जंग में गया तो तालिबान को मसल कर रख देगा पाकिस्तान! जानिए 2024 में अफगानिस्तान की सैन्य शक्ति कितनी है
Taliban Military Power: अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक ने दुनिया में एक और युद्ध की आशंका बना दी है और दोनों देशों के बीच अभी जिस स्तर के तनावपूर्ण हालात हैं, उसे देखकर आशंका है, कि दोनों देश युद्ध में फंस सकते हैं।
पाकिस्तानी एयरफोर्स ने तहरीक-ए-तालिबान (TTP) को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर दो एयरस्ट्राइक किए हैं, जिसके बाद तालिबान ने भी पाकिस्तानी सीमा पर भीषण गोलाबारी कर जवाबी कार्रवाई की है। लेकिन, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने धमकी देते हुए कहा है, कि अगर जंग छिड़ गई, तो उसका अंजाम क्या होगा, वो पाकिस्तान सोच भी नहीं सकता है।

वहीं, अमेरिका ने दोनों ही देशों से शांति बरतने की अपील की है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि पाकिस्तानी एयरफोर्स अभी और भी टीटीपी के ठिकानों पर अफगानिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक कर सकती है, लिहाजा युद्ध भड़कने की आशंका प्रबल हो गई है।
ऐसी स्थिति में जानना जरूरी हो जाता है, कि क्या तालिबान के पास पाकिस्तान से लड़ने की क्षमता है। आखिर तालिबान शासित अफगानिस्तान के पास कितने हथियार, गोला बारूद, हेलीकॉप्टर्स, फाइटर जेट्स हैं, जिनसे वो पाकिस्तान से मुकाबला कर सकता है? आइये तालिबान के सैन्य ताकत को जानते हैं।
तालिबान की सैन्य ताकत कितनी है?
अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से निकलते वक्त अमेरिकी सेना ने करोड़ों डॉलर के हथियार अफगानिस्तान में ही छो़ड दिए, जो तालिबान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। पहले पाकिस्तान इस फिराक में था, कि वो इन अमेरिकी हथियारों को तालिबान से ले लेगा, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान को भाव नहीं दिया।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने करोड़ों के हथियार जरूर छोड़े हैं, लेकिन ज्यादातर हथियारों को अमेरिकी सैनिकों ने खराब कर दिया था और तालिबान उन हथियारों को ठीक करने की कोशिश में जुटा हुआ है। अगर अमेरिकी हथियार ठीक हो जाते हैं, तो तालिबान एक मजबूत सेना का निर्माण करने में कामयाब हो जाएगा। लेकिन, फिलहाल हकीकत अलग है।
अमेरिकी सेना ने भारी संख्या में छोटे हथियार, बख्तरबंद वाहन, फाइटर जेट्स और पश्चिमी देशों में बने हथियारों का खजाना तालिबान को सौंप दिया है। अब फिर फरवरी 2022 में तालिबान ने अफगानिस्तान में नई सेना के गठन का निर्माण कर दिया और सेना में 1 लाख 10 हजार सैनिकों की भर्ती करने की घोषणा की, जो अभी चल रही है।
ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट में अफगानस्तान की सेना को 145 देशों में 115वें स्थान पर रखा गया है।
तालिबान शासित अफगानिस्तान में ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट के मुताबिक, 80 हजार सैनिकों के साथ 80 हजार पैरा-मिलिट्री फोर्स भी हैं। लेकिन, अफगानिस्तान के पास एक भी एयरफोर्स और नौसेना के सैनिक नहीं हैं। अफगानिस्तान की सीमा किसी समुद्र से नहीं लगती है, जिससे समझा जा सकता है, कि उसके पास नौसैनिक क्यों नहीं हैं।

तालिबान के पास वायुशक्ति नहीं
हालांकि, वायुसैनिक नहीं होने के बाद भी अफगानिस्तान के पास 17 एयरक्राफ्ट हैं, जो अमेरिका की तरफ से पुराने अफगान एयरफोर्स को या तो गिफ्ट में मिले थे, या फिर अमेरिकी सैनिक छोड़कर गये थे, लेकिन उनमें से उड़ान भरने लायक सिर्फ 3 ही एयरक्राफ्ट हैं।
लेकिन, तालिबान के पास एक भी फाइटर जेट नहीं हैं, जबकि 2 अटैक हेलीकॉप्टर हैं, लेकिन ना ट्रांसपोर्ट विमान हैं, ना ट्रेनर विमान हैं, ना स्पेशल मिशन विमान हैं और ना ही टैंकर फ्लीट या हेलीकॉप्टर हैं। यानि, तालिबान के पास वायुशक्ति नहीं है।
ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के पास एक भी टैंक नहीं हैं, जबकि सैन्य गाड़ियों की संख्या 6 हजार 555 हैं, जिनमें से 2294 युद्ध के लिए तैयार हैं। इन सैन्य गाड़ियों को अमेरिकी सैनिकों ने छोड़ा था। लेकिन, इसके अलावा अफगान सेना के पास एक भी आर्टिलरी तोप, सेल्फ प्रोपेल्ड तोप या फिर रॉकेट फोर्स नहीं है।
यानि, आमने-सामने की लड़ाई की स्थिति में पाकिस्तान के पास ठहरना तालिबान के लिए असंभव जैसा है, लेकिन तालिबान के लड़ाके पहाड़ों में छिपकर लड़ाई करने में माहिर हैं और इस बात की संभावना नहीं है, कि पाकिस्तान तालिबान से लड़ने के लिए पहाड़ों में जाएगा। युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान सरहदी इलाकों में ही तालिबान से भिड़ने की कोशिश करेगा, क्योंकि पाकिस्तान को तालिबान की सैन्य ताकत के बारे में काफी अच्छे से पता है।












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