Trump on Russia Ukraine War: नए साल में खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध? शांति फॉर्मूले पर ट्रंप का बड़ा दावा
Trump on Russia Ukraine War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रुस-युक्रेन वॉर को लेकर रविवार, 28 दिसंबर को बड़ा दावा किया कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता अब तक के सबसे निर्णायक मोड़ के करीब पहुंच गई है।
फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष "काफी करीब, शायद बहुत ही करीब" पहुंच चुके हैं। हालांकि, पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं, जो शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी अड़चन हैं।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का पोस्ट
जेलेंस्की से मुलाकात से ठीक पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि जेलेंस्की से दोपहर 1 बजे होने वाली बैठक से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी "अच्छी और बहुत ही उपयोगी" टेलीफोन बातचीत हुई है। ट्रंप ने बताया कि यह बैठक मार-ए-लागो के मुख्य डाइनिंग रूम में होगी और प्रेस को भी आमंत्रित किया गया है।
ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ फोन कॉल दो घंटे से ज्यादा चली और उन्होंने इसे "उत्पादक" बताया। वहीं, क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इसे "मैत्रीपूर्ण" बातचीत करार दिया।
ट्रंप-जेलेंस्की की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
मार-ए-लागो में हुई मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ट्रंप ने कहा कि बातचीत लगभग 95 फीसदी पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ "कठिन और संवेदनशील मुद्दे" अभी सुलझने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा कि क्या यह वार्ता सफल होकर युद्ध खत्म करने में कामयाब होगी।
जेलेंस्की ने इस दौरान कहा कि युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी को लेकर सहमति बन गई है, जो स्थायी शांति की दिशा में "सबसे अहम मील का पत्थर" है। हालांकि, दोनों नेताओं ने शांति समझौते के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की।
डोनबास बना सबसे बड़ा विवाद
डोनबास क्षेत्र इस पूरी वार्ता का सबसे पेचीदा मुद्दा बना हुआ है। रूस लंबे समय से चाहता है कि डोनबास पर उसका पूर्ण नियंत्रण मान लिया जाए। वहीं, यूक्रेन का कहना है कि किसी भी समझौते में मौजूदा मोर्चों पर स्थिति को 'फ्रीज' किया जाना चाहिए, न कि यूक्रेनी सेना को पूरी तरह पीछे हटना चाहिए। ट्रंप ने स्वीकार किया कि डोनबास को लेकर बातचीत अभी अधूरी है। उन्होंने कहा, "यह मुद्दा अब भी अनसुलझा है, लेकिन हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह बहुत कठिन सवाल है।"
अमेरिका ने प्रस्ताव दिया है कि यदि यूक्रेन डोनबास छोड़ता है तो वहां एक फ्री इकोनॉमिक ज़ोन बनाया जा सकता है, हालांकि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। जेलेंस्की ने साफ किया कि किसी भी शांति समझौते को यूक्रेन की संसद की मंजूरी लेनी होगी या फिर इसे जनमत संग्रह के जरिए जनता के सामने रखा जाएगा। इस पर ट्रंप ने कहा कि यदि इससे समझौते में मदद मिलती है तो वह यूक्रेनी संसद को संबोधित करने के लिए भी तैयार हैं।
पुतिन के रुख में कोई नरमी नहीं
हालांकि बातचीत आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन रूस की मांगों में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया है। पुतिन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि रूस के कब्जे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्रों और क्रीमिया को रूसी क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। इसके अलावा, रूस चाहता है कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की कोशिश छोड़ दे। क्रेमलिन ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन में नाटो सैनिकों की तैनाती को "वैध सैन्य लक्ष्य" माना जाएगा।
बातचीत जारी, लेकिन युद्ध भी
जहां एक ओर शांति वार्ता आगे बढ़ती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। जेलेंस्की के अमेरिका पहुंचने से एक दिन पहले ही रूस ने कीव और अन्य शहरों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे कई इलाकों में बिजली और हीटिंग व्यवस्था ठप हो गई। जेलेंस्की ने इन हमलों को अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही शांति कोशिशों के प्रति रूस की प्रतिक्रिया बताया।
फिलहाल रूस क्रीमिया समेत यूक्रेन के करीब 12 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण रखता है, जिसमें डोनबास का बड़ा हिस्सा और ज़ापोरिज़्ज़िया व खेरसॉन क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में भले ही कूटनीतिक स्तर पर उम्मीदें जगी हों, लेकिन जमीन पर हालात अब भी बेहद जटिल बने हुए हैं।












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