Strait of Hormuz पर अब ईरान वसूलेगा टोल टैक्स? किसका है इस पर असली हक, क्या होगा दुनिया की जेब पर असर
Strait of Hormuz Iran Toll Tax:: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अब एक नई आर्थिक जंग छिड़ती दिख रही है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), अब चर्चा के केंद्र में है।
खबर है कि ईरान की संसद एक ऐसा कानून (विधेयक) तैयार कर रही है जिसके तहत इस रास्ते से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से 'टोल टैक्स' या सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा।

अगर यह कानून लागू होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो जाएगा।
Strait of Hormuz पर ईरान का नया 'टोल' प्लान क्या है?
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के मुताबिक, होर्मुज जैसे जलडमरूमध्य 'अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट मार्ग' माने जाते हैं। इसका मतलब है कि सभी देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने का अधिकार होता हैं। तटीय देश इस मार्ग को बंद या बाधित नहीं कर सकते। 'ट्रांजिट पैसेज' का अधिकार अनिवार्य है और इसे बदला नहीं जा सकता है इसलिए कानूनी तौर पर ईरान अकेले इस रास्ते पर नियंत्रण स्थापित कर टोल वसूल नहीं कर सकता।
ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' के मुताबिक, ईरानी सांसद एक मसौदा तैयार कर रहे हैं जिसमें दो मुख्य बातें कही गई हैं। पहला यह कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के पूर्ण नियंत्रण और निगरानी को कानूनी रूप से स्थापित करना। दूसरा यह है कि वहां से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले शुल्क लेना, ताकि देश के लिए कमाई का एक नया जरिया बन सके।
ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि होर्मुज उसके क्षेत्रीय जल का हिस्सा है। उसने 1993 में एक घरेलू कानून बनाकर कहा था कि विदेशी युद्धपोतों या संवेदनशील कार्गो वाले जहाजों को गुजरने के लिए उसकी अनुमति जरूरी होगी। ईरान UNCLOS के 'ट्रांजिट पैसेज' नियम को पूरी तरह नहीं मानता और 'इनोसेंट पैसेज' का हवाला देता है, जिसे वह सुरक्षा कारणों से सीमित कर सकता है।
टैक्स वसूलने के लिए ईरान के सामने क्या है UNCLOS Transit Passage Rules का चैलेंज?
समुद्र पर किसी देश का कितना हक होगा, इसके लिए संयुक्त राष्ट्र का एक कानून है जिसे UNCLOS (सयुंक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, होर्मुज जैसे रास्तों को 'इंटरनेशनल स्ट्रेट' माना जाता है। यहां सभी देशों के जहाजों को बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी शुल्क के गुजरने का अधिकार है।
इसे कोई भी देश एकतरफा तरीके से बंद नहीं कर सकता। ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। ईरान का कहना है कि यह उसके 'क्षेत्रीय जल' का हिस्सा है और यहां सिर्फ 'इनोसेंट पैसेज' लागू होता है, जिसे सुरक्षा के नाम पर वह जब चाहे रोक सकता है।
'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर ईरान के दावे से दुनिया क्यों है चिंतित?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। तेल की सप्लाई के लिए यह रास्ता बेहद जरूरी है क्योंकि दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
इस संकट का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा। पहले ही $114 प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां तनाव और बढ़ा, तो कीमतें $200 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। जिससे अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में इस रास्ते से केवल चीन और ईरान से जुड़े चुनिंदा जहाज ही गुजर पा रहे हैं। बाकी दुनिया के लिए यह मार्ग लगभग बंद या बेहद जोखिम भरा हो चुका है।
भारत के लिए अच्छी या बुरी क्या है स्थिति?
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने भारत को उन 'मित्र देशों' की सूची में रखा है जिन्हें इस रास्ते से गुजरने के लिए विशेष राहत दी जाएगी। इसका मतलब है कि भारतीय जहाजों को सुरक्षा और प्राथमिकता मिल सकती है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत है। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देश ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हैं।
अमेरिकी नौसेना अक्सर यहां 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' अभियान चलाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रास्ता खुला रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूरी तरह से इस रास्ते को बंद करने का जोखिम नहीं उठाएगा, क्योंकि उसका अपना तेल निर्यात भी इसी मार्ग पर निर्भर है।
फिर भी अगर ईरान टोल वसूलने की जिद पर अड़ा रहता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ा संकट बन जाएगा। इससे न केवल तेल महंगा होगा, बल्कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ेगी। चूंकि यह रास्ता ओमान के साथ साझा है, इसलिए ईरान कानूनी रूप से इसे अकेला नियंत्रित नहीं कर सकता।
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