दूध का धुला नहीं बहुत जहरीला है अमेरिका का लोकतंत्र, US की राजनीति कितनी खतरनाक है? आंकड़ों से समझिए
US Presidential Election 2024: हिंदी में एक कहावत है, दूर के ढोल सुहावने लगते हैं और अमेरिकी लोकतंत्र को लेकर अगर आप ये सोच रहे होंगे, कि वहां सबकुछ स्वतंत्र है और जिस तरह से भारत जैसे देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आरोप लगाए जाते हैं, वहां ऐसा कुछ नहीं है, तो ये आपकी बहुत बड़ी गलतफहमी हो सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप पर हमला अमेरिका में नरफत की बुनियाद पर बनाए जा रहे अमेरिकी समाज की वो तस्वीर है, जहां एक सर्वे में पाया गया, तकि 10 प्रतिशत लोग बल प्रयोग के जरिए भी ट्रंप को रास्ते से हटाने के पक्षधर हैं, तो 7 प्रतिशत ऐसे लोग भी हैं, जो हर ताकत का इस्तेमाल कर ट्रंप को सत्ता में लाने के समर्थक हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश ने तत्काल इस आशंका को काफी बढ़ा दिया है, कि पहले से ही काफी तनावपूर्ण हो चुका अमेरिकी चुनाव अब हिंसा की तरफ बढ़ सकता है।
यूरेशिया ग्रुप के प्रेसिडेंट और राजनीति विज्ञानी इयान ब्रेमर ने ट्रंप पर हुई गोलीबारी के फौरन बाद ऑनलाइन पोस्ट के साथ बात करते हुए कहा, कि "ऐसे देश में, जहां बहुत से अमेरिकी यह नहीं मानते, कि उनका लोकतंत्र स्वस्थ है या विशेष रूप से कार्यात्मक है, और जहां अधिकांश अमेरिकी मानते हैं, कि घरेलू राजनीतिक विपक्ष उस लोकतंत्र को नष्ट करना चाहता है, यह उस माहौल में घटने वाली सबसे खराब घटना है।"
ब्रेमर ने कहा, कि उन्हें "इस बात की गहरी चिंता है, कि यह भविष्य में और ज्यादा राजनीतिक हिंसा और सामाजिक अस्थिरता का संकेत है।"
शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉबर्ट पेप, जो शिकागो प्रोजेक्ट ऑन सिक्योरिटी एंड थ्रेट्स के डायरेक्टर भी हैं, उन्होंने ने NBC न्यूज को भेजे एक ईमेल में नेशनल सर्वे का हवाला देते हुए कहा, कि "10% अमेरिकी वयस्क नागरिक, जिनमें से एक तिहाई के पास बंदूकें हैं, वो इस बात से सहमत हैं, कि "डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए बल का प्रयोग उचित है।"
वो इस बात को भी मानते हैं, कि "हमें राष्ट्रपति बाइडेन को प्रतिशोध में खतरों के बारे में भी चिंता करने की आवश्यकता है। हमारे सर्वेक्षण से पता चलता है, कि 7% अमेरिकी वयस्क (18 मिलियन) ट्रम्प को राष्ट्रपति पद पर बहाल करने के लिए बल के इस्तेमाल का समर्थन करते हैं, जिनमें से आधे के पास बंदूकें हैं।"
पेप ने कहा, कि "दोनों दलों और सरकार के सभी स्तरों पर मौजूद राजनीतिक नेताओं को, जिनमें राष्ट्रपति, सीनेट और सदन के नेतृत्व, गवर्नर्स और महापौरों भी शामिल हैं, उन्हें राजनीति के किसी भी पक्ष से होने वाली राजनीतिक हिंसा की तत्काल निंदा करनी चाहिए।"
राजनीतिक वैज्ञानिक और चरमपंथ विशेषज्ञ हाल के वर्षों में चेतावनी दे रहे हैं, कि बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण के साथ-साथ धमकियां और हिंसा की घटनाएं, अमेरिकी राजनीतिक क्षेत्र का एक आम हिस्सा बन गई हैं।
विभिन्न सर्वेक्षण एजेंसियों और स्टडी में स्थानीय अधिकारियों ने निशाना बनाकर हमला होने की बात कबूल की है।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल में ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस ने जनवरी में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें खुलासा हुआ, कि सिर्फ जाने-माने राष्ट्रीय राजनेताओं को ही धमकियों का सामना नहीं करना पड़ा है, बल्कि 43% राज्य विधायकों और 18% स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा, कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वेस्ट पॉइंट, न्यूयॉर्क में यू.एस. मिलिट्री अकेडमी में आतंकवाद का मुकाबला करने वाले केंद्र ने पाया है, कि हाल के वर्षों में सार्वजनिक अधिकारियों को धमकाने से संबंधित संघीय आरोपों में तेजी से इजाफा हुआ है और इस ट्रेंड में लगातार वृद्ध हुई है।
वेस्ट प्वाइंट के स्टडी में कहा गया है, कि "2023 और 2024 के मामलों की प्रारंभिक समीक्षा से पता चलता है, कि संघीय अभियोजन की संख्या नए रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने की दिशा में है।"

अमेरिका की राजनीति में कितनी हिंसा?
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में पॉलिसी एनालिसिस और कम्युनिकेशन के प्रोफेसर एरिक निस्बेट, जिन्होंने राजनीतिक हिंसा का अध्ययन किया है, उन्होंने कहा, कि सरकार के सभी स्तरों पर राजनेताओं के लिए हिंसक धमकियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा, कि "2016 से, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन निर्वाचित अधिकारियों को निशाना बनाकर राजनीतिक धमकियों में भारी उछाल आया है और संघीय स्तर से लेकर राज्य और स्थानीय सरकारों में भी हिंसक घटनाओं का इजाफा हुआ है।"
2017 में, लुइसियाना के सांसद स्टीव स्कैलिस को की गोली मार कर हत्या कर दी गई। उस समय स्कैलिस सदन में तीसरे स्थान के रिपब्लिकन नेता थे। 2020 में, मिशिगन में कई लोगों ने गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर का अपहरण करने की साजिश रची, 2022 में सैन फ्रांसिस्को में अमेरिकी संसद की तत्कालीन स्पीकर नैन्सी पेलोसी के पति पर हथौड़े से बुरी तरह से हमला किया गया।
निस्बेट ने चेतावनी दी है, कि अमेरिकी राजनीति में हिंसक धमकियां अब काफी सामान्य होती जा रही हैं। उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न द्वारा किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण का हवाला देकर कहा, कि दोनों दलों ने राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा को अपनाना शुरू कर दिया है।
निस्बेट ने कहा है, कि "2022 के मध्यावधि चुनाव के फौरन बाद नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर कम्युनिकेशन एंड पब्लिक पॉलिसी की तरफ से किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है, कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी में ऐसे नेताओं की कमी नहीं है, जिनका मानना है, कि दूसरे पक्ष के राजनीतिक नेताओं को धमकाना कम से कम कुछ मामलों में उचित है और प्रत्येक पार्टी के भीतर समान संख्या में ऐसे नेता मौजूद हैं, जो अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के सलिए राजनीतिक हिंसा को सही मानते हैं।"
चरमपंथ का स्टडी करने वाले एक और थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग में खतरा विश्लेषण की निदेशक कैथरीन केनेली ने कहा, कि कई खतरे झूठी या भ्रामक जानकारी से प्रेरित लोगों से बनती हैं।
उन्होंने कहा, कि "दुर्भाग्य से झूठे और/या भ्रामक भाषण की वजह से असहमतियां बढ़ती हैं, जिससे धमकियों का चलन शुरू होता है और वो हिंसक हो जाता है, जो काफी चिंताजनक है।"
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिकी नेताओं को चाहिए कि वो अपने देश की पॉलिटिकल सिस्टम में आए इस खतरनाक बग को सबसे पहले साफ करें और फिर किसी दूसरे देश की लोकतंत्र पर ध्यान दें, लेकिन सबसे पहले अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियां देश की सुरक्षा की तैयारी करे, क्योंकि ट्रंप पर हमले का अंजाम बिना किसी एक्शन के नहीं होने वाला है।












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