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    वैज्ञानिकों ने लैब में बनाए इंसानी अंडे

    By Bbc Hindi

    एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने लैबोरेटरी में इंसान के अंडे विकसित कर लिए हैं.

    सामान्य शरीर के साथ जन्म लेने वाली हर लड़की तक़रीबन 10 से 20 लाख अविकसित अंडाणु लेकर पैदा होती है.

    किशोर होने पर यही अंडे हर महीने एक-एक करके विकसित होते हैं जिसे मासिक चक्र कहा जाता है.

    एडिनबर्ग में मिली इस सफलता के बाद अब इन अविकसित अंडाणु को इंसान के शरीर से बाहर लैब में भी विकसित किया जा सकेगा.

    वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यह तकनीक उन बच्चियों के अंडे बचाने के लिए वरदान साबित हो सकती है जिनका कैंसर का इलाज चल रहा है.

    हालांकि इस तकनीक को असलियत में इस्तेमाल किए जाने से पहले अभी इस पर काफ़ी काम किया जाना बाक़ी है.

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    विज्ञान, नई शोध, प्रजनन
    iStock
    विज्ञान, नई शोध, प्रजनन

    बहुत काम होना बाक़ी है

    इन अंडों को लैब में विकसित करने के लिए बहुत एहतियात बरतनी पड़ती है. इसके लिए ऑक्सीजन और हार्मोन्स के अलावा प्रोटीन भी दिए जाते हैं.

    तरीक़ा इतना जटिल है कि अभी तक सिर्फ़ 10 फ़ीसदी अंडे ही पूरे विकसित हो सके हैं.

    एक सवाल ये भी उठाया जा रहा है कि चूंकि इनमें से किसी भी अंडे को अब तक फ़र्टिलाइज़ नहीं किया गया तो ये दावा कैसे किया जा सकता है कि ये तकनीक वाक़ई कारगर होगी.

    शोधकर्ताओं में से एक प्रोफ़ेसर इवलिन टेल्फ़र ने बीबीसी को बताया कि, ''विज्ञान के ज़रिए हम यहां तक पहुंच सकते हैं, यह जानना काफ़ी हौसला बढ़ाने वाला है. अभी इस पर बहुत काम होना है लेकिन इंसान के शरीर में अंडा कैसे बनता-बढ़ता है, यह समझने की दिशा में यह बहुत बड़ी सफलता है.''

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    कैंसर से लड़ रही बच्चियों के लिए वरदान साबित हो सकती है ये तकनीक
    ARMEND NIMANI/AFP/Getty Images
    कैंसर से लड़ रही बच्चियों के लिए वरदान साबित हो सकती है ये तकनीक

    कैंसर में कैसे मदद करेगी यह तकनीक?

    कैंसर के इलाज के दौरान की जाने वाली कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी से बांझ होने का ख़तरा रहता है.

    महिलाएं इलाज शुरू करने से पहले अपने अंडे फ़्रीज़ करा सकती हैं. यहां तक कि फ़र्टिलाइज़ किए गए भ्रूण भी लैब में सुरक्षित रखे जा सकते हैं.

    लेकिन कैंसर से जूझ रही बच्चियां (जो किशोर नहीं हुईं) ऐसा नहीं कर पातीं क्योंकि उनका मासिक धर्म शुरू ही नहीं हुआ होता.

    फ़िलहाल ऐसी बच्चियां इलाज शुरू करने से पहले ओवरी (अंडाशय) के टिश्यू को फ़्रीज़ करा सकती हैं जो बड़े होने पर शरीर में वापिस लगाया जा सकता है.

    लेकिन अगर इस सैंपल में कुछ गड़बड़ निकल जाए तो उनके आगे चलकर उनके मां बनने के आसार काफ़ी कम हो जाते हैं.

    ऐसे मरीज़ों के लिए लैब में अंडे विकसित करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Scientists have created human eggs in the lab

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