श्रीलंका में 100 दिन बाद फिर खुला राष्ट्रपति सचिवालय, रानिल विक्रमसिंघे ने दी ये चेतावनी
कोलंबो, 25 जुलाईः श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच आक्रोशित प्रदर्शनकारियों की वजह से बंद पड़ा राष्ट्रपति सचिवालय 100 दिन बाद सोमवार को खुल गया। इस दौरान राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर भारी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। प्रदर्शनकारियों ने 9 अप्रैल को इस इमारत के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने 9 जुलाई को इमारत पर धावा बोल दिया था। इसके बाद नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के आदेश पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने छापेमारी की और प्रदर्शनकारियों से इमारत को अपने कब्जे में ले लिया।

अभी भी चल रहा विरोध प्रदर्शन
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक सप्ताहांत में राष्ट्रपति सचिवालय को तैयार करने के लिए सफाई और मरम्मत का किया गया था। इसे सोमवार को फिर से खोल दिया गया। कर्मचारियों के यहां काम करने की सूचना है। सुरक्षा बलों ने सचिवालय के सामने गाले रोड को यातायात के लिए पहले ही खोल दिया था। उधर, गाले फेस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ श्रीलंकाई अधिकारियों की कार्रवाई को क्रूर और यातनापूर्ण बताते हुए आंदोलनकारियों ने इस कृत्य की निंदा की और कहा कि वे विरोध जारी रखेंगे, भले ही उन पर हमला ही क्यों न किया जाए। प्रदर्शनकारी 105 दिनों से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने दी चेतावनी
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को समर्थन देंगे लेकिन उन लोगों पर सख्त एक्शन लेंगे जो शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं। इस बीच दक्षिण अफ्रीका के एक मानवाधिकार समूह ने गोटाबाया के खिलाफ सिंगापुर में एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। इसमें श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को लिट्टे के खिलाफ दशकों से चले आ रहे गृहयुद्ध में उनकी भूमिका के लिए गिरफ्तार करने की मांग की गई है।












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