श्रीलंका में ग्रहों की गणना में गलती पर बवाल, ज्योतिषियों के फैसले से आएगी तबाही? डरा हुआ है पूरा देश
Sri Lanka Conflict New Year Rituals Dates: श्रीलंका में सिंहला और तमिल समुदाय के बीच नये साल मनाने की तारीख को लेकर संग्राम मच गया है और ज्योतिषियों के बीच बवाल शुरू हो गया है। ये विवाद तब मचा है, जब पारंपरिक नये साल की तारीखों की घोषणा ज्योतिषियो की तरफ से की गई है।
श्रीलंका में, सिंहली और तमिल नव वर्ष बहुत सारी परंपराओं के साथ एक बड़ा उत्सव है। लेकिन, इस साल के उत्सव पर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषियों के बीच उस वक्त विवाद शुरू हो गया, जब त्योहारों के ऊपर खगोलीय घटना का साया पड़ गया।

श्रीलंका में ज्योतिषियों के बीच बवाल
श्रीलंका के सरकार के समर्थन वाले पारंपरिक ज्योतिषी, नए साल के अनुष्ठानों की तारीखों पर सर्वसम्मति से एक फैसला लेने में नाकाम हो गये हैं, लिहाजा त्योहारों को लेकर सही तारीख तय नहीं हो पा रहा है और ग्रहों की चाल को पढ़ने में ज्योतिषियों की कथित नाकामी के बाद 'आपदा' की चेतावनी दी जा रही है।
सरकारी ज्योतिषियों पर आरोप लग रहे हैं, कि उन्होंने ग्रहों की चाल की गणना करने में गलती की है, जिससे सितारों की सही स्थिति की गलत व्याख्या की जा रही है।
किन बातों के लेकर भिड़े हैं ज्योतिष?
दरअसल, श्रीलंका के लोग ज्योतिष को लेकर काफी ज्यादा विश्वास रखते हैं और श्रीलंका में ज्योतिष विद्या के जानकारों को काफी प्रभावशाली माना जाता है और श्रीलंका में चाहे वो हिंदू समुदाय के लोग हों, या फिर बौद्ध समुदाय के लोग, दोनों धर्मों को मानने वाले लोग ज्योतिषीय सलाह लेते हैं।
ज्योतिष सलाह लेने के बाद ही श्रीलंका में कोई शुभ काम किया जाता है, यहां तक की, श्रीलंका में चुनावों की घोषणा से लेकर व्यापारिक सौदों तक में ज्योतिष से जानकारी और सलाह मशविरा ली जाती है।
जिसके लिए श्रीलंका सरकार, सिंहली और तमिल नव वर्ष की तारीख तय करने के लिए ज्योतिषियों के 42-सदस्यीय समूह को नियुक्त करती है, जिन्हें स्थानीय रूप से क्रमशः अलुथ अवुरुद्दा और पुथंडु के रूप में जाना जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल में पड़ता है। आमतौर पर, वे इन मामलों पर आम सहमति पर पहुंच जाते हैं। लेकिन, पहली बार ऐसा हुआ है, कि पैनल सर्वसम्मति से एक नतीजे पर पहुंचने में नाकाम रहा है, जिससे सार्वजनिक विवाद पैदा हो गया है लोगों को आपदा की आशंका डराने लगी है।
नए साल की शुभ समय समिति के प्रवक्ता आनंद सेनेविरत्ने ने कहा, कि "हमने बहुत गहराई से चर्चा की है और बहुत विचार-विमर्श के बाद, हमने बहुमत के फैसले को मानते हुए शुभ समय को अंतिम रूप दिया है।"
बहुमत से फैसला लिया गया है, कि 13 अप्रैल की रात को पारंपरिक सिंहली और तमिल नव वर्ष की शुरुआत होगी, लेकिन हर कोई इस फैसले से सहमत नहीं है। घोषणा के बाद से ही इसका काफी विरोध हो रहा है।
फैसले का क्यों हो रहा है विरोध?
इस फैसले का विरोध करने वाले ज्योतिष रोशन चनाका ने दावा किया है, कि ग्रहों की चाल की गणना करने में गलती की गई है, जिससे गलत समय का चुनाव किया गया है, जो देश को 'आपदा' की तरफ ले जाएगा। हालांकि, उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन चेतावनी देते हुए कहा है, कि अगर सही समय का पालन नहीं किया गया, तो श्रीलंका "आग की लपटों में जल जाएगा।"
क्या श्रीलंका के लिए ये कोई चिंता की बात है?
श्रीलंका की राजनीति में ज्योतिष शास्त्र काफी अहम भूमिका निभाता है और अकसर राजनीतिक फैसलों को प्रभावित कर देता है। करीब 10 साल पहले पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अपने ज्योतिष से फैसला करके अचानक साल 2015 में मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दी थी, लेकिन वो चुनाव हार गये थे।
इसके अलावा, ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां, अपने ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही राजनीतिक फैसले करते हैं। खासकर इस वक्त, जब श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और आर्थिक संकट की वजह से देश हिंसक प्रदर्शनों का गवाह रहा है, जिसकी वजह से पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को इस्तीफा तक देना पड़ा था, वो श्रीलंका इस वक्त किसी और घरेलू विवाद में फंसना नहीं चाहेगा।
इसके अलावा, श्रीलंका में भी इस साल के अंत में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर चुके हैं, वो नहीं चाहेंगे, कि ग्रहों की ये चाल उनके खिलाफ जाए।
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