Internet Blackout in Afghanistan: अफगानिस्तान में तालिबान का 'डिजिटल अंधकार', क्यों किया इंटरनेट ब्लैकआउट?
Internet Blackout in Afghanistan: अफगानिस्तान में रहने वाले 43 मिलियन से अधिक नागरिक एक बार फिर दुनिया से कट गए हैं। जिस आशंका ने 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से लगातार घेरा हुआ था, वह अब हकीकत बन चुकी है-पूरे देश में पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया गया है।
इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स (Netblocks) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि टेलीफोन सेवाओं के प्रभावित होने के साथ ही देशव्यापी इंटरनेट सेवाएं ठप्प हो गई हैं। तालिबान ने इस कदम को 'नैतिकता संबंधी उपाय' (Morality Measures) लागू करने का हिस्सा बताया है, जिससे अफगान लोगों पर और अधिक अलगाव और दमन का खतरा मंडरा रहा है।

फाइबर-ऑप्टिक केबल पर प्रतिबंध
यह अचानक और व्यापक ब्लैकआउट 2021 के बाद से सबसे बड़ा और समन्वित दूरसंचार बंद है। तालिबान के इस कदम के पीछे का कारण उनके सर्वोच्च नेता मौलवी हिबतुल्लाह अखुंदजादा (Mawlawi Haibatullah Akhundzada) का सीधा आदेश है।
CNN वर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी बाल्ख प्रांत के गवर्नर हाजी जैद ने घोषणा की कि सर्वोच्च नेता ने 'फाइबर-ऑप्टिक केबल पर पूर्ण प्रतिबंध' लगाने का आदेश दिया है। जैद ने अपने बयान में कहा, 'यह कदम अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है, और आवश्यक जरूरतों के लिए देश के भीतर एक वैकल्पिक प्रणाली स्थापित की जाएगी।'
क्या हैं अनैतिक गतिविधियां?
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि 'अनैतिक गतिविधियां' क्या हैं, लेकिन इस तरह का सामूहिक प्रतिबंध तालिबान की नियंत्रण और निगरानी की नीति को दिखाता है।
मीडिया और आम नागरिक हुए सबसे अधिक प्रभावित
इस डिजिटल दमन ने अफगानिस्तान के मीडिया आउटलेट्स को तुरंत प्रभावित किया है। काबुल-स्थित टोलो न्यूज टीवी (Tolo News TV) ने बताया कि इस शटडाउन से उनकी और उनकी सहयोगी मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी आम लोगों और विदेशों में रहने वाले अफ़ग़ानों को हो रही है, जिन्होंने इंटरनेट कटने के कुछ ही घंटों में अपने परिवार से संपर्क खो दिया।
लड़कियों की ऑनलाइन शिक्षा पर मंडराया संकट
इंटरनेट ब्लैकआउट का सबसे विनाशकारी परिणाम अफगान लड़कियों की शिक्षा पर पड़ सकता है। तालिबान द्वारा छठी कक्षा से आगे लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के बाद, कई लड़कियां और महिलाएं विदेशी शिक्षकों या धर्मार्थ संगठनों द्वारा चलाई जा रही ऑनलाइन कक्षाओं पर निर्भर थीं।
अब इंटरनेट कटने के बाद, शिक्षा के ये आखिरी रास्ते भी बंद हो गए हैं। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'वुमेन फॉर अफ़ग़ान वुमेन' (WAW) ने चेतावनी दी है कि यह ब्लैकआउट 'न केवल लाखों अफ़ग़ानों को चुप करा रहा है, बल्कि बाहरी दुनिया से जुड़ने वाली उनकी जीवन रेखा को भी बुझा रहा है।'
इस पूर्ण ब्लैकआउट के कारण संगठन ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपने कर्मचारियों से भी संपर्क खो दिया है, जिससे देश के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने का हर जरिया बाधित हो गया है।












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