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6 घंटे से कम सोने वाले हो सकते हैं 'पागलपन' के शिकार, 35 साल चले रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों का खुलासा

6 घंटे से कम सोने वाले लोग मानसिक बीमारी डिमेंशिया की चपेट में आ सकते हैं। 35 सालों के रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने शोध में खुलासा किया है।

लंदन, अप्रैल 21: कम सोने वाले लोग अब ज्यादा देर सोना शुरू कर दें क्योंकि आपको अगर स्वस्थ रहना है तो सोना भी जरूरी है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद रिपोर्ट पब्लिश की है कि कम सोने वाले लोग मानसिक तौर पर बीमार हो सकते हैं और पागल होने की संभावना बढ़ जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 घंटे से कम सोने वाले लोग मानसिक विक्षिप्त हो सकते हैं।

6 घंटे से कम सोना खतरनाक

6 घंटे से कम सोना खतरनाक

50 साल की उम्र से ज्यादा उम्रवाले लोगों के लिए 6 घंटे से कम सोना खतरनाक साबित हो सकता है और उन्हें पागल बना सकता है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने 35 सालों तक करीब 8 हजार से ज्यादा ब्रिटिश नागरिकों पर रिसर्च करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है कि कम सोने वाले लोगों के पागल होने की संभावना ज्यादा है। रिसर्च जारी करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा कि 35 सालों तक 8 हजार लोगों पर रिसर्च किया गया और आंकड़ों को कैलकुलेट करने के बाद पाया गया है कि 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों के पागल होने का खतरा ज्यादा है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि वो इसके पीछे की वजह को तलाशने में नाकामयाब रहे हैं।

नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित रिपोर्ट

नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित रिपोर्ट

मंगलवार को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों में डिमेंशिया नाम की बीमारी हो सकती है। डिमेंशिया एक मस्तिष्क रोग है, जिसके अंतर्गत एक मरीज कई तरह की मानसिक बीमारियों से परेशान हो जाता है। जिनमें भूलने की बीमारी, अल्जाइमर, बोलने की क्षमता में कमी होना, चिड़चिड़ापन, फैसला करने में गलती, व्यक्तित्व में बदलाव समेत कई तरह की बीमारी शामिल है। खासकर 50 साल या 60 साल की उम्र वाले लोग अगर 6 घंटे से कम सोते हैं तो उनमें डिमेंशिया होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। लिहाजा, ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कहा है कि 'वैसे तो आपकी उम्र कुछ भी हो, आपको कम से कम 7 घंटे निश्चित तौर पर सोना चाहिए लेकिन अगर आप 50 साल से ज्यादा उम्र के हैं तो 6 घंटे की नींद आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है और आपमें डिमेंशिया का कोई ना कोई लक्षण आ सकता है'।

30 प्रतिशत खतरा ज्यादा

30 प्रतिशत खतरा ज्यादा

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कहा है कि 6 घंटे से कम सोने वाले लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा 50 साल की उम्र वाले लोग अगर 6 घंटे से कम की नींद लेते हैं तो फिर उन्हें कार्डियोमेटाबोलिक बीमारी और मानसिक बीमारी भी हो सकती है, जिसे डिमेंशिया के नाम से जाना जाता है।

1985 से चल रहा था रिसर्च

1985 से चल रहा था रिसर्च

फ्रेंच नेशनल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट यानि आईएनएसईआरएम के लेखकों ने ब्रिटेन के लंदन में इस विषय पर 1985 से रिसर्च करना शुरू किया। जिसमें ब्रिटेन के 7959 लोगों को शामिल किया गया था। इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन भी अपने आंकड़े दे रहा था। इस रिसर्च के दौरान रिसर्च में शामिल लोग कितनी देर सोते हैं और कितनी देर गहरी नींद में सोते हैं, उसपर नजर रखी गई। इस दौरान 3900 लोगों ने नींद पर नजर रखने वाली घड़ी भी पहन रखी थी। करीब 35 साल लंबा ये रिसर्च चला और फिर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि 6 घंटे से कम सोने वाले लोग डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं।

डिमेंशिया है खतरनाक बीमारी

डिमेंशिया है खतरनाक बीमारी

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल पूरी दुनिया में करीब एक करोड़ लोग डिमेंशिया बीमारी और अल्जाइमर के शिकार होते हैं। और रिपोर्ट में बताया गया है कि कम सोने की वजह से ये बीमारी और ज्यादा बढ़ती जाती है। हालांकि, कम सोने वाले जवान लोग भी क्या डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं, इसको लेकर अभी तक रिसर्च पूरा नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि रिसर्च के दौरान आगे पता चलेगा कि क्या ज्यादा देर सोने से डिमेंशिया बीमारी पर कंट्रोल हो सकता है या नहीं।

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