#FloridaShooting: मिलिए बच्चों की जान बचाने वाले फ्लोरिडा के इन हीरो से
बुधवार को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थ्िके मरजरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल में बुधवार को हुई घटना वाकई दिल दहलाने वाली थी। यहां पर 19 वर्ष के एक छात्र निकोलस क्रूज ने अपनी बंदूक से 17 मासूमों की जान ले ली तो कई लोगों को घायल कर दिया।
पार्कलैंड। बुधवार को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थ्िके मरजरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल में बुधवार को हुई घटना वाकई दिल दहलाने वाली थी। यहां पर 19 वर्ष के एक छात्र निकोलस क्रूज ने अपनी बंदूक से 17 मासूमों की जान ले ली तो कई लोगों को घायल कर दिया। इस घटना से पहले साल 2012 में कनैक्टिकट के न्यूटॉउन में भी एक स्कूल में इसी तरह की घटना हुई थी। इस घटना में करीब 20 बच्चों की मौत हो गई थी। लेकिन उस घटना की तरह ही जब फ्लोरिडा के स्कूल में फायरिंग हुई तो यहां पर भी कई टीचर्स और कोच के अलावा जूनियर स्टूडेंट्स बच्चों के लिए भगवान बनकर आए और कई लोगों की जान बचाई। मिलिए फ्लोरिडा के कुछ ऐसे ही हीरो से जिन्होंने अपनी जान की परवाह भी नहीं की और कई मासूमों की जान बचाई।

भारतीय टीचर शांति विश्वनाथन
स्कूल में फायर अलार्म बजने के बावजूद मैथ्स टीचर शांति विश्वनाथन ने छात्रों को क्लासरूम से बाहर नहीं निकलने दिया। उन्होंने छात्रों को रेस्क्यू करने आई स्वैट टीम के लिए भी दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया। स्कूल द्वारा निष्कासित 19 वर्षीय पूर्व छात्र निकोलस क्रूज ने स्कूल में घुसकर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस गोलीबारी में 17 मासूमों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। अमेरिकी पुलिस और स्वैट टीम ने स्कूल को सीज कर निकोलस को गिरफ्तार कर छात्रों को बचाया। स्कूल के अंदर मौजूद भारतीय शिक्षक शांति विश्वनाथन की सूझबूझ ने भी कई छात्रों की जान बचाई।स्कूल में आरोपी निकोलस ने फायर अलॉर्म बजा दिए थे ताकि बच्चे इसे सुनकर अपने क्लासरूम से बाहर आएं और वो उनपर हमला कर सके। फायर अलॉर्म के बजने के बावजूद शांति ने छात्रों को क्लास से निकलने नहीं दिया। उन्होंने क्लास का दरवाजा बंद कर छात्रों को एक कोने में छिपने के लिए कहा। उन्होंने सभी खिड़कियों को पेपर से ढंक दिया ताकि किसी को उनके अंदर होने का शक न हो। स्वैट टीम के आने के बावजूद उन्होंने कमरे का दरवाजा नहीं खोला।

असिस्टेंट फुटबॉल कोच एरॉन फीस
37 वर्ष के फुटबॉल कोच एरॉन फीस ने तो बच्चों को गोलियों से बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की। इस हमले में उनकी मौत हो गई। एरॉन स्कूल में असिस्टेंट फुटबॉल कोच के तौर पर थे और जिस समय निकोलस ने गोलिंया चलानी शुरू कीं, वह खुद बच्चों के सामने आ गए। एरॉन खुद इस स्कूल के पूर्व छात्र रह चुके थे और साल 1999 में इस स्कूल से ग्रेजुएट हुए थे। सर्जरी के समय एरॉन की मौत हो गई। स्कूल की प्रवक्ता डिनिस लेग्टियो ने बताया कि एरॉन को गोली लगी थी और जिस समय उनकी सर्जरी हो रही थी, उन्होंने दम तोड़ दिया। डिनिस के मुताबिक जिस तरह से एरॉन ने अपनी जिंदगी जी, उनकी मौत भी वैसी ही हुई। वह काफी दयालु इंसान थे और एक हीरो तरह की वह मरे हैं। एक स्टूडेंट क्रिस मैकेना ने एरॉन को बताया था कि उसने निकोलस को देखा है। जब एरॉन को यह पता लगा तो वह स्कूल के बाहर स्थिति का अंदाजा लेने के लिए गए। एरॉन ने मैकेना को ड्रॉप किया और निकोलस के सामने चले गए।

टीचर स्कॉट बीगल
35 वर्षीय स्कॉट बीगल इस स्कूल में टीचर थे और बच्चों को जियोग्राफी पढ़ाते थे। बीगल ने अपनी क्लासरूम का दरवाजा खोल दिया था ताकि बच्चे क्लास में आकर छिप सकें। इसके बाद जब वह क्लासरूम का दरवाज बंद करने की कोशिशें कर रहे थे, उसी समय निकोलस वहां आ गया और उसने उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। स्कॉट ने उसी समय दम तोड़ दिया। एक स्टूडेंट केलेसी फ्रेंड ने बताया कि उन्होंने दरवाजा खोला और हमें अंदर आने दिया। मुझे लगा कि वह मेरे पीछे हैं लेकिन वह नहीं थे। उन्होंने दरवाजा खोला और वह उसे फिर से बंद करने लगे ताकि हमारी जान बची रहे। फ्रेंड के मुताबिक उन्होंने बच्चों की जान तो बचाई लेकिन अपनी जान गंवा दी।

जूनियर ने बच्चों को निकोलस की तरफ जाने से रोका
इस घटना में एक जूनियर ऐसा भी था जिसका कोई नाम नहीं है लेकिन उसने उन बच्चों की जान बचाई जो अनजाने में निकोलस की तरफ भाग रहे थे। एक स्टूडेंट डेविड हॉग ने बताया कि वह और उसके कुछ क्लासमेट्स ने दूसरे छात्रों के साथ निकोलस की तरफ भागना शुरू कर दिया था क्योंकि उस समय तक फायर अलार्म बज चुका था। हॉग ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और कहा कि एक जूनियर ने उन्हें उस तरफ जाने से रोक दिया। हॉग के मुताबिक उस जूनियर ने उन्हें दूसरी तरफ भागने को कहा ताकि वह सुरक्षित रहे सकें। हॉग ने कहा कि उस जूनियर ने करीब 40 लोगों की जान बचाई है।

बच्चों को अलमारी में बंद किया
स्कूल की एक टीचर मेलिसा फालकोव्स्की ने 19 बच्चों को एक अलमारी में बंद कर दिया था। मेलिसा ने बताया कि स्कूल ने अपने स्टॉफ को इस तरह की घटना से बचाने के लिए पूरी ट्रेनिंग दी है। जब उन्हें स्कूल में फायरिंग की घटना का पता लगा तो वह तुरंत एक्टिव मोड में आ गईं। उन्होंने 19 बच्चों को अपने साथ अलमारी में बंद कर लिया। मेलिसा के मुताबिक यह घटना उनके लिए अब तक का सबसे बुरा सपना है। 30 मिनट तक मेलिसा बच्चों के साथ अलमारी में बंद रहीं जब तक स्वैट टीम के ऑफिसर्स उस कमरे में नहीं आ गए। इसी तरह से कुछ टीचर्स ने छात्रों की जान बचाने के लिए बैरीकेड बना लिया था। जिम गार्ड ने बताया कि उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया, कमरे की लाइट ऑफ कर दीं और स्टूडेंट्स को कमरे में ही छिपने के लिए कहा।
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