Taiwan Election: चीन समर्थक या विरोधी... ताइवान में किसकी होगी अगली सरकार, चुनाव से पहले जानिए सबकुछ
Taiwan Election 2024: साल 2024 दुनिया के लिए चुनावों वाला साल है और इस साल दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में चुनाव होने का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिनमें भारत, अमेरिका, पाकिस्तान, रूस जैसे देश शामिल हैं। बांग्लादेश में कल ही मतदान हुए हैं, जिनमें शेख हसीना की पार्टी ने फिर से चुनाव जीत लिया है।
वहीं, ताइवान के मतदाता इस सप्ताह 13 जनवरी को अपने अगले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और विधायी प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान करेंगे।

महज 2 करोड़ 30 लाख लोगों की आबादी के बावजूद, ताइवान का चुनाव अपनी विवादित राजनीतिक स्थिति के कारण अत्यधिक महत्व रखता है। 1940 के दशक से वास्तविक रूप से स्वतंत्र होने के बावजूद, ताइवान द्वीप और इसके बाहरी क्षेत्रों पर अभी भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा दावा किया जाता है, जिसे लगभग सभी ताइवानी अस्वीकार करते हैं लेकिन युद्ध के जोखिम के कारण सार्वजनिक रूप से कहने से डरते हैं।
ताइवान चुनाव पर दुनिया की नजर
संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन में पर्यवेक्षक चुनाव परिणाम पर बारीकी से नजर रखेंगे, कि क्या मतदाता ज्यादा रूढ़िवादी और बीजिंग-अनुकूल कुओमितांग (केएमटी) को चुनते हैं, या ज्यादा केंद्र-वाम और अमेरिका-अनुकूल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) पार्टी को चुनते हैं, जो पिछले आठ सालों से ताइवान पर शासन कर रही है।
ताइवान में एक और राजनीतिक पार्टी ताइवान पीपल पार्टी (टीपीपी) भी है, जो राजनीतिक परिदृश्य में दोनों पार्टियों के बीच किंगमेकर की भूमिका में है।
1996 में अपने पहले लोकतांत्रिक चुनावों के बाद से, ताइवान के दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने हर आठ साल में वैकल्पिक नेतृत्व किया है - लेकिन इस साल, डीपीपी के राष्ट्रपति उम्मीदवार विलियम लाई चिंग-ते, केएमटी के खिलाफ आगे चल रहे हैं।
केएमटी को लेकर पहले रिपोर्ट थी, को वो टीपीपी के साथ ज्वाइंट राष्ट्रपति उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है, लेकन ये गठबंधन नहीं बन सका और ज्वाइंट उम्मीदवार उतारने की कोशिश नाकाम हो गई।
हालांकि, मतदाता ताइवान की स्थिर अर्थव्यवस्था, आवास की उच्च लागत और द्वीप की ऊर्जा नीतियों के भविष्य जैसे प्रमुख घरेलू मुद्दों से नाखुश हैं, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव अक्सर ताइवान की राजनीतिक स्थिति के बड़े सवाल से घिरा रहता है।
2020 में मतदाताओं ने हांगकांग में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के बैकग्राउंड में भारी बहुमत से डीपीपी और उसके ताइवान-प्रथम एजेंडे को चुना था।
लंबे समय से ताइवान को "चीन की मुख्य भूमि" में लौटने पर इसी तरह के समझौते की पेशकश की गई थी, लेकिन ताइवान के लोगों को डर रहा है, कि ताइवान में भी चीन हांगकांग जैसा सुरक्षा कानून लागू कर सकता है और उसके लोकतंत्र को खत्म कर सकता है।
ताइवान के लोगों का मानना है, कि बीजिंग के वादों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।

लिहाजा, मतदाताओं को अब यह तय करना होगा, कि क्या वे केएमटी द्वारा पेश किए गए बीजिंग के साथ घनिष्ठ संबंधों के आर्थिक लाभ चाहते हैं या फिर वो अलग से अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और डीपीपी के शासन में लगातार चीनी आक्रामकता से जूझना चाहते हैं।
ताइवान की राजनीति के विशेषज्ञ और ताइपे के नेशनल चेंगची विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर लेव नचमन ने कहा, कि "ताइवान की विवादित स्थिति और उस अनिश्चितता के कारण जो न केवल क्षेत्र, बल्कि दुनिया में भी लाती है, हर कोई वास्तव में इस बात में निवेशित है, कि जहाज को चलाने वाला कौन होगा, क्योंकि इसमें देश की सुरक्षा, जोखिम और उसकी क्षमता, हर एक बात आती है।"
उन्होंने कहा, कि "इतने सारे लोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं, कि यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो, क्योंकि अगर ताइवान की लोकतंत्र की स्थिति बदलती है, तो दुनिया को इसमें बहुत दिलचस्पी होगी। मुझे लगता है कि लोगों को न केवल इस बात की परवाह है कि चुनाव कौन जीतता है बल्कि, इसकी भी परवाह है, कि वो चुनाव कैसे जीतते हैं।"
ताइवान इलेक्शन कैसा होता है, आइये समझते हैं
13 जनवरी को, ताइवान में लोग देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए, स्थानीय विधायकों को चुनने के लिए, और अपनी पसंदीदा पार्टी लिस्ट चुनने के लिए तीन मतदान करेंगे।
पार्टी लिस्ट चुनना वो प्रक्रिया है, जिसके तहत पार्टी को लोगों से मिले वोट के आधार पर वो संसद में कितने विधायकों को चुन सकते हैं, इसकी सीटों की संख्या तय की जाती है। जिस पार्टी को लोगों का जितना समर्थन मिलता है, उस पार्टी को उतनी सीटें मिलती हैं।
किसी पार्टी की लोकप्रियता और प्रतिष्ठा को मापने के लिए पार्टी लिस्ट ताइवान की राजनीति में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
ताइवान की 113 सदस्यीय विधायिका भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 73 विधायकों, पार्टी सूचियों के आधार पर 34 विधायकों और स्वदेशी ताइवानी प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित छह सीटों से बनी है, जिनमें से सभी चार साल की शर्तों पर काम करेंगे।
मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे होंगे और कागज़ के मतपत्र पर वोट डालेंगे, जिनकी गिनती हाथ से की जाएगी। लगभग 1 करोड़ 95 लाख लोग मतदान के लिए रजिस्टर्ड हैं और मतदान के दिन ही वोटों की गिनती शुरू हो जाती है।
आलोचकों का कहना है, कि ताइवान की मतदान प्रणाली युवा लोगों को अपनी बात कहने से वंचित कर देती है, क्योंकि मतदाताओं को वोट देने के लिए कम से कम 20 वर्ष का होना पड़ता है और उन्हें अपने "घरेलू पंजीकरण" के स्थान - आमतौर पर अपने गृहनगर - पर लौटना पड़ता है।
चुनाव से एक दिन पहले, हजारों लोग यात्रा करने के लिए मजबूर होंगे और वोट डालने के लिए उन्हें अपने जन्मस्थान लौटना होगा।
इन चुनौतियों के बावजूद, पिछले दो चुनावों में मतदान अपेक्षाकृत ज्यादा रहा है। 2016 में 66.27 प्रतिशत और 2020 में 74.9 प्रतिशत वोट डाले गये हैं।
ताइवान में चुनावी फीवर के साथ-साथ चुनावी घोटालों की लहर भी आ गई है, जो ताइवान की राजनीति में एक और लोकप्रिय घटक है। इस चुनाव में, तीनों राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को उनकी विभिन्न संपत्ति के बारे में सवालों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें एक छात्र छात्रावास, एक पारिवारिक घर और एक अवैध पार्किंग स्थल शामिल है।

ताइवान की मुख्य राजनीतिक पार्टियां कौन कौन हैं?
ताइवान की राजनीति अभी भी कुछ मतदाताओं के लिए द्वीप के 20वीं सदी के उथल-पुथल भरे इतिहास से प्रभावित है।
17वीं से 19वीं सदी के अंत तक, कई औपनिवेशिक शक्तियों के बीच से गुजरा ताइवान 1895 से 1945 तक एक जापानी उपनिवेश था। जैसे ही द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति हुई और चीनी गृह युद्ध शुरू हुआ, चीन में कम्युनिस्टों से हारने के बाद कुओमितांग भागकर ताइवान आ गये। उन्होंने वापस चीन आकर कम्युनिस्ट चीन के शासन को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन वो वादा कभी पूरा नहीं हो सका।
केएमटी, पूर्वी एशिया की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, जिसने ताइवान पर शासन किया है और जिसे आधिकारिक तौर पर चीन गणराज्य के रूप में जाना जाता है। केएमटी ने सालों तक ताइवान पर अकेले शासन किया और उनके शासनकाल में ताइवान के इलीट क्लास को काफी ऊंचा स्थान दिया गया।
युद्ध के बाद के वर्षों में राजनीतिक दमन के बावजूद, 1970 के दशक में ताइवान में एक लोकतांत्रिक आंदोलन उभरना शुरू हुआ, जिसके कारण 1986 में डीपीपी की औपचारिक स्थापना हुई।
क्षेत्र के सबसे जीवंत लोकतंत्रों में से एक के रूप में, ताइवान अब कई छोटे राजनीतिक दलों का घर है, लेकिन केएमटी और डीपीपी ने राजनीति पर अपना दबदबा कायम रखा है।
इस बीच, बीजिंग की कम्युनिस्ट पार्टी ने ताइवान पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ा है और शांति या फोर्स, दोनों ही तरीकों का इस्तेमाल कर ताइवान को चीन में मिलाने की कसम मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी खाई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2049 का टाइमलाइन सेट किया है, जबतक वो ताइवान को मुख्य चीन में शामिल कर लेंगे।
पिछले दशक में, टीपीपी जैसे छोटे राजनीतिक दल, बदलती जनसांख्यिकी और मतदाता मांगों को पूरा करने के लिए उभरे हैं। ताइपे के संस्थापक और पूर्व मेयर को वेन-जे के प्रभुत्व वाली टीपीपी ने बीच का रास्ता अपनाने की कोशिश की है। पार्टी उन युवा मतदाताओं के बीच आश्चर्यजनक रूप से लोकप्रिय साबित हुई है, जो डीपीपी को उतना पसंद नहीं करते हैं।
विधायी स्तर पर, केएमटी के पास 2016 तक विधायिका में बहुमत था और यह अपने लंबे समय से चले आ रहे नेटवर्क और स्थानीय मुद्दों की समझ के कारण लोकप्रिय बना हुआ है। जबकि, डीपीपी के पास पिछले आठ वर्षों में मामूली बहुमत रहा है, ऐसी उम्मीदें हैं, अगर केएमटी और टीपीपी का गठबंधन बनता है, तो सत्ताधारी डीपीपी चुनाव हार सकती है।
राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार कौन कौन हैं?
मतदाताओं को तीन अलग-अलग राष्ट्रपतियों और अपने द्वीप के भविष्य के तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच एक विकल्प चुनना है। ताइवान के अंदर चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा चीन की ही हो रही है। वहीं, उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी अपने राजनीतिक वजन के कारण सुर्खियों में हैं।
राष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे 64 वर्षीय लाई चल रहे हैं, जबकि उनके उपराष्ट्रपति उम्मीदवार 52 साल के ह्सियाओ बी-खिम हैं, जो वॉशिंगटन में ताइवान के राजदूत रह चुके हैं।
लाई एक डॉक्टक हैं जो डीपीपी के लंबे समय से सदस्य हैं और उपराष्ट्रपति बनने से पहले ताइवान की स्वतंत्रता पर अपने मुखर विचारों के लिए जाने जाते थे।
हालांकि, राजनीति में आगे बढ़ने के साथ साथ लाई ताइवान की "यथास्थिति", जो कि एक वास्तविक स्वतंत्रता है, उसका समर्थन करने पर ज्यादा जोर देने लगे हैं। ह्सियाओ को अपने साथी के रूप में चुनने के लाई के फैसले से उनकी लोकप्रियता में वृद्धि हुई है क्योंकि उन्हें युवा मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है। ह्सियाओ को अमेरिका में भी समर्थन मिला हुआ है और वो अमेरिका के भी विश्वसनीय माने जाते हैं।
वहीं, केएमटी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार 66 वर्षीय होउ यू-इह हैं, जो न्यू ताइपे के पूर्व मेयर हैं। होउ अन्य केएमटी नेताओं की तुलना में विनम्र पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने 1980 के दशक में एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपना पेशेवर जीवन शुरू किया था। राजनीति में देर से आने वाले, होउ ने शुरुआत में डीपीपी के लिए काम किया था। वहीं, उन्होंने अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार अपने साथ 73 वर्षीय जॉ शॉ-कोंग (जिन्हें चाओ शाओ-कांग भी कहा जाता है) है, उन्हें बनाया है, जो एक मीडिया हस्ती होने के साथ साथ चीनी समर्थन माने जाते हैं।
जॉ शॉ-कोंग ताइवान के चीन में विलय के समर्थक रहे हैं, लेकिन उनका शर्त ये है, कि चीन से कम्युनिस्ट शासन हटना चाहिए।
वहीं, राष्ट्रपति चुनाव में तीसरे छुपे रुस्तम म्मीदवार 64 साल के को हैं। उनकी साथी सिंथिया वू हैं, जो एक राजनीतिज्ञ हैं और ताइवान के शीर्ष टायकून में से एक की 45 वर्षीय बेटी हैं। को ने केएमटी के विरोध में 2014 में टीपीपी की स्थापना की थी, लेकिन हाल के चुनाव के दौरान वह केएमटी पार्टी के करीब आ गए हैं।
नवंबर में, को ने यह घोषणा करके ताइवान के मतदाताओं को चौंका दिया था, कि वह संयुक्त मतदान पर केएमटी के साथ सहयोग करेंगे, लेकिन यह समझौता तब टूट गया जब पार्टियां यह तय नहीं कर सकीं, कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए उम्मीदवारों का चयन कैसे किया जाए।
इसके अलावा, आईफोन निर्माता फॉक्सकॉन के संस्थापक, अरबपति टेरी गौ एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में कई महीनों तक राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ते रहे, लेकिन जनता से पर्याप्त समर्थन हासिल करने में नाकाम रहने पर नवंबर के अंत में वह रेस से बाहर हो गए।
ताइवान में जो भी राष्ट्रपति चुना जाएगा, वो इस साल मई महीने में शपथ लेगा।
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