तालिबान ने 85 प्रतिशत अफगानिस्तान जीतने का किया बड़ा दावा, विदेश नीति का भी किया ऐलान
तालिबान ने 85 प्रतिशत अफगानिस्तान की जमीन पर नियंत्रण स्थापित होने का दावा करते हुए रूस और चीन को लेकर अपनी विदेश नीति का ऐलान किया है।
काबुल, जुलाई 09: अमेरिकी सैनिकों के हटते ही अफगानिस्तान में तालिबान के वापस आने की जो आशंका जताई जा रही थी, उसमें लगता है तालिबान कामयाब होता दिख रहा है। तालिबान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के करीब 85 प्रतिशत हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है और बाकी बचे हिस्सों पर भी वो जल्द ही नियंत्रण स्थापित कर लेगा। मॉस्को में तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को दावा किया है कि तालिबान ने अफगानिस्तान में 85% से अधिक क्षेत्र को नियंत्रित कर लिया है।

85 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण का दावा
तालिबान ने अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा जमाने का दावा किया है, लेकिन अभी तक स्वतंत्र एजेंसीज ने तालिबान के दावे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन तालिबान ने अपनी विदेश नीति की घोषणा करनी भी शुरू कर दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित विदेशी ताकतें करीब 20 सालों तक तालिबान से लड़ने के बाद अब वापस अपने अपने घर लौट चली है, ऐसे में तालिबानी विद्रोहियों ने फिर से अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया है। ऐसी कई रिपोर्ट्स अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से से आईं हैं, जिनमें पता चला है कि अफगान के सैनिक अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी देश ताजिस्तान में भाग गये हैं, जिसको लेकर रूस को भी कट्टरपंथियों को लेकर चिंता सताने लगी है। वहीं, तालिबान के बढ़ते प्रभाव को लेकर रूसी चिंता के बीच तालिबान ने रूस को लेकर अपनी विदेश नीति का ऐलान कर दिया है।

रूस को तालिबान का आश्वासन
रूस की राजधानी मॉस्को में आज तालिबान के तीन नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया है, जिसमें उन्होंने रूस को आश्वासन देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान की धरती से रूस के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसक गतिविधियों को अंजान देने नहीं दिया जाएगा। तालिबान के अधिकारियों ने कहा कि, तालिबान अफगान क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट के संचालन को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेगा और वह नशीली दवाओं के उत्पादन को भी खत्म करना चाहेगा। तालिबान के अधिकारी शहाबुद्दीन डेलावर ने एक अनुवादक के माध्यम से कहा कि, "हम सभी उपाय करेंगे ताकि इस्लामिक स्टेट अफगान क्षेत्र में काम न करे, और हमारे क्षेत्र का इस्तेमाल हमारे पड़ोसियों के खिलाफ कभी नहीं किया जाएगा।" तालिबान के इसी प्रतिनिधिमंडल ने एक दिन पहले कहा था कि, उसका समूह ताजिकिस्तान-अफगान सीमा पर हमला नहीं करेगा, जिसका भाग्य रूस और मध्य एशिया में केंद्रित है।

तालिबाान की मजबूती से मॉस्को में तनाव
जैसे-जैसे देश के उत्तरी हिस्से में तालिबान मजबूत होता गया, ठीक वैसे वैसे मॉस्को में तनाव फैलता गया। मॉस्को को डर इस बात को लेकर है कि अगर आईएसआईएस या फिर अलकायदा मजबूत होता है, तो फिर उससे रूस में इस्लामिक चरमपंथ बढ़ने की आशंका होगी। रूस की सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से में तालिबान ने करीब 2 तिहाई हिस्सों पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, रूस के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान संघर्ष के सभी पक्षों से संयम दिखाने का आह्वान किया है और कहा कि रूस और मास्को के नेतृत्व वाले सीएसटीओ सैन्य गुट जरूरत पड़ने पर अपनी सीमा पर कार्रवाई भी शुरू कर देगा। मॉस्को में तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ''तालिबान जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करेगा और सभी अफगान नागरिकों को इस्लामी कानून और अफगान परंपराओं के ढांचे में एक अच्छी शिक्षा का अधिकार दिलाने की कोशिश करेगा''। तालिबान नेता डेलावर ने कहा कि, "हम चाहते हैं कि अफगान समाज के सभी प्रतिनिधि एक अफगान राज्य के निर्माण में भाग लें।"

चीन का तालिबान ने किया स्वागत
वहीं, अफगानिस्तान की करीब एक ट्रिलियन खनिज संपदा पर नजर गड़ाए चीन का तालिबान ने स्वागत करते हुए अपना मित्र करार दिया है। तालिबान ने कहा कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में चीन के निवेश को लेकर जल्द ही बातचीत करना चाहता है। वहीं, तालिबान ने कहा कि चीन विरोधी उइगर मुस्लिमों के खिलाफ तालिबान भी सख्त रूख अपनाएगा और उन्हें अफगानिस्तान में प्रवेश नहीं कर करने दिया जाएगा। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि अगर चीनी निवेश के बाद उनके देश में लोग काम पर लौटते हैं, तो तालिबान उन कामकरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही तालिबान ने चीन को अपना मित्र करार दिया है। इसके साथ ही तालिबान ने अपने पड़ोसी देशों को लेकर कहा कि 'अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश में हिंसा फैलाने के लिए नहीं होने दिया जाएगा'












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