...उस तबाही में शामिल होते आप तो ज़रूर याद रखते आज का दिन
बेंगलोर-अंतराष्ट्रीय। इतिहास हर वक्त अपनी कमी महसूस नहीं करवाता, पर कुछ दिन-तारीखें ऐसी होती हैं जो अचानक हमारे ज़ेहन में ज़ख्मों को कुरेद लाती हैं। आज 4 सितंबर भी ऐसी ही एक घटना का गवाह है।

- दरअसल आज ही के दिन 1985 में 73 सालों के बाद पहली बार समुद्र में डूबे आलीशान जहाज टाइटेनिक की तस्वीरें सामने आई थीं। DW रिपोर्ट ने भी उस बेहरम दिन को आज याद किया है। टाइटेनिक दुर्घटना में जहाज पर सवार 1,500 लोग मारे गए थे।
- उस दौरान अमेरिका और फ्रांस के सहयोग से चलाए जा रहे खोजी अभियान में टाइटेनिक के अवशेषों का पता चला था। अभियान का नेतृत्व डॉक्टर रॉबर्ट बलार्ड कर रहे थे। जब जांच दल ने पाया था कि जहाज समुद्र में 2.5 मील या करीब 4 किलोमीटर की गहराई पर पड़ा हुआ है।
- इस टूटे फूटे जहाज की पहली तस्वीरें इस अभियान में शामिल आर्गो नामकी एक मानवरहित पनडुब्बी से ली गईं थीं पर उसके बाद पीड़ितों के ज़ख्म एक बार फिर हरे हो गए थे, जिन्हेांने अपनों को उस आलीशान जहाज यात्रा में हमेशा के लिए खो दिया था।
- इसके बाद कई और रंगीन कैमरों को पानी के भीतर भेज कर तस्वीरें ली गईं थीं। टाइटेनिक दुर्घटना से बच कर निकले कुछ लोगों और दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिवार की यही इच्छा थी कि जहाज के अवशेषों को बेकार न छेड़ा ना जाए क्योंकि वे उसे अपने लोगों की समाधि मानते हैं।
टाइटेनिक के मलबे की छानबीन करने का अधिकार आज भी केवल एक ही संस्था न्यू यॉर्क की आरएमएस टाइटेनिक आइएनसी के पास है। अब कंपनी उच्च तकनीक और बढ़िया रिजॉल्यूशन वाले कैमरों की मदद से जहाज के मलबे की 3डी तस्वीरें बनाने पर काम कर रही है। गौरतलब है कि घटना पर बहुचर्चित फिल्म 'टाइटेनिक' भी बनाई जा चुकी है।












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