मुंबई में कंपनियों को शिफ्ट करेगा ताइवान, चीन के हमले की आशंका के बाद खोलेगा दफ्तर.. भारत को भारी फायदा

Taiwan-India Tie: चीनी हमले की आशंका के बीच ताइवान ने अपनी कई कंपनियों को भारत में शिफ्ट करने का फैसला किया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान की शीर्ष टेक्नोलॉजी कंपनियां, भारत में मैन्यूफैक्चरिंग करने पर विचार कर रही हैं और चीन के हमले की आशंका से दूर, भारत में ट्रांसफ करने पर विचार कर रही हैं।

ताइवान ने बुधवार को घोषणा की है, कि वह मुंबई में एक नया कार्यालय खोलेगा और दिल्ली और चेन्नई के बाद यह भारत में ताइवान का तीसरा दफ्तर होगा। ताइवान के इस फैसले को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसकी 'चीन-प्लस-वन' रणनीति का उद्देश्य, अपने देश के व्यवसायों को जिंदा रखने के लिए चीन की जद से बाहर लगातार ऑपरेशन करने के लिए है।

Taiwan to oepn office in mumbai

ताइवान चाहता है, कि अगर चीन उसपर हमला करता है, तो उस स्थिति में भी ताइवान की कंपनियां के पास ऑपरेशनल क्षमता बनी रहे, वो लगातार मैन्यूफैक्चरिंग करता रहे, ताकि देश में करेंसी की सप्लाई होती रहे।

भारत और ताइवान में कैसे हैं संबंध?

हालांकि, भारत के ताइवान के साथ अभी तक औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, क्योंकि भारत अभी भी वन-चायना पॉलिसी का पालन करता है, लेकिन ताइवान ने भारत में व्यापार करने के लिए भारत में आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए हैं।

भारत ने भले ही आधिकारिक तौर पर ताइवान को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं दी है, लेकिन भारत के ताइवान के साथ रिश्ते काफी अच्छे हैं और निकट भविष्य में भारत, ताइवान को एक देश के तौर पर भी मान्यता दे सकता है।

ताइवान के सांस्कृतिक मंत्रालय ही भारत में ताइवान के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और जबकि दिल्ली में इसका कार्यालय एक दूतावास के रूप में कार्य करता है, चेन्नई में ताइवान का दफ्तर, एक वाणिज्य दूतावास के रूप में काम करता है।

दोनों पक्षों ने साल 1995 में एक दूसरे के देश में प्रतिनिधि कार्यालय खोले थे। नई दिल्ली में एक ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र (TECC) और ताइपे में एक "भारत ताइपे एसोसिएशन" है। इन्हें द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक "महत्वपूर्ण मोड़" के रूप में देखा जाता है।

ताइवान ने दिसंबर 2012 में चेन्नई में अपना दफ्तर खोला था और अब मुंबई में भी ऑफिस खोलने जा रहा है। वहीं, अगस्त 2022 में अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान दौरे के बाद ताइवान और चीन के बीच रिश्ते में कड़वाहट आ गई है। कई रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है, कि ताइवान पर हमले की आखिरी तैयारी में चीन जुटा है।

मुंबई में दफ्तर खोलेगा ताइवान

हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में इस मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया है, कि मध्य भारत में व्यापार संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होने के बाद, ताइवान ने दो साल से ज्यादा समय पहले ही मुंबई में एक कार्यालय स्थापित करने का मुद्दा उठाया था।

वर्तमान में, भारत का ताइपे में भारत-ताइपे एसोसिएशन (आईटीए) कार्यालय है।

एक बयान में, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मुंबई में टीईसीसी की स्थापना का उद्देश्य भारत के साथ "मौलिक संबंधों" को आगे बढ़ाना और आदान-प्रदान और सहयोग को गहरा करना है।

यह भारत-ताइवान संबंधों में कैसे मदद करेगा?

भारत हमेशा से चाहता है, कि ताइवान की बड़ी कंपनियां भारत में आकर निर्माण कार्य शुरू करे, इससे भारत में ना सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि भारत में नई नौकरियां आएंगी और टेक्नोलॉजी के मामले में भी भारत को काफी फायदा होगा।

इसके अलावा, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (टीएसएमसी) जैसे चिप उत्पादक भी शामिल हैं, जो भारत में निर्माण शुरू करना चाहते हैं। टीएसएमसी, दुनिया का सबसे बड़ा चिप निर्माता है।

ताइवान के विदेश मंत्री ने एक बयान जारी कर कहा है, कि मुंबई में टीईसीसी स्थापित करने का फैसला, व्यापार, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्रों में भारत और ताइवान के बीच हाल के वर्षों में सहयोग में देखी गई "महत्वपूर्ण प्रगति" को देखते हुए लिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया है, कि चेन्नई में टीईसीसी के खुलने के बाद से, भारत में निवेश करने वाले और कारखाने खोलने वाले सभी ताइवानी व्यवसायों में से लगभग 60 प्रतिशत ने, दक्षिणी भारत में अपना ऑपरेशन विकसित करने का विकल्प चुना है।

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "चेन्नई और उसके आसपास के क्षेत्रों को ताइवान के विनिर्माण उद्योगों द्वारा किए गए निवेश से लाभ हुआ है और मुंबई में टीईसीसी की स्थापना से, पश्चिमी भारत में भी इसी तरह का प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।"

करीब पांच साल पहले, नई दिल्ली और ताइपे ने भारत में ताइवानी निवेश की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार की मात्रा साल 2006 में 2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2021 में 8.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई।

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और जनसांख्यिकीय लाभांश का भी उल्लेख किया है। भारत अब दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है।

ताइवानी विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "भारत 2022 में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और इस साल सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है। अपने विशाल बाजार और संबंधित व्यावसायिक अवसरों के साथ, भारत वैश्विक उद्यमों के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।"

ताइवानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है, कि मुंबई में दफ्तर खोलने के अलावा, गोवा, गुजरात और मध्य प्रदेश राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली, और दमन और दीव में व्यवसायियों, पर्यटकों और ताइवानी नागरिकों को वीजा सेवाएं, दस्तावेज़ प्रमाणीकरण और आपातकालीन सहायता प्रदान करेगा।

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