पाकिस्तान ने खामोशी से माना तालिबान को 'सरकार', इमरान राज में तालिबानी राजदूत ने संभाला काम
तालिबान का राजनयिकों ने इस्लामाबाद में कामकाज संभाल लिया है, क्या पाकिस्तान ने खामोशी के साथ तालिबान सरकार का मान्यता दे दी है।
इस्लामाबाद, अक्टूबर 31: पाकिस्तान ने एक बार फिर से दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है और खामोशी के साथ तालिबान की सरकार को 'मान्यता' दे दी है। शनिवार को पाकिस्तानी मीडिया में कहा गया है कि, तालिबान द्वारा नियुक्त राजदूत को पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में अफगान दूतावास और वाणिज्य दूतावास का प्रभार लेने की इजाजत दे दी है। हालांकि, पाकिस्तान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर तालिबान को काबुल में वैध सरकार के रूप में मान्यता नहीं दिया है, फिर भी उसने नियुक्त "राजनयिकों" को वीजा जारी कर दिया है।

तालिबान सरकार को मान्यता!
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, सरदार मुहम्मद शोकेब ने इस्लामाबाद में अफगान दूतावास में पहले सचिव के रूप में काम करना शुरू कर दिया है, जबकि हाफिज मोहिबुल्लाह, मुल्ला गुलाम रसूल और मुल्ला मुहम्मद अब्बास को अफगानिस्तान के पेशावर, क्वेटा और कराची वाणिज्य दूतावासों को सौंपा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोकैब प्रभावी रूप से इस्लामाबाद में अफगान प्रभारी डी'एफ़ेयर होंगे। पाकिस्तान स्थिति अफगान दूतावास जुलाई के बाद से राजदूत के बिना है जब पिछले शासन के तहत अंतिम राजदूत, नजीबुल्लाह अलीखिल की पाकिस्तान में अपहरण के बाद उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया था।

राजदूत ने संभाला कामकाज
हालांकि, शोकैब के बारे में कोई विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन 'वॉयस ऑफ अमेरिका' की एक रिपोर्ट के अनुसार, वह जाबुल प्रांत का एक जातीय पश्तून है, जो दक्षिणी कंधार में सूचना और सांस्कृतिक विभाग में सेवा करता था और एक तालिबान पत्रिका से जुड़ा था। उसने कथित तौर पर एक बार कारी यूसुफ अहमदी के नाम से तालिबान के प्रवक्ता के रूप में काम किया था और उसे पाकिस्तान में कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया था और बाद में कई वर्षों तक पेशावर में रहा। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार ने यह कहकर नई नियुक्तियों को जायज ठहराने की कोशिश की है, कि यह एक "प्रशासनिक मामला" है।

दुनिया से झूठ बोलता पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार ने कहा कि, ''अफगान दूतावास में नए कर्मचारियों की नियुक्ति के संबंध में यह एक प्रशासनिक मामला है और इसका उद्देश्य दूतावास को अपने कार्यों को करने में सक्षम बनाना है, मुख्य रूप से कांसुलर कार्य जैसा है''। उन्होंने कहा कि, ''जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में लाखों अफगान शरणार्थी हैं और वहां वीजा है। मुद्दे भी हैं''। आपको बता दें कि, 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर अपना वास्तविक नियंत्रण स्थापित करने के बाद से पाकिस्तान दुनिया को कूटनीतिक रूप से तालिबान के साथ जुड़ने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, दुनिया उनके बारे में संशय में है और किसी भी तरह से तालिबा की सरकार को मान्यता देने से पहले तालिबान के शासन, देश में मानवाधिकार की स्थिति को देख रही है।
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