B.617.2 कोरोना स्ट्रेन के खिलाफ फाइजर की वैक्सीन कम प्रभावी, फिर भी करेगी रक्षा: स्टडी
नई दिल्ली, 29 मई। पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुके कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए कई भारत सहित कई देशों ने वैक्सीन तैयार की। इस बीच जानलेवा वायरस भी लगातार अपना रूप बदल रहा है, कोविड के कई नए वेरिएंट सामने आ चुके हैं। हाल ही में भारत में पाए गए नए वेरिएंट B.617.2 ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। फ्रांस के पाश्चर इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के अनुसार, फाइजर वैक्सीन थोड़ा कम प्रभावी है, लेकिन यह B.617.2 कोरोना वायरस स्ट्रेन से लोगों का बचाव करता है।

पाश्चर इंस्टीट्यूट के निदेशक और अध्ययन के सह-लेखक ओलिवियर श्वार्ट्ज ने कहा कि भारत में पाए जाने वाले B.617.2 वेरिएंट के मुकाबले फाइजर वैक्सीन कुछ हद तक कम प्रभावी है। हालांकि यह नए कोरोना स्ट्रेन से लोगों का बचाव करता है। बता दें कि पाश्चर इंस्टीट्यूट की इस स्टडी को बायोरेक्सिव वेबसाइट पर पब्लिश किया गया है, आभी इसका पियर रिव्यू किया जाना बाकी है। पियर रिव्यू का मतलब यह हुआ कि एक दूसरी संस्था भी इसपर अपनी रिसर्च करेगी और पाश्चर इंस्टीट्यूट की स्टडी पर मुहर लगाएगी।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन के लिए ऑरलियन्स शहर के 28 स्वास्थ्य वॉलंटियर्स का नमूना लिया गया था। उनमें से सोलह को फाइजर वैक्सीन की दो खुराक दी गई, जबकि 12 को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की एक खुराक दी गई। स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को फाइजर की दो खुराक दी गई थी उनके शरीर में कोरोना के B.617.2 स्ट्रेन के खिलाफ एंटीबॉडी में तीन गुना कमी पाई गई, लेकिन वो सभी सुरक्षित थे। स्टडी के नतीजों में कहा गया कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन ने कम क्षमता वाली एंटीबॉडी को भी न्यूट्रल कर दिया। ओलिवियर श्वार्ट्ज ने कहा, जिन मरीजों को पिछले एक साल में कोविड-19 हुआ था और लोगों ने फाइजर की दो खुराक के साथ टीका लगाया था। उनमें भारत में पाए जाने वाले वेरिएंट से बचाव के लिए पर्याप्त एंटीबॉडी पाई गई, लेकिन यह यूके के स्ट्रेन की तुलना में 3 से 6 गुना कम थी।












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