Science News: वैज्ञानिकों ने आखिरकार खोज ही लिया मंगल ग्रह पर तरल पानी, विज्ञान की दुनिया में ऐतिहासिक कामयाबी
Mars Liquid Water: हाल ही में किए गए शोध से पता चलता है, कि मंगल ग्रह की चट्टानी बाहरी परत में बहुत अधिक मात्रा में तरल पानी हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के ध्रुवों पर पानी की बर्फ की मौजूदगी के बारे में लंबे समय से पता है, लेकिन यह ग्रह पर तरल पानी की पहली खोज है।
"मंगल ग्रह की मध्य परत में तरल पानी" शीर्षक वाला यह रिसर्च पिछले हफ्ते कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के शोधकर्ताओं वाशन राइट, मैथियास मोरज़फेल्ड और माइकल मंगा ने जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS) में प्रकाशित किया है।

यह खोज मंगल के जल चक्र के बारे में इंसानी समझ को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है, जो ग्रह के जलवायु डेवलपमेंट, सतही परिवर्तनों और आंतरिक संरचना के बारे में सवालों के जवाब देने में मदद कर सकती है। यह खोज मंगल पर जीवन के सबूत खोजने के लिए चल रही कोशिशों को भी तेजी से बढ़ावा दे सकती है।
मंगल पर पानी खोजने के लिए कैसे किया गया स्टडी?
शोधकर्ताओं ने नासा के मार्स इनसाइट लैंडर से डेटा का इस्तेमाल करते हुए इस स्टडी को फाइनल किया है, जिसे नासा ने साल 2018 में मंगल ग्रह पर उतारा था और दिसंबर 2022 में यह रिटायर्ड हो गया है। हालांकि, अभी भी ये लैंडर कई तरह की जानकारियां भेजता रहता है।
सीस्मोमीटर से लैस, लैंडर ने चार वर्षों में मंगल के भूकंपों और उल्कापिंडों के प्रभाव से उत्पन्न भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड किया। कुल मिलाकर, इनसाइट ने अपने मिशन के दौरान 1,300 से ज्यादा भूकंपों को रिकॉर्ड करने में कामयाब रहा।
इन भूकंपीय तरंगों की गति की जांच करके, शोधकर्ताओं ने यह निर्धारित किया है, कि वे किस पदार्थ से होकर गुजर रहे थे। उन्होंने इनसाइट के डेटा का विश्लेषण करने के लिए पृथ्वी पर भूमिगत जलभृतों और तेल क्षेत्रों के मानचित्रण के लिए उपयोग किए जाने वाले भूभौतिकीय मॉडल का उपयोग किया। न्यू साइंटिस्ट के मुताबिक, उन्होंने पाया, कि तरल पानी से भरी टूटी हुई आग्नेय चट्टान की एक परत डेटा का सबसे अच्छी तरह से विश्लेषण कर रही है।

वैज्ञानिकों ने मुख्य निष्कर्ष क्या निकाला?
स्टडी से पता चला है, कि तरल पानी वाला यह परत, मंगल ग्रह की सतह के भीतर 10 से 20 किलोमीटर की गहराई पर स्थित है। अध्ययन से पता चलता है, कि यह पानी संभवतः अरबों साल पहले सतह से रिसकर आया होगा, जब मंगल पर नदियां, झीलें और संभवतः महासागर मौजूद थे।
स्टडी करने वाले वैज्ञानिक वाशन राइट ने द गार्जियन को बताया है, कि "पृथ्वी पर, भूमिगत जल सतह से रिसकर आया है, और हम उम्मीद करते हैं, कि यह प्रक्रिया मंगल ग्रह पर भी हुई होगी... यह रिसाव उस समय हुआ होगा, जब ऊपरी परत आज की तुलना में ज्यादा गर्म थी।"
यदि ये मापन मंगल ग्रह के समग्र रूप से प्रतिनिधि हैं, तो चट्टान के दरारों में फंसे पानी की मात्रा ग्रह पर 1-2 किलोमीटर गहरे समुद्र को भर सकती है। हालांकि तरल पानी की खोज मंगल ग्रह पर जीवन की पुष्टि नहीं करती है, लेकिन यह रहने योग्य वातावरण होने की उम्मीद को जरूर जगाती है।
क्या मंगल पर जीवन संभव हो पाएगा?
वैज्ञानिक माइकल मंगा ने न्यू साइंटिस्ट को बताया, कि मंगल ग्रह पर अभी तक जीवन के कोई सबूत नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा, कि "जैसा कि हम जानते हैं, जीवन के लिए पानी आवश्यक है। मुझे समझ में नहीं आता, कि (भूमिगत जलाशय) होने के बाद भी जीवन योग्य वातावरण क्यों नहीं है। यह पृथ्वी पर निश्चित रूप से सच है - गहरी खदानों में जीवन होता है, समुद्र के तल में भी जीवन होता है।"
यह खोज मंगल ग्रह पर उपनिवेश स्थापित करने की योजनाओं के लिए चुनौतियां पेश करती है। शोधकर्ताओं ने कहा है, कि इस पानी को निकालने के लिए 10-20 किलोमीटर गहरे छेद करना बेहद मुश्किल होगा।
यह अध्ययन मंगल ग्रह के भूविज्ञान और संभावित आवास-क्षमता के बारे में नई जानकारी प्रदान करता है, और इन संसाधनों के उपयोग हेतु भविष्य में होने वाले अन्वेषण मिशनों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियों को भी उजागर करता है।'












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