America Visa: अमेरिका में 75% कम हुए भारतीय? वजह जानकर आप भी दंग रह जाएंगे
Trump Visa Policy 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष ने भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के नामांकन में 75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
सख्त वीजा नीतियों, इंटरव्यू स्लॉट्स की कमी और बढ़ते रिजेक्शन रेट ने 'अमेरिकन ड्रीम' को एक अनिश्चित भविष्य में बदल दिया है। न केवल छात्र, बल्कि H-1B वीजा पर काम कर रहे पेशेवर भी इस प्रशासनिक सख्ती और बदलती आर्थिक नीतियों के कारण भारी दबाव महसूस कर रहे हैं।

US Student Visa Rules 2026: वीजा नीतियों में सख्ती और नामांकन में गिरावट
अमेरिकी प्रशासन द्वारा वीजा प्रक्रिया को जटिल बनाने से भारतीय छात्रों का भरोसा टूटा है। साक्षात्कार के लिए स्लॉट्स की भारी किल्लत और सोशल मीडिया स्क्रूटनी जैसे नए नियमों ने आवेदन प्रक्रिया को डरावना बना दिया है। अगस्त से अक्टूबर के पीक सीजन में भारतीय छात्रों की संख्या में 70 प्रतिशत की कमी देखी गई। केवल वही छात्र सफल रहे जिन्होंने बहुत पहले प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जबकि देरी से आवेदन करने वाले हजारों छात्र अवसर से वंचित रह गए।
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स्टूडेंट वीजा रद्द होने का संकट
दिसंबर 2025 तक लगभग 8,000 स्टूडेंट वीजा रद्द किए जाने की खबर ने समुदायों में भय का माहौल बना दिया है। कई छात्रों को अचानक ईमेल के जरिए देश छोड़ने के आदेश दिए गए, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया। इनमें से कई कार्रवाइयां पुराने या मामूली तकनीकी आधारों पर की गईं। हालांकि कुछ मामलों में कानूनी हस्तक्षेप से राहत मिली, लेकिन इस अस्थिरता ने टॉप अमेरिकी विश्वविद्यालयों के प्रति आकर्षण को काफी कम कर दिया है।
H-1B वीजा और पेशेवरों की चुनौतियां
भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले H-1B वीजा कार्यक्रम पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। फीस में बढ़ोतरी और वीजा संख्या को सीमित करने के प्रस्तावों ने 72 प्रतिशत भारतीय हिस्सेदारी वाले इस सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। वर्क परमिट के कड़े नियम और ऑटोमैटिक एक्सटेंशन की सुविधा खत्म होने से पेशेवर अब अमेरिका के बजाय अन्य देशों या स्वदेश वापसी को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देखने लगे हैं।
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जॉब मार्केट की सुस्ती और अनिश्चित भविष्य
अमेरिकी श्रम बाजार में आई सुस्ती ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कंपनियों ने न केवल नई भर्तियां रोकी हैं, बल्कि पहले से दिए गए जॉब ऑफर्स और वीजा ट्रांसफर पर भी रोक लगा दी है। इस आर्थिक मंदी और प्रशासनिक सख्ती के दोहरे वार ने भारतीय दूतावासों पर मदद के लिए दबाव बढ़ा दिया है। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमों में लचीलापन नहीं आया, तो भारतीय प्रतिभाओं का अमेरिका से मोहभंग होना तय है।












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