लड़कियां पढ़ाई करने विदेश नहीं जाएंगी, घर पर रहेंगी, ये है तालिबान का असली चेहरा!
तालिबान के मुताबिक, महिलाओं को अपने हिसाब से जीने का कोई अधिकार नहीं है, इसलिए तो उनके सारे अधिकारों को उन्होंने कुचल कर रख दिया है।
तालिबान, 27 अगस्त : अफगानिस्तान में महिलाओं के मानवाधिकारों को कुचल कर रख दिया गया है। तालिबान जो आतंकवाद को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के दायरे में आता है, उसने काबुल में सरकार तो बना ली, लेकिन अभी तक कई देशों ने उसे मान्यता नहीं दी है। स्पूतनिक ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, तालिबान ने लड़कियों (छात्राओं) को पढ़ाई करने के लिए विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

छात्राओं को पढ़ने का अधिकार नहीं:तालिबान
स्पूतनिक ने सूत्रों के हवाले से आगे बताया कि, तालिबान ने छात्राओं को कजाकिस्तान और कतर में अध्ययन के लिए काबुल छोड़ने की अनुमति नहीं दी है। जानकारी के मुताबिक, काबुल से कुछ लड़के और लड़कियां पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहते थे, लेकिन तालिबान नहीं चाहता कि महिलाएं शिक्षित होकर उनकी बराबरी करे। इसलिए उसने लड़कियों को पढ़ाई के लिए बाहर जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

तालिबान की घटिया सोच
देश से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिका समर्थित सरकार के पतन के बाद, तालिबान के नेतृत्व में एक अंतरिम अफगान सरकार सितंबर 2021 में सत्ता में आई। बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान को अफगानिस्तान में अब तक मान्यता नहीं दी है। इसके बावजूद भी वह अपनी अकड़ दिखाता रहता है। पहले तो तालिबान ने देश की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद महिलाओं को घर से बाहर काम पर जाने, पढ़ाई करने पर पाबंदी लगा दी। लड़कियों को छठी कक्षा के बाद शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं है। इतना ही नहीं जितने भी महिला पत्रकार थीं, जो टीवी पर आती थीं, सबको काम से हटा दिया गया।

काबुल में महिलाओं, अफगान लोगों से अत्याचार
इसके अलावा, तालिबान ने सभी महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा ढंकने के लिए मजबूर किया है और महिलाओं को मनोरंजन गतिविधियों में भाग लेने और पुरुषों के साथ पार्कों में जाने की भी अनुमति नहीं है। ये है तालिबान का असली चेहरा जो महिलाओं के प्रति ऐसी सोच रखता है। इस पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका जैसे ताकतवर देशों को विचार करना चाहिए।

महिलाएं को अपने हिसाब से जीने का अधिकार नहीं
तालिबान में महिलाएं को अपने हिसाब से जीने का अधिकार नहीं
तालिबान के मुताबिक, महिलाओं को अपने हिसाब से जीने का कोई अधिकार नहीं है, इसलिए तो उनके सारे अधिकारों को उन्होंने कुचल कर रख दिया है। खबर तो यह भी है कि, तालिबान अफगान नागरिकों को आतंकी बताकर उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं, लोगों को गायब कर दिया जा रहा है। महिलाएं बेचीं जा रही हैं। लड़कियां घुट-घुटकर जिंदगी जीने को मजबूर है।

महिलाएं आत्महत्या कर रही हैं
अफगानिस्तान की एक पूर्व सांसद ने UN को कुछ समय पहले बताया था कि, काबुल में लड़कियां तालिबान के डर से आत्महत्या कर रही हैं। उनका जीवन नरक बन चुका है। महिलाओं को चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। एक तरह से देखा जाए तो तालिबान ने अफगानिस्तान में अराजकता को बढ़ावा दे रहा है। वहां, आतंक के नाम पर मजलूमों को बड़ी बेरहमी से मारा जा रहा है।
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