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31 जनवरी को चंद्रग्रहण तो सब देखेंगे पर ताईवान में दिखेगा Five Star Lunar Eclipse

ताइपे। ताईवान के लोगों को बड़ी ही बेसब्री से 31 जनवरी 2018 का इंतजार है। बीते शुक्रवार को राजधानी ताइपे में एस्‍ट्रोनॉमिकल म्‍यूजियम ने इस संबंध में अपनी वेबसाइटपर घोषणा करते हुए बताया कि 31 जनवरी को देशवासी अद्भुत खगोलीय घटना के गवाह बनने जा रहे हैं, जिसका नाम है- 'Five Star' Lunar eclipse। इसका नजारा बेह खूबसूरत होगा और यह चंद्रग्रहण के दौरान दिखाई देगा।

 पूर्ण चंद्रग्रहण के बाद भी दिखेगा अकल्‍पनीय नजारा

पूर्ण चंद्रग्रहण के बाद भी दिखेगा अकल्‍पनीय नजारा

31 जनवरी को पड़ने वाला चंद्रग्रहण वैसे तो पूर्व ग्रहण है, लेकिन इस दौरान भी चंद्रमा आकाश में चमकता दिखाई देगा। यह वाकई अविश्‍वसनीय है, क्‍योंकि पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा या सूर्य दिखाई नहीं देते, पर इस बार ऐसा होगा। ताईवान के वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा दिखाई देगा और इसका रंग लाल होगा। यही कारण है कि इसे 'Super Blue Blood Moon'भी कहा जा रहा है।

ताईवान के वैज्ञानिकों ने बताया ये समय

ताईवान के वैज्ञानिकों ने बताया ये समय

ताईवान के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 31 जनवरी को शाम करीब 6:50 से रात 12:10 के बीच यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अद्भुत खगोलीय घटना घटेगी, जो कि बेहद दुर्लभ होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सुपर मून यानी पूर्ण चंद्रग्रहण तब आता है जब चंद्रमा पृथ्‍वी के सबसे करीब होता है। सुपरमून के कारण चंद्रमा सामान्‍य दिनों की तुलना में 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखाई देता है।

 भारत में 5 बजकर 18 मिनट से रात्रि 8 बजकर 42 मिनट तक दिखेगा चंद्रग्रहण

भारत में 5 बजकर 18 मिनट से रात्रि 8 बजकर 42 मिनट तक दिखेगा चंद्रग्रहण

भारतीय समय के अनुसार 31 जनवरी को शाम को 5 बजकर 18 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजकर 42 मिनट के बीच धरती इस अनोखे पल की गवाह बनेगी। ये साल 2018 का पहला ग्रहण है। इस ग्रहण की एक खास बात ये भी है कि 31 जनवरी को चंद्र ग्रहण के बावजूद चांद पूरी तरह काला दिखाई देने के बजाय लाल रंग का दिखाई पड़ेगा।

 क्‍यों कहा जा रहा है इसे ब्‍लड मून

क्‍यों कहा जा रहा है इसे ब्‍लड मून


ग्रहण के दौरान सूर्य और चांद के बीच में धरती के होने से चांद पर प्रकाश नहीं पहुंच पाता। इस दौरान सूर्य के प्रकाश में मौजूद विभिन्न रंग इस पारदर्शी वातावरण में बिखर जाते हैं, जबकि लाल रंग पूरी तरह बिखर नहीं पाता और चांद तक पहुंच जाता है। चंद्रमा जैसे ही पृथ्वी के ठीक पीछे आता है तो उसका रंग गहरा लाल हो जाता है। क्योंकि उस तक केवल पथ्वी के वायुमंडल से ही सूर्य की रोशनी पहुंचती है। यही कारण है कि इसे 'ब्लड मून' भी कहा जा रहा है।

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