। स्पेसूट की डिजाइन फाइनल होने के बाद नासा ने कहा 'Axiom Space और Collins Aerospace को उनके स्पेससूट डिजाइन के साथ आगे बढ़ने के लिए चुने जाने पर बधाई, जो मिशन के लिए नई क्षमताओं को अनलॉक करेगा। नासा ने इस खास स्पेससूट को आर्मेटिस, चंद्रमा और मंगल पर मिशन तीनों में प्रयोग करने की बात कही।

2025 तक नासा का चंद्रमा तक पहुंचने का लक्ष्य

2025 तक नासा का चंद्रमा तक पहुंचने का लक्ष्य

नासा का नया स्पेससूट कई खूबियों वाला होगा। इसे अगली पीढ़ी का स्पेससूट कहा जा रहा है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यात्री स्पेसवॉक करने और चंद्रमा की सतह पर नेविगेट करने के लिए करेंगे। नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए ये ताजा स्पेससूट महत्वपूर्ण होंगे। नासा का 2025 तक चंद्रमा पर पहले आर्टेमिस अंतरिक्ष यात्रियों को पहुंचाने का लक्ष्य है।

स्पेससूट की खूबियां

स्पेससूट की खूबियां

अंतरिक्ष अभियान में एस्ट्रोनॉट्स के स्पेस सूट की कई खूबियां होती हैं। इसके अंदर कंप्यूटर, एअरकंडीशनिंग, ऑक्सीजन, पीने के पानी और इनबिल्ट टॉयलेट की भी व्यवस्था होती है। अंतरिक्ष यान से बाहर निकलकर अध्ययन अथवा अंतरिक्ष यान की मरम्मत का काम करते हुए स्पेस सूट एक रॉकेट पॉवर्ड बैकपैक से जुड़े होते हैं ताकि अंतरिक्ष यात्री आसानी से उड़ान भर सकें। सभी स्पेस सूट हवा से भरे होते हैं। इन्हें पहनने के बाद अंतरिक्ष यात्री फूले हुए और बेडौल नजर आते हैं।

खतरनाक माहौल में सुरक्षा

खतरनाक माहौल में सुरक्षा

अंतरिक्ष में तापमान बहुत नाटकीय ढंग से बदलता है। स्पेस में तापमान काफी तेजी से बदलता है। ऐसी हालत में शरीर सीधे सूर्य और अन्य अंतरिक्ष पिडों से निकलने वाले खतरनाक रेडिएशन के सपर्क में ना आए इसके लिए स्पेस सूट में खास फीचर्स होते हैं।

8 दशक पहले स्पेस सूट का आविष्कार

8 दशक पहले स्पेस सूट का आविष्कार

स्पेस सूट का आविष्कार करीब 80 साल पहले हुआ। शुरुआत मे इसे फौजी पायलटों जो वायुयान को काफी ऊंचाई पर ले जाते थे। 50 और 60 के दशक में अमेरिका तथा तत्कालीन सोवियत सघ में अंतरिक्ष की होड़ शुरू हुई तो और बेहतर स्पेस सूट बनने लगे। नासा के 'जैमिनी मिशन' के दौरान स्पेस सूट और बेहतर तथा नवीनतम टेक्नोलॉजी से लैस हुए।

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