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Sri Lanka: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे मौलिक अधिकारों के उल्लंघन मामले में दोषी करार

Sri Lanka News: श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लंबे समय से स्थगित स्थानीय परिषद चुनाव जल्द से जल्द कराने का आदेश देते हुए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यह फैसला तब आया है, जब पिछले साल की शुरुआत से 340 से ज्यादा स्थानीय परिषदों के चुनाव स्थगित कर दिए गए थे।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने विपक्ष और नागरिक समाज समूहों की तरफ से दायर चार मौलिक अधिकार याचिकाओं के जवाब में सुनाया है। अदालत ने पाया है, कि स्वतंत्र चुनाव आयोग के सदस्यों और वित्त मंत्री के रूप में विक्रमसिंघे ने चुनाव न कराकर, नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

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रानिल विक्रमसिंघे दोषी करार

स्थानीय चुनाव पिछले साल 9 मार्च को होने वाले थे, लेकिन ट्रेजरी ने दावा किया, कि वह चल रहे आर्थिक संकट के बीच चुनाव खर्च को वित्तपोषित करने में असमर्थ है, जिसकी वजह से 2022 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा, कि ट्रेजरी ने चुनाव कराने में पूरी तरह असमर्थता के अपने दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि "आर्थिक संकट और मुश्किलों का उल्लेख करने के अलावा, वित्त मंत्रालय और राजकोष सचिव के हलफनामे में चुनाव कराने में पूरी तरह असमर्थता दर्शाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई है।" कोर्ट ने राजकोष को स्थानीय परिषद चुनावों के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित करने का निर्देश दिया और कहा, कि 21 सितंबर को राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों को बाधित किए बिना चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कराए जाने चाहिए।

हालांकि, रानिल विक्रमसिंघे ने कहा, कि उन्हें चुनाव स्थगित करने के अपने फैसले पर पछतावा नहीं है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनाव कराने में शामिल होने का समय नहीं था, क्योंकि वह देश के अभूतपूर्व आर्थिक संकट से उबरने में व्यस्त थे, जिसके कारण उनके पूर्ववर्ती गोटबाया राजपक्षे को पद से हटा दिया गया था।

उन्होंने कहा, कि "जीने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए उस समय को समर्पित करने के कारण चुनाव कराने में असमर्थता पर खेद नहीं है। मैं लोगों के जीने के अधिकार का उतना ही सम्मान करता हूं, जितना मैं वोट देने के अधिकार का करता हूं।"

21 सितंबर को होने वाले चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे विक्रमसिंघे ने कहा, "खाना पकाने की गैस, दवा, भोजन और ईंधन के बिना लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी नहीं जी पा रहे थे। पिछले दो सालों में मैंने खुद को इस काम के लिए समर्पित कर दिया है।"

विक्रमसिंघे, जो 2022 में राष्ट्रपति बने थे, जब उनके पूर्ववर्ती गोटबाया राजपक्षे गंभीर आर्थिक संकट के बाद 2022 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर देश छोड़कर भाग गए थे, उन्हें महिंदा और बेसिल राजपक्षे सहित राजपक्षे का समर्थन प्राप्त था, ताकि वे गोटबाया के बाकी बचे कार्यकाल को संभालने के लिए संसदीय वोट जीत सकें।

2.9 अरब डॉलर के आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रम की मदद से विक्रमसिंघे ने देश की बिखरी हुई अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा किया है और सितंबर 2022 में मुद्रास्फीति को 70 प्रतिशत से घटाकर जून में 1.7 प्रतिशत पर ला दिया है, रुपये को मजबूत किया है और पहले से खत्म हो चुके विदेशी मुद्रा भंडार को फिर से बनाया है। हालांकि, देश अभी भी आर्थिक उथल-पुथल के प्रभावों से उबर नहीं पाया है।

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