श्रीलंका में स्थानीय चुनाव पर लगी रोक, धन की कमी के कारण इलेक्शन कमीशन ने खड़े किए हाथ
विपक्षी सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में एक मौलिक अधिकार याचिका दायर की थी। मौजूदा आर्थिक संकट के कारण पिछले साल मार्च से चार साल के लिए 340 स्थानीय परिषदों में नये प्रशासन की नियुक्ति के वास्ते चुनाव स्थगित कर दिया गया है।

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श्रीलंका आजादी के बाद से सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश की आर्थिक स्थिति इस हद तक खराब हो चुकी है कि श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार 500 मिलियन डॉलर गिर गया है। श्रीलंकाई रुपया पिछले एक साल में 45% गिरा है। यहां 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 365 रुपए हो गई है। धन की भारी कमी के कारण श्रीलंका में होने वाले स्थानीय चुनाव को स्थगित कर दिया गया है। यह चुनाव अगले महीने 9 मार्च को होने वाले थे। अब चुनाव की नई तारीख 3 मार्च को अधिसूचित की जाएगी।
चुनाव कराने के लिए नहीं हैं जरूरी धन
आपको बता दें कि श्रीलंका में स्थानीय चुनाव कराने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चुनाव स्थगित करने की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई और इसे मई तक के लिए स्थगित कर दिया। एक दिन बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आपस में विचार-विमर्श किया और फिर उसके बाद औपचारिक घोषणा की। चुनाव आयोग अब संसद के स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने से हस्तक्षेप की मांग करेगा, ताकि चुनाव कराने के लिए कोषागार से जरूरी धन हासिल किया जा सके।
चुनाव आयोग ने खड़े किए हाथ
इससे पहले चुनाव आयोग ने इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि देश के मौजूदा आर्थिक संकट से जुड़े कई कारणों से 9 मार्च को स्थानीय निकाय चुनाव कराना मुश्किल है। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को जोर देकर कहा था कि उनका काम संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने संकेत दिया था कि पहले से ही कमजोर राज्य वित्त के साथ स्थानीय चुनाव आयोजित करने से अतिरिक्त दबाव आएगा।
विपक्षी पार्टी ने राष्ट्रपति पर लगाए आरोप
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में समगी जन बालावेगया जैसी विपक्षी पार्टियां राष्ट्रपति विक्रमसिंघे पर आरोप लगा रही हैं कि वह हार के डर से ट्रेजरी से फंड को रोककर स्थानीय चुनावों को टालने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्षी दल विक्रमसिंघे पर अधिकारियों और चुनाव आयोग को प्रभावित करने का भी आरोप लगा रहे हैं। पिछले साल आर्थिक संकट के कारण मार्च में स्थानीय परिषदों के चुनाव को स्थगति कर दिया गया था। चार साल के कार्यकाल के लिए 340 स्थानीय परिषदों में नए प्रशासन के लिए चुनाव होना है।
सरकार ने बार-बार संकेत दिया है कि विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण आर्थिक संकट को देखते हुए चुनाव कराने का उचित समय नहीं है। सरकार का कहना है कि दस अरब रुपये के खर्च के साथ चुनाव कराने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।












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