अफगानिस्तान का वो प्रांत जहां कदम रखने से भी डरते हैं तालिबानी, आज तक नहीं कर पाए कब्जा
काबुल, 17 अगस्त। काबुल के साथ-साथ तालिबान ने अफगानिस्तान के कई शहरों और प्रांतों को अपने कब्जे में ले लिया है। इस बीच अफगान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी भी तालिबान के काबुल में प्रवेश करते ही देश छोड़कर भाग खड़े हुए। अमेरिकी सेना के अफगान छोड़ते ही तालिबान ने तेजी से अन्य शहरों पर कब्जा करना शुरू किया और कुछ सप्ताह में काबुल तक पहुंच गया। तालिबान भले ही अपनी जीत का जश्न मना रहा हो लेकिन अफगानिस्तान का एक प्रांत ऐसा भी है, जहां आज तक वह कब्जा नहीं जमा सका है।

नॉर्दन अलायंस के कमांडर का गढ़
यह इलाका है नॉर्दन अलायंस के पूर्व कमांडर अहमद शाह मसूद का गढ़ पंजशीर घाटी। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक तरफ जहां तालिबान देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर चुका है वहीं, काबुल के पास स्थित पंजशीर पर चढ़ाई करने से आज भी खूंखार आतंकी संगठन हजार बार सोचता है। 90 के दशक में जब तालिबान ने अफगान पर कब्जा किया था उस समय भी पंजशीर पर वह अपनी हुकूमत थोपने में कामयाब नहीं हो पाया था।

आज तक कब्जा नहीं जमा सका तालिबान
अफगान में पंजशीर ही एक ऐसा इलाका है जहां के लोग तालिबान के आतंक के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किए हुए हैं। अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी पंजशीर से ही ताल्लुक रखते हैं, काबुल में तालिबान के प्रवेश के बाद से वह यहीं रह रहे हैं। पंजशीर के खौफ का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 से लेकर 2021 तक इसपर कभी भी तालिबान का कब्जा नहीं हो सका।
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अमेरिकी सेना और सोवियत संघ की भी नहीं हुई हिम्मत
इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना और सोवियत संघ भी कभी पंजशीर पर जमीनी कार्रवाई नहीं कर सका, हालांकि कई बार हवाई हमले से यहां के लोगों के इरादे को कमजोर करनी की कोशिश की गई है। यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि दुश्मन कभी भी जमीन पर से हमला करने के बारे में सोच ही नहीं सकता। पंजशीर पहुंचे उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान को खुली चुनौती दी है, उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में तालिबान आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे।

अमरुल्लाह सालेह बोले- तालिबान के सामने नहीं झुकूंगा
अमरुल्लाह सालेह ने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'मैं अपने नायक अहमद शाह मसूद, कमांडर, लीजेंड और गाइड की आत्मा और विरासत के साथ कभी विश्वासघात नहीं करूंगा। मैं उन लाखों लोगों को निराश नहीं करूंगा जिन्होंने मेरी बात सुनी। मैं तालिबान के साथ कभी भी एक छत के नीचे नहीं रहूंगा। कभी नहीं।' पंजशीर से अमरुल्लाह सालेह की एक फोटो भी सामने आई थी जिसमें वह कुछ स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

तालिबान के लिए सिरदर्द बन सकता है पंजशीर
माना जा रहा है कि अमरुल्लाह सालेह यहां से तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। तालिबान के जन्म से ही नॉर्दन अलायंस ने इस आतंकी संगठन का विरोध किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अब अमरुल्लाह सालेह अपने कमांडर अहमद शाह मसूद की जगह ले सकते हैं। एक तरफ जहां अफगानिस्तान के ज्यादातर इलाकों पर तालिबान आसानी से कब्जा जमाता गया वहीं, पंजशीर आने वाले समय में उसके लिए सिरदर्द बन सकता है।
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