Turkey-Syria Earthquake: मौत के बाद भी मलबे में दबी बेटी का हाथ थामे रहा पिता
तुर्की में चारों तरफ तबाही का मंजर है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। चारों तरफ आलीशान इमारतों का मलबा बिखरा हुआ है। इन मलबों में अभी भी हजारों लोग दबे हुए जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं

Image: Oneindia
तुर्की में बीते एक दशक में सबसे शक्तिशाली भूकंप आया है। देश में चारों तरफ तबाही का मंजर है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। चारों तरफ आलीशान इमारतों का मलबा बिखरा हुआ है। इन मलबों में अभी भी हजारों लोग दबे हुए जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं और रहात का इंतजार कर रहे हैं। मलबे में दबे इन लोगों को बाहर निकालने के लिए अभी भी ऑपरेशन जारी है। इस दौरान कई लोगों की जिंदगी बचाई गई है। इस दौरान कई ऐसी कहानियां निकल कर आ रही हैं जिसे देख आंखें भीग जाती हैं।
15 वर्षीय बेटी की हुई मौत
इस बीच एक ऐसी ही इमोशनल वीडियो काफी वायरल हो रही है जिसमें एक पिता अपनी मरी हुई बेटी का हाथ थामे नजर आ रहा है। ट्वीटर पर शेयर की गई इस तस्वीर में एक शख्स मलबे के पास बैठा है और उसने मलबे में दबी अपनी बेटी के हाथ को पकड़ा हुआ है। इस शख्स का नाम मेसुत हैंसर है। हैंसर की बेटी की मौत हो चुकी है। उसकी उम्र 15 साल थी। मेसुत का घर भूकंप से सबसे प्रभावित इलाकों में से एक कहारनमारस में है। सोमवार को आए भयानक भूकंप के बाद ढहीं इमारतों के मलबे में मेसुत की बेटी इरमाक दब गई और उसकी मौत हो गई।
इसके अलावा एक अन्य वीडियो सीरिया का है। इसमें एक मलबे के नीचे 2 बच्चे फंसे हुए हैं। दोनों बहनें करीब 17 घंटे तक मलबे में दबी रहीं, जिसके बाद उन्हें बाहर निकाला गया। एक और दर्दनाक वीडियो है, जिसमें एक परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो जाती है लेकिन उसी में से एक गर्भवती महिला की मौत के बाद उसकी बच्ची का जन्म होता है। जब उस बच्चे को रेस्क्यू किया जा रहा होता है तो उसकी गर्भनाल मां से जुड़ी हुई होती है।
आपको बता दें कि तुर्की-सीरिया में बचावकर्मियों ने क्षतिग्रस्त घरों के मलबों में जीवित बचे लोगों की तलाश जारी रखी है, लेकिन हादसे के तीन दिन बीतने और भीषण ठंड के कारण हर बीतते घंटे के साथ और लोगों को बचा पाने की उम्मीदें भी फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। इंग्लैंड स्थित नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक खतरों के विशेषज्ञ स्टीवन गोडबाय ने कहा, 'भूकंप के बाद के पहले 72 घंटों को महत्वपूर्ण माना जाता है।' उन्होंने कहा, '24 घंटों के भीतर जीवित रहने का औसतन अनुपात 74 प्रतिशत, 72 घंटों के बाद 22 प्रतिशत और पांचवें दिन यह 6 प्रतिशत हो जाता है।'












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