Titanic: डूबने के 111 सालों बाद टाइटैनिक जहाज कैसा दिखता है? समुद्र के 'श्मशान' में एक और जलसमाधि
Titanic Sub Tragedy: अटलांटिक महासागर में साल 1912 में डूबा टाइटैनिक जहाज, आज एक पर्यटन का केन्द्र बन चुका है। दुनियाभर के अमीर, जिनके बाद करोड़ों रुपये हैं, वो समुद्र में जलसमाधि लिए इस मनहूस जहाज को देखने जाते हैं। मामलूम किस घड़ी में बनाई गई थी, ये टाईटैनिक जहाज, जो 111 सालों के बाद भी लोगों के लिए मनहूस साबित हुई है।
टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने गये दुनिया के कुछ अमीर अब कभी लौट नहीं पाएंगे। पनडुब्बी में सवार सभी पांचों लोगों की मौत की ना सिर्फ पुष्टि कर दी गई है, बल्कि ये भी कहा गया है, कि उनके शव भी कभी बरामद नहीं किए जा सकेंगे। लिहाजा, टाइटैनिक जहाज एक बार फिर से चर्चा में है। ऐसे में आइये देखते हैं, कि ये जहाज डूबने के 111 सालों के बाद टाइटैनिक जहाज का मलबा कैसे दिखता है?

अटलांटिक महासागर में डूबा था टाइटैनिक
विशालकाय जहाज टाइटैनिक जहाज को जल समाधि लिए 111 सालों का वक्त बीत चुका है, लेकिन टाइटैनिक जहाज को लेकर अभी भी लोगों की उत्सुकता बनी रहती है। लोगों की इसी उत्सुकता का फायदा कॉमर्शियल कंपनियां उठाती हैं और टूरिज्म का एक नया कारोबार शुरू हो चुका है।
ओशनगेट एक्सपेडिशन्स कंपनी ने पिछले साल टाइटैनिक जहाज का एक वीडियो जारी किया था और अब इसी कंपनी की पनडुब्बी टाइटैनिक टूरिज्म करते वक्त डूबी है। इस वीडियो में आप समुद्र के सतह पर टाइटैनिक को देख सकते हैं।
टाइटैनिक जहाज साल 1912 में हादसे का शिकार होकर समुद्र में डूब गई थी, लेकिन साल 1985 में इस जहाज को खोजने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें पता चला था, कि ये जहाज न्यूफ़ाउंडलैंड से 400 मील से भी कम दूरी पर दो खंडों में सीधा और विभाजित पाया गया था।
कैसे डूबा था टाइटैनिक जहाज?
टाइटैनिक जहाज के डूबने से 1,500 से ज्यादा यात्रियों की मृत्यु हो गई थी और करीब 700 लोगों को बचाया गया था और इस जगह को अभी भी पानी के अंदर का श्मशान कहा जाता है। कई बार ऐसी मांग की गई है, कि टाइटैनिक जहाज के मलबे को समुद्र से बाहर निकाल लिया जाए, लेकिन कई इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने टाइटैनिक जहाज को समुद्र से बाहर निकालने का काफी विरोध किया है, जिनमें से जॉन्सटन भी शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी सरकार की उस प्लान का विरोध किया था, जिसके तहत पानी से टाइटैनिक को निकालने का जिक्र किया गया था।
वहीं, टाइटैनिक हिस्टोरिकल सोसाइटी के आधिकारिक इतिहासकार डॉन लिंच ने पिछले साल कहा था, कि उन्हें टाइटैनिक कलाकृतियों को समुद्र से बाहर लाया जाना पसंद नहीं है, लेकिन समु्द्र में टाइटैनिक टूरिज्म से उन्हें भी आपत्ति नहीं है। आपको बता दें कि, साल 1997 में टाइटैनिक जहाज पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बनाई गई थी, जो सुपर-डुपर हिट रही थी।
टाइटैनिक टूरिज्म का होगा नुकसान?
कई वैज्ञानिकों का कहना है कि, इस तरह के पर्यटन से टाइटैनिक जहाज का नुकसान होगा, लेकिन स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री में समुद्री इतिहास के क्यूरेटर पॉल एफ जॉनसन का कहना है कि, ऐसा नहीं है, कि पर्यटन से इस जहाज का नुकसान होगा, क्योंकि वो मलबे को छू या नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं।"
जॉनसन ने पिछले साल कहा था, कि "यह सामान्य रूप से पानी के नीचे की दुनिया और जहाजों के लिए ध्यान लाता है, लेकिन मेरी राय में, टाइटैनिक से अब इतना कुछ नहीं सीखा जा सकता है, जिसे हम पहले से नहीं जानते हैं। आपको बता दें कि, दशकों से इस बात पर बहस चल रही है कि मलबे में किसे जाना चाहिए और क्यों जाना चाहिए?












Click it and Unblock the Notifications