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सातों समुद्र में है जितना पानी, सूरज पर है उससे भी बड़ा विशालकाय सोने का भंडार, जानिए अद्भुत खोज

पृथ्वी पर सातों समुद्र में जितना पानी है, सूरज पर उससे भी ज्यादा सोने का विशालकाय भंडार है।

नई दिल्ली, जुलाई 13: सोने का महत्व हम सब जानते हैं और विश्व की अर्थव्यवस्था से लेकर भारतीय परंपरा तक... हर जगह सोने का कितना स्थान है, इससे हम सब वाकिफ हैं। पृथ्वी पर मौजूद सबसे कीमती धातुओं में से एक सोना है, लेकिन वैज्ञानिकों ने जो एक खोज की है, वो बेहद चौंकाने वाली है। वैज्ञानिकों को खोज में पता चला है कि हमारी पृथ्वी पर जीवन देने वाले सूरज के पास सातों समुद्र से ज्यादा सोना है। सदियों पहले वैज्ञानिकों ने सोने के इस भंडार की खोज कैसे की और इसके पीछे क्या कहानियां हैं, आईये जानते हैं।

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    आग से हुई थी खोज की शुरूआत

    आग से हुई थी खोज की शुरूआत

    एस्ट्रोनॉमी पत्रिका ने 1859 में एक रिपोर्ट छापी थी, जिसमें प्रसिद्ध रसायनज्ञ रॉबर्ट बेन्सन और गुस्ताव किरशॉफ ने जर्मनी के मैनहेम शहर में आग बढ़ती हुई देखी। आग उनकी हीडलबर्ग यूनिवर्सिटी लैब से करीब 10 मील यानि 16 किलोमीटर दूर जल रही थी। जिसे देखने के लिए उन्होंने अपने नए स्पेक्ट्रोस्कोप का इस्तेमाल करने का विचार किया। इस टेक्नोलॉजी की मदद से प्रकाश को विभिन्न तरंग दैर्ध्य में बांटकर रासायनिक तत्वों की पहचान की जा सकती है। उन्होंने खिड़की पर ही स्पेक्ट्रोस्कोप लगा दिया और जांच में आग की लपटों में बेरियम और स्ट्रोंटियम की पहचान कर ली। रॉबर्ट, जिन्होंने आज दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में उपयोग किए जाने वाले बेन्सन बर्नर को डिजाइन किया है, उन्होंने सुझाव दिया कि, एक ही स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग सूर्य और चमकीले सितारों के वायुमंडल पर भी किया जा सकता है।

    सूरज पर सोने की खोज

    सूरज पर सोने की खोज

    इस घटना के करीब 10 साल बाद 18 अगस्त 1868 को पूर्ण सूर्य ग्रहण के दिन कई खगोलशास्त्रियों ने सूरज पर स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से हीलियम की खोज करने में कामयाबी हासिल कर ली। इसके बाद सूरज के वातावरण में एक के बाद एक कार्बन, नाइट्रोजन, लोहा और अन्य भारी धातुओं की खोज कर ली गई। इन्हीं में से एक था सोना। 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की शुरुआत में जैसे-जैसे पृथ्वी की उत्पत्ति और इतिहास की समझ बढ़ी, वैसे-वैसे यह सवाल भी उठने लगे कि आखिरकार अरबों सालों तक सूरज और अन्य तारे कैसे चमकते रहे?

    सूरज पर है 2.5 ट्रिलियन टन सोना

    सूरज पर है 2.5 ट्रिलियन टन सोना

    लंबे समय से चल रहे रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि सूरज पर 2.5 ट्रिलियन टन सोना है। इतना सोना पृथ्वी के सभी महासागरों को भर सकता है और फिर भी यह खत्म नहीं होगा। एक और दिलचस्प खोज बाद में की गई और जिसमें पाया गया कि आखिर पृथ्वी पर सोना कैसे आया। वैज्ञानिकों को खोज में पता चला कि सूरज के जैसे तारों से न्यूट्रॉन तारों का निर्माण हुआ और उनके आपस में टकराने की वजह से पृथ्वी पर सोना आया।

    धरती पर कैसे आया सोना

    धरती पर कैसे आया सोना

    रिसर्च में पता चला है कि जब कोई तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में होता है, तो उसका कोर टूट कर बिखर जाता है और फिर एक सुपरनोवा विस्फोट होता है। और फिर तारों की बाहरी परतें अंतरिक्ष में फैलने लगती हैं। इस दौरान न्यूट्रॉन कैप्चर रिएक्शन होता है। लोहे से भारी अधिकांश तत्व इन्हीं से उत्पन्न होते हैं। जब दो ऐसे न्यूट्रॉन तारे टकराते हैं, तो न्यूट्रॉन कैप्चर रिएक्शन से स्ट्रोंटियम, थोरियम, यूरेनियम और साथ ही सोना पैदा होता है।

    तारों से जमीन पर उतरा है सोना

    तारों से जमीन पर उतरा है सोना

    रिसर्च में पता चला है कि हमारे ब्रह्मांड के बनने के बाद से इस तरह के कई टकराव हुए हैं, और जो साना पृथ्वी के अंतरिक्ष में आया, वो धीरे धीरे धरती पर पहुंच गया। यानि, सोना सिर्फ इसलिए खास नहीं है क्योंकि यह पृथ्वी पर काफी दुर्लभ माना जाता है, बल्कि सोना इसलिए भी है काफी खास है, क्योंकि यह तारों से सीधे जमीन पर उतरता है।

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