तालिबान आज बनाएगा सरकार, जानिए कैसा होगा अफगानिस्तान में सरकार का मॉडल, कौन होगा सर्वोच्च नेता?
तालिबान आज अफगानिस्तान में नई सरकार का ऐलान करेगा। जानिए अफगानिस्तान में नई इस्लामिक सरकार का मॉडल क्या होगा?
काबुल, सितंबर 03: अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के दो हफ्ते बाद शुक्रवार को तालिबान देश में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार की नमाज के बाद तालिबान सरकार बनाएगा। 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और रिपोर्ट है कि आज तालिबान की नई सरकार का ऐलान कर दिया जाएगा। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि तालिबान आज सरकार तो बना लेगा, लेकिन वो सरकार चलाएगा कैसे? सवाल ये भी उठ रहे हैं कि सरकार चलाने में नाकाबिल साबित होने पर क्या तालिबान बंदूक दिखाकर ही लोगों को खामोश करेगा?

आज सरकार बनाएगा तालिबान
15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले लिया था और 31 अगस्त को इस्लामिक आतंकवादी समूह ने अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद अपनी जीत की जमकर खुशी मनाई थी। इसके साथ ही तालिबान ने दशकों के युद्ध के बाद अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा लाने की अपनी प्रतिज्ञा दोहराई है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान, जिसने 15 अगस्त को अमेरिकी सेना की वापसी से पहले देश पर नियंत्रण कर लिया था, अब एक ऐसे राष्ट्र पर शासन करने की उम्मीद कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय सहायता पर बहुत अधिक निर्भर है और एक बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच फंसा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय दाताओं और निवेशकों की नजर में नई सरकार की वैधता अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि देश सूखे और एक संघर्ष की तबाही से जूझ रहा है. जिसने अनुमानित 2 लाख 40 हजार अफगानों की जान ले ली।
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वादे पूरे करेगा तालिबान?
तालिबान ने किसी भी विदेशी या अफगानों के लिए देश से बाहर निकलने के लिए सुरक्षित मार्ग की इजाजत देने का वादा किया है, जो बड़े पैमाने पर एयरलिफ्ट से पीछे रह गए हैं। लेकिन काबुल हवाईअड्डा अभी भी बंद होने के कारण कई लोग जमीनी रास्ते से भागकर पड़ोसी देशों में जाने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान ने अफगान रिफ्यूजी को अपनी तरफ आता देख चमन बॉर्डर पूरी तरह से बंद कर दिया है। कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने कहा कि खाड़ी राज्य तालिबान के साथ बात कर रहा है, और काबुल हवाई अड्डे पर परिचालन फिर से शुरू करने के लिए तकनीकी सहायता के बारे में तुर्की के साथ काम कर रहा है, जिससे मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद होगी। दोहा में कतर के मंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक रैब ने कहा कि वह क्षेत्रीय देशों के साथ बात करेंगे कि, अफगानिस्तान छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए तीसरे देशों के माध्यम से मार्ग कैसे सुरक्षित किया जाए।

तालिबानी सरकार का मॉडल
रिपोर्ट के मुकाबिक, तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा अब अफगानिस्तान का सर्वोच्च नेता बनाया जाएगा, जिसेके पास नई गवर्निंग काउंसिल पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार होगा। उसके नीचे एक राष्ट्रपति होगा। माना जा रहा है कि तालिबान अफगानिस्तान में उसी तरह से सरकार का रूप बनाना चाहता है, जिस तरह की सरकार ईरान में चलती है। वहीं, माना जा रहा है कि मुल्ला बरादर को तालिबान का अगला राष्ट्रपति बनाया जाएगा, जो देश का शासन चलाएगा। लेकिन, अंतिम फैसला लेने का हक अखुंदजादा के पास ही होगा। ईरान में सरकार का मॉडल ये है कि चुनाव में कौन खड़ा होगा, इसका फैसला एक गवर्निंग बॉडी तय करती है। लेकिन, अफगानिस्तान में अभी तक पता नहीं चल पाया है कि सरकार का मॉडल चुनाव के आधार पर होगा, या फिर सबकुछ तालिबान ही तय करेगा।

कौन है हैबतुल्लाह अखुंदजादा ?
हैबतुल्लाह अखुनज़ादा अभी तालिबान के सबसे बड़े नेताओं में से एक माना जाता है। उसे "वफादारों के नेता" के तौर पर भी तालिबान के लोग पुकारते हैं। इस वक्त हैबतुल्लाह अखुनज़ादा ही तालिबान का सबसे बड़ा नेता है और उसे इस्लाम का कानून जानकार माना जाता है, जो तालिबान के हर फैसले पर अंतिम अधिकार रखता है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक हैबतुल्लाह अखुनज़ादा के हाथ में ही तालिबान के राजनीति, धार्मिक और दूसरे मामलों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार है। अखुनजादा ने तालिबान के सर्वोच्च नेता का पदभार तब संभाला था, जब उसके पूर्ववर्ती अख्तर मंसूर को अमेरिका ने 2016 में अफगान-पाकिस्तान सीमा के पास ड्रोन से उड़ा दिया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक हैबतुल्लाह अखुनज़ादा की उम्र करीब 60 साल है। रॉयटर्स को हैबतुल्लाह अखुनज़ादा के कुछ करीबियों ने बताया कि मई 2016 से पहले तक हैबतुल्लाह अखुनज़ादा दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान के एक कस्बे कुचलक के एक मस्जिद में पढ़ाया करता था और धार्मिक उपदेश दिया करता था। हालांकि, अखुंदज़ादा का ठिकाना कहां है, तालिबान के टॉप लीडर्स के अलावा किसी को नहीं पता है।

अफगानिस्तान में आर्थिक संकट
तालिबान के सामने सरकार बनाते ही सबसे बड़ा संकट देश को भयंकर सूखे और युद्ध के उथल-पुथल के बीच लाखों लोगों को भूख से बचाने का होगा। यूनिसेफ अपनी रिपोर्ट में कह चुका है कि अफगानिस्तान के करीब एक करोड़ बच्चों को फौरन मानवीय मदद चाहिए। अफगानिस्तान को पैसे की सख्त जरूरत है, और तालिबान को अमेरिका द्वारा सीज किए गये लगभग 10 बिलियन डॉलर की संपत्ति तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। नए तालिबान द्वारा नियुक्त केंद्रीय बैंक प्रमुख ने बैंकों को आश्वस्त करने की कोशिश की है, कि तालिबान वित्तीण प्रणाली को सुधारने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तालिबान वित्तीय प्रणाली को कैसे ठीक करेगा, ये उसने नहीं बताया! इन सबके बाद सवाल यही उठता है कि तालिबान आज सरकार तो बना लेगा, लेकिन सरकार चलाएगा कैसे?












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