क्या किसी एलियन प्लैनेट से आया पृथ्वी पर ये रहस्यमयी हीरा? अन्य हीरों की तुलना में है बिल्कुल अलग
क्या किसी एलियन प्लैनेट से आया पृथ्वी पर ये रहस्यमयी हीरा? अन्य हीरों की तुलना में है बिल्कुल अलग
नई दिल्ली, 19 सितंबर: पृथ्वी पर एक रहस्यमयी खगोलीय हीरा मिला है। ये हीरा अन्य हीरों की तुलना में बिलकुल अलग है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये रहस्यम हीरा आकाश से उल्कापिंड के माध्यम से आया है। वैज्ञानिकों के दावे के बाद ये सवाल उठ रहा है कि ये क्या ये रहस्यमयी हीरा एलियन प्लैनेट से धरती पर आया है?

उल्कापिंड से यहां पृथ्वी पर आया है
ये रहस्मयम हीरा पृथ्वी पर कहां से आया और इसका निर्माण कैसे हुआ और इसके अस्तित्व पर वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। इसके छोटे-छोटे निशानों ने सुराग दिया। ऑस्ट्रेलिया में आरएमआईटी विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट के छात्र और शोधकर्ता अध्ययन के को राइटर एलन सालेक ने कहा कि उन्हें उत्तर पश्चिमी अफ्रीका में एक अंतरिक्ष चट्टान में एक अजीब "झुका हुआ" प्रकार का हीरा मिला।

उल्कापिंड के माध्यम से आया है ये हीरा
माना जा रहा है कि एक रहस्यमय खगोलीय हीरा एक उल्कापिंड के माध्यम से पृथ्वी पर आया था। जिसे शोधकर्ताओं द्वारा लोंस्डेलाइट नाम दिया गया।

अजीब हीरा पृथ्वी की सतह पर आ गया।
ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में खुलासा किया है कि अजीब हीरा पृथ्वी की सतह पर आ गया। सीएनएन के अनुसार इसका खुलासा तब हुआ जब ऑस्ट्रेलिया में मोनाश विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर भूविज्ञानी एंडी टॉमकिंस उल्कापिंडों को वर्गीकृत करने के लिए फील्ड में थे।

जानिए कब और कहां बने होंगे ये हीरे
शोधकर्ताओं का मानना है कि बौना ग्रह और एक बड़े आकार का क्षुद्रग्रह लगभग 4.5 अरब साल पहले टकरा गया था, जिसके परिणामस्वरूप हीरे का निर्माण हुआ था। सालेक ने कहा क्षुद्रग्रह यानी बौना ग्रह तब एक क्षुद्रग्रह द्वारा विनाशकारी रूप से मारा गया था, दबाव जारी कर रहा था और इन वास्तव में अजीब हीरे के बनाने में काम कर रहा

जानें बौना ग्रह क्या है
बता दें प्लूटो को बौना ग्रह कहा जाता है। हालांकि हमारी सौर प्रणाली में पांच बौने ग्रह हैं। सबसे प्रसिद्ध बौना ग्रह प्लूटो है, वर्ष 2006 में इसे ग्रह की श्रेणी से हटाते हुए बौना ग्रह घोषित किया गया था।

अन्य हीरे की तुलना में बहुत अलग है ये रहस्यमयी हीरा
आकाश से जो ये रहस्यमय खगोलीय हीरा आया है वो किसी भी अन्य हीरे की तुलना में बहुत शख्त है। वैज्ञानिको ने पाया कि इसकी कठोरता और ताकत पृथ्वी पर पाए जाने वाले किसी भी नियमित हीरे से अधिक है । हीरे की असामान्य हेक्सागोनल संरचना इसे पृथ्वी से उत्पन्न होने वाले अधिकांश हीरे की तुलना में कठिन बना सकती है। शिक्षाविदों के अनुसार, इसकी अजीबोगरीब रचना में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रयोग हो सकते हैं।
नोट- सभी फोटो RMIT University की है ।

जानिए कैसे बना है ये हीरा
वैज्ञानिकों ने अब खोज कर दी है कि वो कौन सी प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोंसडेलाइट हीरा बनता है। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही (पीएनएएस) अध्ययन का नेतृत्व मोनाश विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रोफेसर एंडी टॉमकिंस के शोध के अनुसार, माना जाता है कि लोंसडेलाइट को "उच्च तापमान और मध्यम दबाव पर एक सुपरक्रिटिकल तरल पदार्थ से" उत्पन्न किया गया है। टीम में शामिल टॉमकिंस को बताया कि ये "बाद में, वातावरण ठंडा होने और दबाव कम होने के कारण, लोन्सडेलाइट को आंशिक रूप से हीरे से बदल दिया गया था।"












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