पूर्व अफगान अधिकारियों के अकाउंट खंगालने की कोशिश में था तालिबान, Google ने दिया जोर का झटका
गुगल ने पूर्व अफगान सरकार और अधिकारियों को जीमेल अकाउंट को अस्थाई बंद कर दिया है। तालिबान गुगल अकाउंट को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था।
काबुल, सितंबर 04: विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन गुगल ने आतंकी संगठन तालिबान को बड़ा झटका दिया है। गुगल ने अफगानिस्तान सरकार के ईमेल अकाउंट्स को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान अफगानिस्तान सरकार के गुगल अकाउंट का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही थी, जिसे गुगल ने रोक दिया है।
Recommended Video

अफगान सरकार के अकाउंट्स बंद
गुगल ने कुछ अफगान सरकारी ईमेल खातों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। गुगल के मुताबिक, तालिबान के आतंकी अफगान सरकार के पूर्व अधिकारियों के ईमेल अकाउंट को खोलने की कोशिश कर रही थी, ताकि सीक्रेट जानकारियां जुटाई जा सके। लेकिन, इससे पहले की तालिबान के आतंकी पूर्व अधिकारियों के अकाउंट को खोल पाते, गुगल ने अस्थाई तौर पर सभी अकाउंट्स को बंद कर दिया है। गुगल ने शुक्रवार को कहा कि वह "संबंधित गुगल अकाउंट्स को फिलहाल अस्थाई तौर पर बंद कर रहा है और कई खातों को बंद किया जा रहा है,"। हालांकि, गुगल की तरफ से अभी तक ये साफ नहीं किया गया है कि खातों को क्या स्थाई तौर पर भी बंद किया जाएगा?

अकाउंट बंद करने पर गुगल का बयान
गुगल के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि, "विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर हम अफगानिस्तान की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं। हम संबंधित खातों को सुरक्षित करने के लिए अस्थायी कार्रवाई कर रहे हैं, क्योंकि उन अकाउंट्स पर लगातार कई जानकारियां आ रही हैं।" मामले से परिचित व्यक्ति ने आउटलेट को बताया कि संबंधित खातों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, क्योंकि जानकारी का इस्तेमाल पूर्व सरकारी अधिकारियों को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है, जिससे उन्हें नुकसान होने की आशंका है। रॉयटर्स के अनुसार, स्थानीय सरकारों और राष्ट्रपति प्रोटोकॉल के कार्यालय के साथ, करीब दो दर्जन अधिकारी, जिनमें से कुछ वित्त, उद्योग, उच्च शिक्षा और खान मंत्रालयों में हैं, वो कम्यूनिकेशन के लिए गुगल मेल का इस्तेमाल कर रहे थे और उनके खातों के जरिए तालिबान उन्हें ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था।

जानकारियां जुटा रहा था तालिबान
अफगानिस्तान सरकार के एक पूर्व अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें तालिबान की तरफ से जुलाई के अंत में कहा गया था कि वो सभी जानकारियों को बचाकर रखे, ताकि तालिबान उन जानकारियों को इकट्ठा कर सके।'' अफगान सरकार के पूर्व अधिकारी ने कहा कि 'अगर मैंने तालिबान का कहा माना होता तो काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान उन सभी दस्तावेजों को हासिल कर सकता था, जिसे गुप्त रखा गया है और जहां तक तालिबान को नहीं पहुंचना चाहिए।' अफगान सरकार के पूर्व अधिकारियों को डर है कि काबुल पर कब्जे के बाद अलग अलग तरह से तालिबान के आतंकवादी उनतक पहुंचने की कोशिश में हैं, और उन्हें तालिबान से खतरा है।

सरकार बनाने की तैयारी
आपको बता दें कि अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के दो हफ्ते बाद शुक्रवार को तालिबान देश में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों ने कहा कि तालिबान कभी भी सरकार बनाने का ऐलान कर सकता है। 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और रिपोर्ट है कि आज तालिबान की नई सरकार का ऐलान कर दिया जाएगा। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि तालिबान आज सरकार तो बना लेगा, लेकिन वो सरकार चलाएगा कैसे? सवाल ये भी उठ रहे हैं कि सरकार चलाने में नाकाबिल साबित होने पर क्या तालिबान बंदूक दिखाकर ही लोगों को खामोश करेगा?












Click it and Unblock the Notifications