संक्रमित सतहों से कोरोना होने का जोखिम कम, CDC ने बताया सिर्फ इतनी है संभावना
नई दिल्ली: कई शोध के बाद अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा है कि संक्रमित सतहों या चीजों को छूने से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा नहीं है। अमेरिका की स्वास्थ्य संबंधी इस सर्वोच्च संस्था ने इस आधार पर घरों या बाहरी जगहों की सतहों की सफाई और उसे डिसइंफेक्ट करने की गाइडलाइन को अपडेट कर दिया है। सीडीसी के मुताबिक संक्रिमत सतहों के संपर्क में आने से कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका 10,000 में से सिर्फ 1 है। सीडीसी की नई गाइडलाइंस का असर दुनियाभर में कोविड मैनेजमेंट पर पड़ना लाजिमी है, क्योंकि अभी सतहों को डिसइंफेक्ट करने के लिए बहुत ही ज्यादा डिसइंफेक्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है और कोविड के खिलाफ जंग में इसपर बहुत ज्यादा संसाधन इस्तेमाल हो रहा है।

संक्रमित सतहों से कोरोना होने का जोखिम कम-सीडीसी
सीडीसी के डायरेक्टर डॉक्टर रोशेल वेलेंस्ककी ने व्हाइट हाउस की ब्रिफिंग में बताया कि, 'संक्रमित सतहों या चीजों पर मौजूद वायरस के संपर्क में आकर लोग उससे प्रभावित हो सकते हैं, जिससे कि कोविड-19 हो सकता है.......हालांकि, तथ्यों से पता चलता है कि इस तरह से इंफेक्शन के ट्रांसमिशन का खतरा असल में कम है।' अपनी ताजा गाइडलाइन में सीडीसी ने कहा है कि संक्रमित सतहों से कोरोना हो सकता है, लेकिन 'सतहों से होने वाले कोविड-19 का प्रसार इसका मुख्य जरिया नहीं है।' अमेरिकी हेल्थ एजेंसी के मुताबिक सांस संबंधी इस वायरस का फैलाव सीधे संपर्क में आने से, ड्रॉपलेट से या हवा के जरिए होने की संभावना ज्यादा है। एजेंसियों के मुताबिक सीडीसी ने कहा है कि सतहों की बहुत ज्यादा सफाई कुछ खास स्थितियों में ही आवश्यक है। सामान्य तौर पर साबुन या डिटरजेंट से सतहों की सफाई संक्रमण के खतरों को कम करने के लिए काफी है। नई गाइडलाइंस के लिए सीडीसी ने एक अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित स्टडी का हवाला दिया है, जिसने पिछले एक साल में रिसर्च किया है।

सामान्य तौर पर साबुन या डिटर्जेंट से सफाई भी कारगर-सीडीसी
सीडीसी के मुताबिक घरों के अंदर की सतहों मसलन, ग्लास, स्टील या प्लास्टिक पर कोविड-19 तीन दिनों से ज्यादा नहीं टिकता है। सीडीसी ने बताया है कि अस्पतालों के अलावा बाकी जगहों पर यदि कोई 24 घंटे के अंदर कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया है ,तभी डीप क्लीनिंग की आवश्यकता है। नहीं तो साबुन और डिटरजेंट से सफाई ही काफी है। एजेंसियों के मुताबिक इसमें कहा गया है, 'रोजाना साबुन या डिटर्जेंट से एक बार की रुटीन सफाई ही प्रभावी है और यह सतहों से वायरस को काफी हद तक खत्म कर सकता है।' यही नहीं सतहों से होने वाले संक्रमण को सही तरीके से लगातार मास्क पहनकर भी रोका जा सकता है।

संक्रमित सतहों से होने वाले संक्रमण को लेकर पहले क्या कहा था?
जब पिछले साल कोरोना वायरस महामारी फैली थी, तब अनेकों एक्सपर्ट ने चेतावनी दी थी कि यह संक्रमित सतहों से भी तेजी से फैल सकता है। शुरुआती रिसर्च के आधार पर सुझाव दिया गया था कि प्लास्टिक और स्टील जैसी सतहों पर यह वायरस कई दिनों तक जिंदा रह सकता है। इसी के बाद सीडीसी ने इसको लेकर सख्त चेतावनी जारी की थी। एजेंसी ने कहा था कि संक्रमित सतह को छूने के बाद चेहरा, आंख या मुंह छूने से कोरोना फैल सकता है। इसके बाद तमाम दुकानों, दफ्तरों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में डीप क्लीनिंग होने लगी थी। पिछले साल सीडीसी ने स्पष्ट किया था कि वायरस सिर्फ सतहों के जरिए ही नहीं फैलता है। लेकिन, उसने तब भी कहा था कि सतहों को लगातार डिसइंफेक्ट करते रहना होगा। लेकिन, अब इसने उतनी ज्यादा डीप क्लीनिंग की सलाह नहीं दी है। कई वैज्ञानिक और शोधकर्ता सीडीसी को सलाह दे रहे थे कि वह अपनी गाइडलाइंस को अपडेट करे, ताकि घर के बाहर और अंदर जो सतहों की डीप क्लीनिंग में खर्च हो रहा है, उसे कोविड प्रोटोकॉल की दूसरी जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल किया जा सके।












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