भारत के पड़ोसी देश पर डोरे डालने चला था चीन, उल्टा पड़ गया दांव
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यिक परिचालन चलाने के लिए चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है, जबकि इसके पास व्यापक सुरक्षा की निगरानी है।
नई दिल्ली। डोकलाम सीमा विवाद को लेकर भारत से टकरा रहे चीन को झटके पर झटका लग रहा है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ चाइना सी में अपनी नेवी को खुली छुट देने का एलान किया और अब श्रीलंका ने अपने देश में बंदरगाह बना रहे चीन के सामने नई शर्तें लगा दी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि श्रीलंका ने नई शर्तें लगाने में भारत के सामरिक हितों का पूरा ख्याल रखा है।

हम्बनटोटा पोर्ट समझौते में संशोधन करेगा श्रीलंका
श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अपने चीनी-निर्मित दक्षिणी बंदरगाह हंबनटोटा के लिए एक संशोधित समझौते को मंजूरी दे दी है, मतलब ये कि पहले हम्बनटोटा पोर्ट को लेकर चीन और श्रीलंका के बीच समझौता हुआ था उसमे संशोधन किया जाएगा। श्रीलंका ने ये फैसला भारतीय सामरिक महत्व को देखते हुए किया है। इसके साथ ही दुनिया की सबसे व्यस्त शिपिंग लेन के करीब का बंदरगाह विवादों में फंस गया है, क्योंकि ये बातें होती रही है कि अभी तक हंबनटोटा पोर्ट पर 1.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ है और चीन ने समझौते के तहत 80 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

श्रीलंका चीन की भूमिका सीमित करना चाहता है
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यिक परिचालन चलाने के लिए चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है, जबकि इसके पास व्यापक सुरक्षा की निगरानी है। नई शर्तों से भारत और जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी चिंताएं दूर हो जाएंगी, क्योंकि सैन्य उद्देश्यों के लिए बंदरगाह का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। आपको बता दें कि हंबनटोटा पोर्ट के सैन्य इस्तेमाल को लेकर भारत ने हमेशा अपनी चिंताए जाहिर की हैं।

हंबनटोटा पोर्ट के पीछे चीन की ये है रणनीति
चीन की यह नीति रही है कि वह हिंद महासागर में भारत के प्रसार को रोकने के लिए ‘मोतियो की माला की नीति-String of Pearls' अपना रहा है। वह भारत के पड़ोसी देशों में नौसैनिक बेस बना रहा है। इसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत म्यांमार के सितवे बंदरगाह, बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह, मालदीव के मराओ द्वीपीय बंदरगाह एवं पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को अपने सामरिक हितों के अनुकूल विकसित कर रहा है।

भारतीय हितों की चिंता करता है श्रीलंका
इससे पहले जनवरी में श्रीलंका ने उस रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया था , जिसमें दावा किया गया था कि सामरिक तौर पर अहम श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट को चीन को सौंप दिया गया है। श्रीलंका ने इस बात की पुष्टि की थी कि वह हंबनटोटा पोर्ट पर हमेशा श्रीलंका की ही मौजूदगी रहेगी। ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट को चीन को किराए पर दे दिया है। कहा था जा रहा था कि श्रीलंका ने चीन से 8 अरब डॉलर का लोन लिया था जिसे चुकाने में मुश्किल होने के चलते वह ऐसा करने जा रहा है।












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