स्वेज़ नहर में फँसे जहाज़ की वो कहानी, जो अभी ख़त्म नहीं हुई है

एवर गिवेन
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एवर गिवेन

मार्च के अंत में स्वेज़ नहर में फँसे जहाज़ एवर गिवेन के निकलने की ख़ुशी पूरी दुनिया ने मनाई. सभी ने यही सोचा कि इसी के साथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग के रुकावट से जुड़ी ख़बर अब समाप्त हो गई है.

लेकिन सच्चाई ये है कि एवर गिवेन जहाज़ के मालिकों के लिए समस्या अभी समाप्त होने से कोसों दूर है.

इसकी वजह ये है कि मिस्र ने ये फ़ैसला किया है कि वो जहाज़ को नहीं छोड़ेगा, जब तक नुक़सान की भरपाई के लिए उसे एक अरब डॉलर का जुर्माना नहीं दिया जाएगा.

एवर गिवेन नाम का जहाज़ स्वेज़ नहर से तो निकल चुका है, लेकिन फ़िलहाल इसे ग्रेट बिटर लेक में रखा गया है. मिस्र का कहना है कि स्वेज़ नहर में इस जहाज़ के फँसने के कारण उसे बहुत नुक़सान हुआ है.

स्वेज़ नहर अथॉरिटी के अध्यक्ष ओसामा राबी ने मिस्र के सरकारी टेलीविज़न को बताया कि जहाज़ ग्रेट बिटर लेक में ही रहेगा, जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती और हर्जाना नहीं चुकाया जाता.

उन्होंने कहा, "हम जल्द ही समझौते की उम्मीद कर रहे हैं, जैसे ही वे हमें हर्जाना देने पर सहमत हो जाते हैं, जहाज़ को वहाँ से जाने दिया जाएगा."

नुक़सान की भरपाई

ओसामा राबी
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ओसामा राबी

हर्जाने की राशि के बारे में राबी ने अप्रैल की शुरुआत में कहा था कि जहाज़ को निकालने में और स्वेज़ नहर बंद हो जाने से जो नुक़सान हुआ है, उसका आकलन किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि उन्हें लगता है कि हर्जाने की राशि एक अरब अमेरिकी डॉलर या उससे कुछ कम होगी. राबी ने कहा कि ये मिस्र का अधिकार है.

इस राशि में ट्रांज़िट फ़ीस, पानी निकालने के दौरान जल मार्ग को हुए नुक़सान, जहाज़ को निकालने के लिए की गई कोशिशों में आए ख़र्च के साथ-साथ उपकरणों और सामग्री की लागत जोड़ी जाएगी.

एवर गिवेन की मालिकाना हक़ वाली जापानी कंपनी शूई किसेन ने कहा है कि अभी तक उसे हर्जाने के बारे में कोई आधिकारिक दावा नहीं मिला है, लेकिन कंपनी ने ये माना कि चैनल के अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत चल रही है.

ओसामा राबी का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब एवर गिवेन जहाज़ के स्वेज़ नहर में फँसने की वजह जानने के लिए जाँच जारी है.

इसकी शुरुआती वजह तेज़ हवाओं को माना जा रहा है, लेकिन अब शोधकर्ताओं को यह देखना होगा कि क्या कोई तकनीकी या मानवीय ग़लतियाँ थीं. ऐसी बात स्वेज़ नहर अथॉरिटी के अध्यक्ष भी कह चुके हैं.

ओसामा राबी ने कहा, "ख़राब मौसम के कारण स्वेज़ नहर को कभी बंद नहीं किया गया था." उन्होंने इससे भी इनकार किया कि बड़े आकार के कारण जहाज़ फँस गया था. उनका तर्क था कि इससे भी बड़े जहाज़ वहाँ से गुज़रते हैं.

अहमियत

एवर गिवेन
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एवर गिवेन

दुनिया का एक प्रमुख जलमार्ग होने के नाते स्वेज़ नहर की ख़ासी अहमियत है. दुनियाभर के व्यापार का 12 प्रतिशत इसी रास्ते से गुज़रता है. लेकिन पिछले दिनों जहाज़ के फँसने के कारण इसके बड़े आर्थिक प्रभाव हुए और लाखों लोगों को इसका नुक़सान भुगतना पड़ा.

प्रतिदिन 20 लाख बैरल तेल और क़रीब आठ फ़ीसद तरल प्राकृतिक गैस स्वेज़ नहर से होकर गुज़रता है. अगर इनकी आवाजाही रुकती है, तो इसका इनकी क़ीमतों पर बड़ा असर पड़ता है.

इसके अलावा ऐसा माना जा रहा है कि एवर गिवेन के फँसने की वजह से 360 जहाज़ वहाँ रुके हुए थे. इनमें तेल और प्राकृतिक गैस के कंटेनर्स भी शामिल थे.

ओसामा राबी के मुताबिक़ जहाज़ के फँसने के कारण इस व्यापार मार्ग को प्रतिदिन क़रीब डेढ़ करोड़ यूएस डॉलर का नुक़सान हो रहा था.

स्वेज़ नहर मिस्र की कमाई का प्रमुख स्रोत है. क्रेडिट एजेंसी मूडीज़ के मुताबिक़ कोरोना महामारी से पहले इस मार्ग की कमाई का योगदान देश के जीडीपी का दो फ़ीसद थी.

क्या हुआ था

स्वेज़ नहर
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स्वेज़ नहर

23 मार्च को एवर गिवेन नाम का ये जहाज़ स्वेज़ नहर से गुज़रते समय रेत में फँस गया था.

काफ़ी मशक़्क़त के बाद तीन अप्रैल को इस जहाज़ को वहाँ से निकाला जा सका था.

400 मीटर लंबे और 59 मीटर चौड़े या फ़ुटबॉल के चार मैदान जितने बड़े इस जहाज़ को खींचने के लिए आठ नावों के अलावा रेत की खुदाई करने वाली मशीनें भी लगाई गई थी.

फँसने वाला जहाज़ चीन से नीदरलैंड्स के बंदरगाह शहर रोटेरडम जा रहा था. पनामा में रजिस्टर्ड यह जहाज़ उत्तर में भूमध्यसागर की ओर जाते समय स्वेज़ नहर से होकर गुज़र रहा था.

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