अफगानिस्तान हार पर बवाल, कमेटी के सामने पेश हुए अमेरिकी सेना प्रमुख, बाइडेन पर फोड़ा ठीकरा!
अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल मार्क मिले ने अफगानिस्तान में मिली हार को रणनीतिक विफलता करार दिया है।
वॉशिंगटन, सितंबर 29: अफगानिस्तान में हार के बाद अमेरिका में बवाल मचा हुआ है और अब अमेरिकी कांग्रेस में अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने सिलसिलेवार तरीके से अफगानिस्तान हार की वजहें बताई हैं। शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने अफगानिस्तान में 20 साल के युद्ध को "रणनीतिक विफलता" कहा है और मंगलवार को अमेरिकी संसद कांग्रेस की सीनेट आर्म्ड सर्विस कमेटी के सामने स्वीकार किया है कि, वो अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को नहीं लाना चाहते थे।

शीर्ष सैन्य अधिकारी ने क्या कहा?
अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी मार्के मिले ने देश की संसद कांग्रेस के सामने अफगानिस्तान में अमेरिका की हार से लेकर तमाम स्थितियों के बारे में अपनी बात रखी है। जिसमें सबसे अहम बात ये थी, कि उन्होंने माना है कि अफगानिस्तान में पिछले 20 सालों में अमेरिका ने रणनीतिक गलतियां की हैं और वो चाहते थे कि युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिक एक साथ बाहर नहीं निकले। बल्कि, वो अफगानिस्तान में अभी सैनिकों को रखने के पक्ष में थे। मार्क मिले के इस बयान के बाद अमेरिका की राजनीति में उबाल आ गया है। क्योंकि, अब रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि जनरल मार्क मिले के बयान के बाद ये साबित हो गया है कि जो बाइडेन ने देश के सामने अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को बाहर निकालने पर झूठ बोला है। दरअसल, बाइडेन ने पिछले महीने इस बात से इनकार कर दिया था, कि सेना की तरफ से उन्हें अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को एक साथ नहीं निकालने की अपील की गई है।

मार्क मिले ने बाइडेन को दी थी सलाह
हालांकि, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी मार्क मिले ने यह बताने से इनकार कर दिया, कि उन्होंने जो बाइडेन को क्या सलाह दी थी। आपको बता दें कि, जब बाइडेन इने अमेरिका की सत्ता संभाली थी तो उन्होंने अमेरिका और तालिबान के बीच हुई डील पर फिर से विचार किया था। ट्रम्प प्रशासन ने तालिबान के साथ मई 2021 तक अमेरिकी सेना की उपस्थिति को शून्य करने के लिए एक समझौते का पालन किया था, जो अक्टूबर 2001 में शुरू हुए अमेरिकी युद्ध को समाप्त कर रहा था। और उस वक्त मार्क मिले ने जो बाइडेन से कहा था कि वो अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिकों को एक साथ बाहर नहीं निकाले। मार्क मिले के साथ गवाही देते हुए, अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने भी बाइडेन को दी गई अपनी सलाह के बारे में बताने से इनकार कर दिया।

'अमेरिका की रणनीतिक नाकामी'
मार्क मिले ने कांग्रेस की सीनेट कमेटी के सामने पेश होने के बाद कई बड़े बयान दिए हैं। लेकिन, सबसे चौंकाने वाली बात ये थी, कि उन्होंने कहा है कि बाइडेन को जो सलाह उन्होंने दी थी, वो उनकी व्यक्तिगत राय थी। मार्क मिले ने कमेटी के सामने पेश होने के बाद कहा कि, उन्हें लग रहा था कि काबुल में कम से कम 2500 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बनी रहनी चाहिए थी, ताकि अफगानिस्तान की सरकार को सुरक्षा दी जा सके और तालिबान राज को वापस आने से रोका जा सके। आपको बता दें कि, अमेरिकी खुफिया आंकलन को धता बताते हुए तालिबान ने कुछ ही महीने ने काबुल पर कब्जा कर लिया, वो भी अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी के बाद भी। राजधानी काबुल पर कब्जा करने के लिए तो तालिबान को एक गोली तक नहीं चलानी पड़ी।

'सैनिकों को बनाए रखने की सिफारिश'
जनरल फ्रैंक मैकेंजी, जो अमेरिकी सेना के मध्य कमान के प्रमुख के रूप में अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की देखरेख कर रहे थे, उन्होंने कहा है कि, वो जनरल मार्क मिले के विचार से सहमत थे कि अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को एक साथ नहीं निकाला जाना चाहिए और कम से कम काबुल की सरकार को बचाने के लिए कुछ सैनिकों को वहां रखा जाना चाहिए। मैकेंजी ने कहा कि, "मैंने सिफारिश की थी कि हम अफगानिस्तान में कम से कम 2,500 सैनिकों को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि, मैंने 2020 के की शुरुआत में भी सिफारिश की थी कि हम उस समय कम से कम 4,500 सैनिकों को बनाए रखें। लेकिन, उन्होंने कहा कि, ये मेरे व्यक्तिगत विचार थे।" उन्होंने कहा कि, ''मेरा मानना था कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के हटने के साथ ही सरकार गिर जाएगी''।

अफगानिस्तान हार को लेकर समीक्षा
छह घंटे की सीनेट की सुनवाई ने अफगानिस्तान में अमेरिकी विफलताओं की एक विस्तारित कांग्रेस समीक्षा होने की संभावना की शुरुआत की गई है। सुनवाई की लंबाई और गहराई युद्ध इस बात पर आधारित थी कि पिछले 20 सालों में अमेरिकी टैक्सपेयर्स के अरबों डॉलर बर्बाद करने और सैकड़ों सैनिकों के मारे जाने के बाद आखिर अमेरिका को हासिल क्या हुआ है? वहीं, अर्कांसस के रिपब्लिकन नेता सेन टॉम कॉटन ने अमेरिकी जनरल मार्क मिले से पूछा है, कि उनकी सलाह खारिज होने के बाद उन्होंने इस्तीफा देने का विकल्प क्यों नहीं चुना। आपको बता दें कि, मार्क मिले को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था और बाइडेन ने उन्हें बरकरार रखा। उन्होंने कहा था कि कमांडर इन चीफ को उनकी सर्वश्रेष्ठ सलाह प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी थी।

'अमेरिका की विश्वसनीयता को झटका'
मार्क मिले ने यह भी दावा किया, कि तालिबान के हमले के बीच अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी ने अमेरिकी विश्वसनीयता को 'नुकसान' पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि दुनिया भर के सहयोगियों और भागीदारों के साथ हमारी विश्वसनीयता की गहन समीक्षा की जा रही है कि यह संबंध अब किस तरह से जाने वाला है और मुझे लगता है कि 'नुकसान' एक शब्द है जिसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, तालिबान "एक आतंकवादी संगठन था और बना हुआ है और उन्होंने अभी भी अल कायदा के साथ संबंध नहीं तोड़े हैं, जिसने 11 सितंबर, 2001 को अफगानिस्तान से हमलों की साजिश रची थी।












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