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लालच में अंधे अर्दोआन भूल गये कुरान का अपमान, स्वीडन को NATO की सदस्यता देने का किया ऐलान, संसद ने दी मंजूरी

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन यानी NATO को स्वीडन के रूप में जल्द ही एक और नया सदस्य मिल सकता है। मंगलवार को तुर्की संसद में विदेश मामलों की एक समिति ने NATO में शामिल होने के स्वीडन के एक प्रोटोकॉल को हरी झंडी दे दी है।

हालांकि अब इस प्रस्ताव को तुर्की में आम सभा से भी पारित होना होगा तभी जाकर स्वीडन को नाटो की सदस्या मिलने की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी। फिलहाल ये प्रक्रिया कब शुरू होगी, अभी इसका ऐलान नहीं किया गया है।

Turkey Approves Sweden NATO Bid

दरअसल तुर्की सरकार करीब एक साल से स्वीडन की NATO मेंबरशिप की राह में अड़ंगे लगा रही थी। हालांकि इसी साल जुलाई महीने में राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दोआन ने NATO शिखर सम्मेलन के दौरान स्वीडन की सदस्यता पर अपनी आपत्ति छोड़ दी थी।

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद स्वीडन और फिनलैंड ने बढ़ी अपने दशकों पुराने सैन्य गुटनिरपेक्षता के रुख से पीछे हटते हुए नाटो में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, इस दौरान फिनलैंड को स्वीडन की तरह किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि तुर्की और हंगरी समेत नाटो में शामिल सभी देशों ने फिनलैंड को मंजूरी दे दी थी।

चूंकि नाटो में नए सदस्यों को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की मंजूरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्वीडन के मामले में तुर्की और हंगरी के विरोध के कारण देरी हुई। फिनलैंड इस साल अप्रैल में NATO ग्रुप में शामिल हुआ और NATO का 31वां सदस्य बन गया। दूसरी तरफ प्रारंभिक आवेदन के डेढ़ साल बाद भी स्वीडन नाटो का मेंबर नहीं बन पाया है।

तुर्की ने अड़ंगा क्यों लगाया?

तुर्की का ऐसा मानना है कि कुर्द उग्रवादियों और अन्य आतंकी संगठनों के प्रति स्वीडन का बहुत नरम रवैया रहा है। तुर्की इन संगठनों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। इनमें कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी या पीकेके से जुड़े लोग शामिल हैं, जिसने तुर्की में 39 साल से विद्रोह छेड़ रखा है और राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दोआन की सरकार के खिलाफ 2016 में तख्तापलट के प्रयास से कथित संबंध रखने वाले लोग शामिल हैं।

स्वीडन ने तुर्की को मनाया

अंकारा की सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए तुर्की, स्वीडन और फिनलैंड पिछले साल एक समझौते पर पहुंचे। इसके बाद स्वीडन ने अपने आतंकवाद विरोधी कानूनों को कड़ा करने के लिए कदम उठाए। नए कानून के मुताबिक चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने पर 8 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

हालांकि मामला तब और बिगड़ गया जब डेनमार्क में इस्लाम विरोधी विरोध प्रदर्शनों की झड़ी लग गई। इसमें कुरान जलाने के आयोजन होते थे। इसने न सिर्फ अर्दोआन सरकार बल्कि तुर्की जनता को भी नाराज कर दिया। हालांकि इन प्रदर्शनों की स्वीडिश सरकार ने निंदा की थी।

मंजूरी देने के बदले उठाया खूब फायदा

तुर्की को मनाने के लिए स्वीडन ने घोषणा की कि वह सीमा शुल्क व्यवस्था में सुधार की मांग करेगा और तुर्की नागरिकों के लिए वीज़ा-मुक्त यूरोपीय यात्रा को लागू करने के लिए कदम उठाएगा। इतना ही नहीं नाटो सदस्यता के बदले स्वीडन, तुर्की के यूरोपियन यूनियन में शामिल होने के प्रयासों का समर्थन भी करेगा।

दरअसल, तुर्की में लोकतांत्रिक व्यवस्था से पीछे हटने और मानवाधिकारों पर खराब रिकॉर्ड के कारण 2018 में तुर्की की यूरोपीय संघ सदस्यता वार्ता रुक गई थी। अर्दोआन ने स्वीडन की नाटो सदस्यता को लेकर कहा था कि तुर्की की संसद से स्वीडन की नाटो सदस्य बनने से पहले यूरोपियन यूनियन (EU) को उन्हें अपना हिस्सा बनाना चाहिए।

अमेरिका पर भी बनाया दबाव

इतना ही नहीं, स्वीडन की सदस्यता के जरिए अमेरिका पर फाइटर जेट्स देने के लिए भी दबाव बनाया। इस महीने की शुरुआत में, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप अर्दोआन ने खुले तौर पर स्वीडन की नाटो सदस्यता के बदले अमेरिका निर्मित एफ-16 लड़ाकू जेट मांगा।

तुर्की की संसद में विपक्षी नेताओं ने आर्दोआन सरकार से पूछा भी था कि क्या स्वीडन को नाटो सदस्या के लिए समर्थन देने के बदले अमेरिका क्या तुर्की को एफ-16 हथियार देगी, इसका भरोसा उन्हें मिला है?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन तुर्की को F-16 देने का समर्थन करता है लेकिन अमेरिकी कांग्रेस के भीतर, तुर्की को हथियार बेचने का कड़ा विरोध है। न सिर्फ एफ-16 बल्कि अर्दोआन सरकार ने कनाडा और अन्य नाटो सहयोगियों से तुर्की पर हथियार प्रतिबंध हटाने का भी आह्वान किया।

हंगरी भी लगा रहा अड़ंगा

स्वीडन पर नाटो का मेंबर होने से रोकने में अड़ंगा लगाने वाला हंगरी वो दूसरा है, जिसने अब तक घोषणा नहीं की है कि वह कब नॉर्डिक देश का प्रस्वात पारित कराने वाला है। हंगरी में फिडेज पार्टी की सरकार है और इसके नेता पीएम विक्टर ओबर्न को खुले तौर पर रूस का समर्थक माना जाता है।

अभी तक हंगरी सरकार ने स्वीडन का नाटो मेंबर बनने के लिए किसी भी प्रकार से समर्थन का संकेत नहीं दिया है। हालांकि हंगरी पहले कहता रहा है कि यदि तुर्की की तरफ से स्वीडन को मंजूरी मिल जाती है तो वह भी इसके लिए तैयार हो जाएगा।

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