Strait of Hormuz पर ईरान ने लगाई रोक! एक दिन में सिर्फ 15 जहाजों को परमिट, तेल की कीमतों से टेंशन में ट्रंप
Iran Limits Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा के बाद भी दुनिया को राहत नहीं मिली है। एनर्जी सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
गुरुवार, 9 अप्रैल को आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने के बजाय उस पर सख्त 'रेगुलेशन' लागू कर दिए हैं।

अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी सेना से 'विशेष अनुमति' लेनी होगी। ईरान की इस 'शर्तिया ढील' ने वैश्विक बाजार में बेचैनी पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है।
Strait of Hormuz खुला है, लेकिन अनुमति जरूरी: ईरान का दोहरे रुख से मची खलबली
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने साफ किया है कि जलडमरूमध्य तकनीकी रूप से खुला है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील है। उन्होंने कहा- हॉर्मुज खुला है, लेकिन प्रत्येक टैंकर और जहाज को सुरक्षित रूप से गुजरने के लिए ईरानी सेना और अधिकारियों के साथ 'आवश्यक व्यवस्था' करनी होगी।
हालिया हमलों और जलमार्ग की संकीर्णता के कारण कुछ तकनीकी बाधाएं हैं, जिनमें सावधानी जरूरी है। दूसरी ओर, अबू धाबी नेशनल ऑयल कॉर्पोरेशन (ADNOC) के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने ईरान के इस रुख की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि शर्तिया रास्ता देना, रास्ता देना नहीं होता। यह दूसरे नाम से किया गया नियंत्रण है।
हर दिन केवल 15 जहाजों को ही मिलेगी अनुमति, आखिर कहां फंसा हैं पेंच?
रूस की समाचार एजेंसी 'तास' (TASS) ने ईरानी आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि सीजफायर समझौते के तहत ईरान प्रतिदिन 15 से अधिक जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में केवल एक तेल टैंकर और पांच मालवाहक जहाजों के साथ दो ईरानी झंडे वाले टैंकर ही इस रास्ते से निकल पाए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने वाली है। लेकिन दोनों देशों के बीच अभी भी यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Program) और होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक पहुंच पर असहमति बनी हुई है। ईरान ने संकेत दिया है कि स्थायी समझौते की स्थिति में वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूल सकता है, जो जहाज के प्रकार और माल के अनुसार तय होगी।
Strait of Hormuz पर ट्रंप के दावे और ईरान का खंडन: किसका है इस पर नियंत्रण?
इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। ईरान ने इस दौरान 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें होर्मुज़ पर नियंत्रण और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बयानों में भारी विरोधाभास दिख रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान हॉर्मुज को तत्काल और सुरक्षित रूप से पूरी तरह खोलने पर सहमत हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कोई असली समझौता नहीं हो जाता, अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात रहेगी। ईरान की सुप्रीम काउंसिल ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को स्वीकार कर लिया है।
बाजार में मचा हाहाकार: कच्चे तेल में 3% से ज्यादा का उछाल
हॉर्मुज में जारी इस अनिश्चितता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। सीजफायर के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों में 3.6% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत $3.41 बढ़कर $98.16 प्रति बैरल पर पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज से जहाजों का आवागमन सामान्य नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती हैं, जिससे भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की महंगाई बढ़ सकती है।












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