तालिबान के नये शिक्षा मंत्री ने कहा, पीएचडी-मास्टर्स करना जरूरी नहीं, मुल्ला सबसे ज्यादा महान

तालिबान के नये शिक्षा मंत्री ने कहा है कि एमए-पीएचडी करना जरूरी नहीं है, मुल्ला सबसे ज्यादा महान होते हैं।

काबुल, सितंबर 08: तालिबान के नये शिक्षा मंत्री ने पढ़ाई को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अफगानिस्तान के बच्चों का भविष्य कैसा होने वाला है। तालिबान के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि पढ़ाई-लिखाई जरूरी नहीं है, क्योंकि मुल्ला हर किसी से ऊपर होते हैं।

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    तालिबान के नये शिक्षा मंत्री का ज्ञान

    तालिबान के नये शिक्षा मंत्री का ज्ञान

    तालिबान के शिक्षा मंत्री शेख मौलवी नूरुल्ला मुनीर ने कहा है कि पीएचडी और मास्टर डिग्री जरूरी नहीं हैं, मुल्ला वैसे ही सबसे ज्यादा महान होते हैं। मौलवी नूरुल्ला मुनीर ने कहा कि, मुल्लाओं के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी वो सबसे ज्यादा महान हैं। मौलवी नूरुल्ला मुनीर ने कहा कि, ''आप देखते हैं कि मुल्ला और तालिबान के जो नेता सत्ता में आए हैं, उनके पास कोई पीएचडी डिग्री नहीं है, उनके पास कोई मास्टर्स डिग्री नहीं है, उनके पास हाईस्कूल की भी डिग्री नहीं है, लेकिन फिर भी वो सबसे महान हैं'' आपको बता दें कि तालिबान का नया शिक्षा मंत्री के पास कोई डिग्री नहीं है और उसने मदरसे से पढ़ाई की है, जहां उसे कट्टरपंथी बनाया गया और पश्चिमी शिक्षा के खिलाफ भड़काया गया। हालांकि, ये अलग बात है कि पश्चिमी देशों द्वारा बनाए गये हथियार और टेक्नोलॉजी पर ही तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है। क्योंकि तालिबान ने अभी तक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ब्लेड तक का निर्माण नहीं किया है, लेकिन पश्चिमी देशों के द्वारा बनाए गये बमों से हजारों मासूमों को उड़ा चुका है।

    तालिबान की मोस्ट वांटेड सरकार

    तालिबान की मोस्ट वांटेड सरकार

    मंगलवार को तालिबान ने मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नेतृत्व वाली एक कठोर इस्लामिक अंतरिम सरकार का ऐलान किया है, जिसमें तमाम छंटे हुए वैश्विक आतंकवादी भरे पड़े हैं। जिसमें आंतरिक मंत्री के रूप में खूंखार हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख और 50 लाख डॉलर का इनामी आतंकवादी सिराजुद्दीन हक्कानी भी शामिल है''। तालिबान के शक्तिशाली निर्णय लेने वाले निकाय 'रहबारी शूरा' के प्रमुख मुल्ला हसन कार्यवाहक प्रधान मंत्री बनाया गया है, जबकि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर "नई इस्लामी सरकार" में उसका डिप्टी होगा। आपको बता दें कि पिछले महीने 15 तारीख को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था और उसके बाद अब जाकर तालिबान ने अंतरिम सरकार के गठन का ऐलान किया है। हालांकि, तालिबान ने पहले कहा था कि वो एक समावेशी सरका का गठन करेगा, लेकिन तालिबान अपने कहे से साफ पलट गया और सरकार में आतंकवादियों के अलावा कोई नहीं है।

    कैसी है तालिबान की सरकार

    कैसी है तालिबान की सरकार

    तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए अंतरिम सरकार की घोषणा की है, जिसमें किसी महिला को स्थान नहीं दिया गया है। वहीं, तालिबान ने अपने सभी खतरनाक आतंकियों को अपनी सरकार में शामिल किया है। तालिबान सरकार का गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी को बनाया गया है, जिसपर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम रखा हुआ है। हक्कानी नेटवर्क पर दर्जनों बम धमाके करने और सैकड़ों मासूम लोगों को बम से उड़ाने का आरोप है। तालिबान की सरकार में ज्यादातर नेता पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि तालिबान आखिर अपनी सरकार को कैसे चलाएगा, क्योंकि अफगानिस्तान के बजट का 80 फीसदी हिस्सा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के मदद से आता है और अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान को पैसे देने पर रोक लगा दी है। अमेरिका पहले ही करीब 10 अरब डॉलर को सीज कर चुका है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि तालिबान अफगानिस्तान में किस तरह की सरकार चलाता है।

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