स्टडी में खुलासा: 'वुहान लैब में बना कोरोना वायरस', नेचुरल दिखाने के लिए इस्तेमाल की गई रेट्रो इंजीनियरिंग

लंदन, 29 मई। कोरोना वायरस कहां से शुरू हुआ है इसकी जांच को लेकर दुनिया में जांच की मांग तेज हो गई है। चीन भले ही इस बात से इनकार करता रहा है लेकिन अभी तक मिले तमाम अध्ययन ये इशारा कर चुके हैं कि इस वायरस को चीन में तैयार किया है। अब एक नए अध्ययन ने दावा किया है कि चीनी वैज्ञानिकों ने कोविड-19 वायरस को वुहान की लैब में तैयार किया था।

वायरस को बनाकर उसे कवर करने की कोशिश

वायरस को बनाकर उसे कवर करने की कोशिश

चीनी वैज्ञानिकों के इस वायरस को तैयार करने का उद्देश्य भी खतरनाक ही मालूम पड़ता है। क्योंकि अध्ययन के मुताबिक वायरस को तैयार करने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे नेचुरली विकसित जैसा बनाने की कोशिश की ताकि इसे चमगादड़ों में बना बताया जा सके। इसके लिए चीनी वैज्ञानिकों ने रिवर्स इंजीनियरिंग वर्जन के जरिए उनके ट्रैक को ढकने की कोशिश की।

इस अध्ययन के निष्कर्षों को लिखने वाले ब्रिटिश प्रोफेसर एंगुस डाल्गलिश और नार्वे के वैज्ञानिक डॉक्टर बर्जर सॉर्सन ने लिखा है। इसमें कहा है कि उनके पास एक साल से चीन में प्रथम दृष्टया रेट्रो इंजीनियरिंग के सबूत थे लेकिन अकादमिक जगत और बड़े जर्नल्स ने इसकी उपेक्षा की।

प्रोफेसर डाल्गलिश लंदन के सेंट जॉर्ज विश्वविद्यालय में ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में हैं और उन्हें पहली 'काम करने वाली एचआईवी वैक्सीन' बनाने में उनकी सफलता के लिए जाना जाता है। यह वैक्सीन रोगियों का इलाज करने और महीनों तक उन्हें रेगुलर ली जाने वाली दवा छोड़ने की अनुमति देती है।

अध्ययन में चौंकाने वाले आरोप

अध्ययन में चौंकाने वाले आरोप

अध्ययन में चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। इनमें चीनी प्रयोगशालाओं में 'विनाश के इरादा, डेटा छिपाना या दूषित करने' के आरोप शामिल हैं।

डेलमेल ने जल्द ही प्रकाशित होने वाले जर्नल की कॉपी अपने पास होने का दावा किया है। माना जा रहा है इस जर्नल का अध्ययन सामने आने के बाद विशेषज्ञों के बीच हलचल मचने वाली है जो अभी तक ये कहते रहे हैं कि यह वायरस लैब में न तैयार होकर जानवरों से ही इंसान में पहुंचा है।

कोरोना वायरस को लेकर चीन किसी भी जांच का तीखा विरोध करता रहा है। लेकिन इस बीच विशेषज्ञों, राजनेताओं ने इस आशंका की तरफ देखना शुरू किया है कि यह वायरस वुहान लैब से निकला है और इसकी जांच के लिए भी मांग तेज हो गई है। इसमें यह जांच करना भी शामिल है कि क्या चीनी अधिकारियों ने शुरुआत में वायरस के फैलने के सबूत छिपाए थे।

क्या है अध्ययन में?

क्या है अध्ययन में?

डाल्गलिश और सॉरेनसन ने पिछले साल जब वैक्सीन बनाने के लिए कोविड-19 के नमूनों का विश्लेषण कर रहे थे इसी दौरान उन्हें वायरस में 'यूनिक फिंगरप्रिंट्स' मिला जो कि केवल प्रयोगशाला में हेरफेर से ही तैयार हो सकता है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक उन्होंने निष्कर्षों को प्रकाशित करने की कोशिश की लेकिन प्रमुख वैज्ञानिक जर्नल ने उन्हें खारिज कर दिया गया जो कि उस समय इस बात पर दृढ़ थे यह वायरस चमगादड़ या किसी अन्य जानवर से इंसानों में पहुंचा है।

शुरुआत में कोरोना वायरस के लैब में तैयार होने की आशंकाओं को अकादमिक जगत ने कड़े शब्दों में खारिज किया था। ब्रिटेन की खुफिया संस्था एमआई6 के पूर्व चीफ सर रिचर्ड डियरलव ने सार्वजनिक रूप से वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए जाने की बात कही थी जिसे फेक न्यूज कहकर खारिज कर दिया गया।

आखिर दुनिया में उठने लगी जांच की मांग

आखिर दुनिया में उठने लगी जांच की मांग

अब वायरस के महामारी के रूप में एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद प्रमुख अकादमिक, राजनेताओं और मीडिया ने आखिरकार इस तरीके से सोचना शुरू किया है और इस संभावना पर विचार हो रहा है कि कोविड-19 संभवतः चीन के वुहान शहर में स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला है।

इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने खुफिया संस्थाओं को वायरस की उत्पत्ति के बारे में फिर से जांच करने का आदेश दिया है। इसमें उस थ्योरी की जांच भी शामिल है जिसमें कहा जा रहा है कि वायरस लैब में दुर्घटना के चलते बाहर पहुंच गया।

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