South Korea: यूं सुक योल की गिरफ्तारी में क्यों हुई देरी? दक्षिण कोरिया की राजनीति में भूचाल, आगे क्या होगा?
South Korea Politics: दक्षिण कोरिया की राजनीति में पिछले एक महीने से कोहराम मचा हुआ है और अचानक मार्शल लॉ लगाने वाले राष्ट्रपति यूं सुक योल को आज सुबह सुबह गिरफ्तार कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी राष्ट्रपति को पद पर रहने के दौरान गिरफ्तार किया गया हो।
यूं सुक योल की गिरफ्तारी के दौरान भयानक ड्रामा देखने को मिला और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सैकड़ों की संख्या में पुलिसवाले पहुंचे थे। भ्रष्टाचार जांच कार्यालय के अधिकारी पिछले कई हफ्तों से दिसंबर की शुरुआत में मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े विद्रोह के आरोपों को लेकर उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।

हालांकि, इससे पहले भी उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी, लेकिन पहली कोशिश नाकाम हो गई थी, लेकिन आज उन्हें गिरफ्तार करने के लिए 3000 पुलिसकर्मियों के साथ अधिकारी पहुंचे थे और उनकी आवास में घुसने के लिए पुलिसकर्मियों को सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया।
राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के मायने क्या हैं? (Why South Korea's President Arrested)
राष्ट्रपति यूं के खिलाफ लगे आरोप काफी गंभीर हैं, हालांकि उन पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं, लेकिन विद्रोह भड़काना उन कुछ अपराधों में से एक है, जिनसे दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपतियों को भी छूट नहीं मिलती है और अगर दोषी पाया जाता है, तो भारी भरकम जुर्माना, कारावास या मृत्युदंड की भी सजा दी जा सकती है।
हालांकि, दक्षिण कोरिया में लंबे समय से फांसी की सजा पर रोक है।
यूं सुक योल, दक्षिण कोरिया के पहले ऐसे राष्ट्रपति बन गये हैं, जिन्हें पद पर रहने के दौरान गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, दक्षिण कोरिया के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां पद छोड़ने के बाद राष्ट्रपतियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और सजा सुनाई गई है।
लेकिन, राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद लोगों को अब ऐसा लग रहा है, कि देश में कानून का शासन है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को देश में लोकतंत्र खत्म होने का डर सता रहा है। वहीं, दक्षिण कोरिया में पिछले एक महीने में जो कुछ हुआ है, उसने अमेरिका को भी चिंता में डाल दिया है।
राष्ट्रपति की गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हुई?
यूं सुक योल के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव को पास भी किया गया और अब उन्हें उनके पद से सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन बावजूद इसके वो उस सुरक्षा के हकदार बने हुए थे, जो किसी राष्ट्रपति को दी जाती है। और दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी सशस्त्र सैनिक करते हैं, जिन्होंने पहली बार उनकी गिरफ्तारी की कोशिश को नाकाम कर दिया था।
राष्ट्रपति को पुलिस ने पहली बार 3 जनवरी को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी, लेकिन सशस्त्र बलों ने पुलिस को राष्ट्रपति के आवास में दाखिल ही नहीं होने दिया था।
हालांकि, पहली बार गिरफ्तारी की कोशिश नाकाम रहने के बाद पुलिस ने अपनी स्ट्रैटजी बदली और बुधवार को राष्ट्रपति यूं के "किले" में सीढ़ियां लेकर पहुंची, ताकि उन्हें उनके निवास में प्रवेश करने में मदद मिल सके। वहीं, पुलिस ने एक चेतावनी भी जारी की थी, कि अगर राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने से रोका गया, तो सेना के जवानों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, कि तनाव ना भड़के, इसके लिए पुलिस के तमाम अधिकारी बिना किसी हथियार के साथ राष्ट्रपति के आवास तक पहुंचे थे, हालांकि किसी तरह की गोलीबारी से बचने के लिए उन्होंने बुलेटप्रूफ़ जैकेट्स पहन रखे थे। पुलिस की राष्ट्रपति आवास के बाहर प्रदर्शनकारियों के साथ हाथापाई भी हुई, लेकिन गंभीर हिंसा की कोई रिपोर्ट नहीं है।
हालांकि, बाद में राष्ट्रपति ने भी अपने रूख नरम कर दिए थे और गिरफ्तारी से पहले एक वीडियो संदेश में उन्होंने बुधवार को कहा, कि उन्होंने "अप्रिय रक्तपात" को रोकने के लिए पूछताछ के लिए जांच टीम के सामने पेश होने का फैसला किया है।
क्या राष्ट्रपति की गिरफ्तारी उनके महाभियोग से जुड़ी है?
राष्ट्रपति यूं की गिरफ्तारी सीधे तौर पर उनके मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़ी है, लेकिन आपराधिक विद्रोह की जांच, महाभियोग प्रक्रिया से अलग है। उन्होंने मार्शल लॉ की जो घोषणा की थी, उसकी जांच अब दक्षिण कोरियाई संवैधानिक अदालत कर रही है, ताकि यह तय किया जा सके, कि दिसंबर के मध्य में राष्ट्रपति यूं पर महाभियोग चलाने के लिए संसद ने जो वोट किया था, उसे बरकरार रखा जाए या इसे खारिज कर दिया जाए। और इसी से तय होगा, कि राष्ट्रपति अपने पांच साल के कार्यकाल की बाकी की अवधि पूरा कर पाएंगे या नहीं।
कोर्ट के पास फैसला सुनाने के लिए 14 दिसंबर से 180 दिन हैं, और कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है, कि पिछले पांच हफ्तों में दक्षिण कोरिया में व्याप्त राजनीतिक संकट की गंभीरता को देखते हुए, इसके आठ मौजूदा न्यायाधीश जल्दी ही किसी फैसले पर पहुंच सकते हैं।
दक्षिण कोरिया में अब आगे क्या होने वाला है?
राष्ट्रपति यूं के खिलाफ जो राजनीतिक और आपराधिक मामले डल रहे हैं, उसकी सुनवाई अब अगले कई महीनों तक होती रहेगी, लेकिन इस समय इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि वे कैसे समाप्त होंगे।
उन्हें विद्रोह के आरोपों पर आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन संवैधानिक न्यायालय द्वारा उन्हें बहाल कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति यूं के लिए सबसे खराब स्थिति यह होगी, कि उन्हें विद्रोह के आरोपों पर आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और संवैधानिक न्यायालय उन्हें पद से हटा सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूं को मौजूदा गिरफ्तारी वारंट पर 48 घंटे तक पूछताछ के लिए हिरासत में रखा जा सकता है। इसके बाद अधिकारियों को यह तय करना होगा, कि उन्हें रिहा किया जाए या उन्हें 20 दिनों तक हिरासत में रखने के लिए नया वारंट मांगा जाए। राष्ट्रपति की कानूनी टीम ने उनकी हिरासत को अवैध बताया है।
संवैधानिक न्यायालय को यूं के महाभियोग पर विचार-विमर्श करने के लिए फरवरी की शुरुआत तक पांच सुनवाई करनी थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, कि निलंबित राष्ट्रपति इसमें भाग लेंगे या नहीं।
वे मंगलवार को पहली सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए थे और उन्होंने सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया था, जिसके कारण न्यायालय को कुछ ही मिनटों के बाद सत्र स्थगित करना पड़ा था। दक्षिण कोरियाई मीडिया ने बताया है, कि राष्ट्रपति यूं गुरुवार को होने वाली दूसरी सुनवाई में भी आने से इनकार कर देंगे और उनकी दलील होगी, कि उनकी जगह उनके वकील कोर्ट में पेश होंगे और सवालों के जवाब देंगे।
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